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शॉर्ट फिल्म्स:मदर्स डे पर मां के साथ समय बिताने के लिए देखें ये ख़ास फिल्में

एक महीने पहले
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लॉकडाउन कर्फ्यू के चलते इस समय बच्चे घर पर हैं। बच्चों के साथ खेलने और मॉम के साथ मिलकर क्वालिटी टाइम बिताने का अवसर दोनों को मिला है। मां तो हमेशा बच्चों की पसंद के मुताबिक़ काम करने में जुटी रहती है, पर बच्चे समझ नहीं पाते कि क्या करें। मदर्स डे आ रहा है, ऐसे में बच्चों को एक मौका मिल रहा हैै मां को ख़ुश करने का। अपने सारे काम और मोबाइल छोड़कर मां के साथ समय बिताएं, मातृत्व दिवस पर मां से जुड़ी शॉर्ट फिल्में देखें।

सोल मदर

मां केवल वो नहीं जो जन्म देती है, बल्कि वो भी मां है जिससे रिश्ता मां जैसा हो। सास भी मां हो सकती है और बहू बेटी। और इस रश्ते को मज़बूती देने के लिए ज़रूरी है आपसी समझ और धैर्य। एफएनपी मीडिया की फिल्म ‘सोल मदर’ में भी सास और बहू का रिश्ता दिखाया है। बहू सास के साथ नहीं रहना चाहती जिसके लिए वह अपने भाई की मदद लेती है। फिर पछतावा भी होता है। कहानी का ये मोड़ काफ़ी दिलचस्प है, जिसे जानने के लिए देखें यह फिल्म।

मां

बच्चे चाहे कितने भी बड़े हो जाएं, उन्हें ज़िंदगी के हर मोड़ पर मां की ज़रूरत होती है। बेसुराय (BESURAE) की फिल्म ‘मां’ भी इसी पर आधारित है। फिल्म इन तीन ज़रूरी विषयों को भी पेश करती है, पहला लड़का-लड़की में भेद, दूसरा महिला अपना जीवन घर संभालने में व्यतीत कर देती है फिर भी सम्मान नहीं मिलता और तीसरा बच्चों के लिए मां की चिंता। बच्ची के पैदा होने से लेकर उसकी शादी होने तक का सफ़र बेहद सुंदरता से फिल्म के ज़रिए दर्शाया गया है।

स्पेशल डे

मां अपनी ख़ुशियों से पहले बच्चों की ख़ुशियों का ध्यान रखती है। बच्चे को क्या चाहिए क्या नहीं, वो सब जानती है। पॉकेट फिल्म्स की शॉर्ट फिल्म ‘स्पेशल डे’ में मां अपने बेटे के जन्मदिन की तैयारी कर रही है और बेटा दोस्तों के साथ पार्टी करने की। इस बीच वो ये भूल जाता है कि उसके साथ-साथ उसकी मां का भी स्पेशल डे है। क्या है वो स्पेशल डे, ये फिल्म देखकर ही पता चलेगा। कहानी छोटी है, लेकिन भावुक भी है। फिल्म का अंत आपको बहुत पसंद आएगा।

ज़िंदगी की आइटनरी​​​​​​​

मां ज़िंदगी के फैसले और रिश्तों के मायने सिखाती है, लेकिन कई बार बच्चे भी जीना सिखा देते हैं। ब्लश की फिल्म ‘ज़िंदगी की आइटनरी’ की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक कप चाय पर मां और बेटी सोलो ट्रिप के बारे में चर्चा कर रही हैं। बेटी सोलो ट्रिप पर जाना चाहती है, लेकिन ज़ाहिर है कि मां को चिंता होगी। पर कहानी यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि इस कहानी का अंत काफ़ी दिलचस्प है। जो महिलाएं परिवार और दफ्तर के बीच ख़ुद के लिए समय नहीं निकाल पातीं, उन्हें यह फिल्म देखनी चाहिए।

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