पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Madhurima
  • While Giving The Reins Of The Household In The Hands Of A Woman, It Is Said That She Is The Lakshmi Of The House. But Where Does The Husband Try To Become Narayana To Support This Lakshmi?

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

कहानी:गृहस्थी की बागडोर को स्त्री के हाथों में देते हुए यही कहा जाता है कि वो घर की लक्ष्मी है लेकिन इस लक्ष्मी का साथ निभाने के लिए पति नारायण बनने की कोशिश कहां करते हैं

प्रज्ञा तिवारी13 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • गृहस्थी सिर्फ़ एक के चलाए नहीं चलती, बल्कि पति और पत्नी दोनों को इसका संतुलन बनाए रखना होता है।

पिछले कुछ दिनों से कोमल के पेट में रह-रह कर अजीब सा दर्द उठता था। काम करते-करते दर्द होने लगता और कुछ देर बाद बंद भी हो जाता। काम काज में उलझी कोमल ध्यान ही नहीं दे पाई ख़ुद पर, धीरे-धीरे बहुत थकान भी रहने लगी, पूरी ताकत लगा कर घर के काम निपटा पाती थी। एक दिन मौका देख के उसने अपने पति विनय से कहा, ‘सुनिए! आजकल घर का काम नहीं हो पा रहा मुझसे, बड़ी थकान रहती है, ऊपर से दोनों बच्चे भी छोटे हैं, उनके पीछे भागते रहना पड़ता है हमेशा। तो सोच रही हूं एक कामवाली रख लूं। हमें आराम हो जाएगा।’ ‘हमें? या सिर्फ़ तुम्हें, क्या यार तुमसे दो बच्चे नहीं संभल रहे, कभी पेट दर्द, कभी थकान का बहाना पकड़े बैठी रहती हो। मेरी मां ने तो पूरी ज़िंदगी पूरे परिवार की सेवा करते गुज़ार दी, वो भी बिना किसी मेड का सहारा पकड़े और एक तुम हो। चार पैसे कमाओ वो भी कामवाली के हाथ में रख दो।’ कोमल को विनय के इस जवाब से हैरानी तो नहीं हुई मगर दुख बहुत हुआ। दिन भर घर की ज़िम्मेदारी में पिसती रहती हूं वो नहीं दिखा, मगर थोड़ा अपने लिए आराम मांगा तो बहाना लगने लगा। अब घर में बुज़ुर्ग सास-ससुर हैं, ख़ुद हम दोनों हैं, काम तो सबका बराबर ही होता है न, लेकिन ये बात मुंह से निकल गई तो बहस की सुई अलग ही दिशा में मुड़ जाएगी और सारी बात यहीं आकर रुकेगी कि तुम्हें मेरे मा-बाप बोझ लगते हैं। और ये जाने क्यों बात-बात पर अपनी मां के उदाहरण देने लगते हैं। गांव में दो-चार आदमी -औरत सहारे के लिए हमेशा खड़े रहते थे, बस उन्हें मेड नहीं कहा जाता था। और नहीं हूं मैं सासू मां जितनी हिम्मती, मेरा अपना शरीर जवाब दे रहा है, तो क्या जान दे दूं। कोमल मन ही मन गुस्से में जली जा रही थी, मगर दीवार पर सर मारने वाली बहस में पड़ने की ताकत नहीं थी, इसलिए चुप रह गई। कोमल को नाराज़ देख विनय समझाते हुए बोला, ‘मैं इसलिए कह रहा था कि मेड को जो पैसे देंगे उन पैसों से कहीं बाहर घूम आएंगे, कुछ बचत कर लेंगे।’ कोमल ने विनय को मुस्कुराते हुए देखा और पूछा ‘सच में?’ तो विनय झेंप गया। एक दिन सफ़ाई करते वक़्त कोमल को बहुत तेज़ पेट दर्द शुरू हुआ, वो पसीने से भीग गई और बेहोशी छा गई। सामान्य होने पर उसने विनय को फोन करके अपना हाल बताया। विनय तुरन्त बोला ‘हां, हां, तुम किसी को साथ लेकर अभी डॉक्टर के पास चली जाओ।’ कितनी लापरवाही से कह दिया इन्होंने ‘किसी के साथ चली जाओ।’ किसके साथ जाऊं, बूढ़े सास- ससुर के या बच्चों के? एक बार कह देते कि मैं काम खत्म करके तुम्हें ले चलूंगा तो भी मुझे ख़ुशी होती। पति अगर ध्यान रखने वाला हो तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी हल्की लगती है। ग़ुस्से में कोमल ने आगे से अपनी परेशानी बताना ही छोड़ दिया। विनय ने भी पूछा नहीं। एक दिन कोमल को मायके से फोन आया ‘दीदी, पापा की तबियत ठीक नहीं है आप लोग आ जाओ यहां।’ ‘भाभी क्या हुआ पापा को? कहां हैं वो? कैसे हैं पापा?’ एक अनजाने भय से घबरा के रोने लगी कोमल। ‘नहीं नहीं दीदी बस उनके सीने में हल्का दर्द हुआ तो आपको याद कर रहे हैं पापा, घबराने वाली कोई बात नहीं है। कोमल ने झट से विनय को फोन करके सारी बात बता दी। ‘अरे इस उम्र में ऐसा दर्द होता है कभी-कभी, आज मंगलवार है, बस चार दिन बीच में हैं, हम रविवार को चलेंगे बच्चों के साथ’ विनय ने बड़ी लापरवाही से बोल दिया। ‘इतनी छोटी बात नहीं है, विनय जितना तुम समझ रहे हो। ज़रूर मामला कुछ और है, मेरा दिल कह रहा है। तुम अभी चल रहे हो मेरे साथ या नहीं?’ कोमल ने दृढ़ होकर पूछा। ‘ऐसे कैसे चल सकते हैं अभी, बोला ना कि..’ विनय से बहस करके वक़्त बरबाद करने से पहले ही कोमल ने फोन बंद किया और अकेले ही निकल गई। अस्पताल पहुंच कर देखा तो पापा ऑपरेशन थियेटर में थे, सबके चेहरे पर उदासी छाई थी, मां ने रोते हुए बताया कि मेजर हार्ट अटैक था उन्हें, डॉक्टर ने ऑपरेशन बताया था मगर आॅपरेशन से पहले पापा तुम्हें देखना चाहते थे, उन्हें डर था कि कहीं ऑपरेशन के बाद तुमसे कभी मिल ही ना पाएंगे, मगर अभी डॉक्टर ने उनकी ख़राब हालत को देखकर ऑपरेशन शुरू कर दिया।’ कोमल के पैर कांपने लगे और धम्म से फर्श पर ही पसर गई, मन ही मन बस भगवान को याद करती रही। ऑपरेशन सफल रहा। पापा होश में आए तो सबसे पहले कोमल मिली उनसे, वे कुछ बोल नहीं पाए मगर आंखों के किनारे दो बूंद लुढ़क गईं। कोमल के मन में रह रह कर एक ही बात उठ रही थी कि कहीं वो विनय की बात मान लेती और पापा को कुछ हो जाता तो वह शायद ज़िंदगी-भर ख़ुद को माफ़ नहीं कर पाती। पापा ठीक हो रहे थे पर विनय नहीं आया, बस फोन पर हालचाल पूछ कर इतिश्री कर लिया करता। एक दिन कोमल के पेट में फिर से बहुत तेज़ दर्द होने लगा, डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि बच्चेदानी में गांठ बन गई है बड़ी सी, समय रहते इलाज होता तो दवाई से ही ठीक हो जाती मगर अब जल्द ही ऑपरेशन ज़रूरी है वरना जान को ख़तरा हो सकता है। उसमें कैंसर पनपने का भी डर था। कोमल को तो सुनकर ही बेहोशी आ गई। सबके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई। विनय भी भागता हुआ आया कोमल को लेने, लेकिन कोमल ने जाने से साफ मना कर दिया। विनय ने कहा ‘मैं अच्छा इलाज करवाऊंगा। तुम घर की लक्ष्मी हो।’ ‘लक्ष्मी ? मगर किसकी? मेरे नारायण कहां हैं? मैंने लक्ष्मी बन कर तुम्हारी सेवा की, मगर क्या तुम नारायण बन के मेरे दर्द को समझ सके? मैंने लक्ष्मी बन कर तुम्हारा सारा संसार अपना लिया, मगर क्या तुम नारायण बन कर मेरे मां-बाप तक को अपना पाए? लक्ष्मी को नारायण के पैर दबाते देख लोगों ने तो लक्ष्मी को नौकरानी ही समझ लिया, दोबारा कभी मुझसे लक्ष्मी बनने की उम्मीद मत रखना क्योंकि लक्ष्मी तभी है, जब नारायण हैं और तुम नारायण बिल्कुल नहीं हो। जो अपनी पत्नी को मौत के मुंह तक ले आया वो कैसा पति है?’ बरसों से दबी आ रही ज्वाला आज बाहर निकल ही आई। विनय नज़रें झुकाए, अपराधी की तरह चुपचाप सुनता रहा, क्योंकि ग़लती तो उसने की ही थी। कोमल की कही हर बात सही थी। उसने माफ़ी मांगते हुए कहा, ‘कोमल तुम जो सज़ा दोगी मुझे मंज़ूर है। मेरी ही लापरवाही ने तुम्हें इस हाल में ला दिया, मगर मैं अब अपनी ग़लती सुधार लूंगा। तुम मेरे घर की लक्ष्मी हो, मैं नारायण ना सही मगर तुम्हारा अच्छा पति बन कर दिखा दूंगा। बस तुम मेरे साथ चलो। बस, एक मौका दे दो।’ कोमल ना नहीं कर पाई और चली गई उसके साथ। सबसे पहले विनय ने घर में फुल टाईम घरेलू मददगार कामवाली लगवाई, कोमल के पूरे इलाज के दौरान विनय साये की तरह उसके साथ रहा। हर छोटी से बड़ी बात का पूरा ख़्याल रखा, कुछ समय बाद कोमल पूरी तरह ठीक हो गई। विनय समझ चुका था कि औरत को लक्ष्मी कहकर उस पर ज़िम्मेदारियां लाद देना आसान है, लेकिन उसका हर कदम पर साथ देने वाले एक नारायण स्वरूप पति का धर्म निभाना कठिन है। गृहस्थी का संतुलन और सार्थकता तो इसी में है।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज समय कुछ मिला-जुला प्रभाव ला रहा है। पिछले कुछ समय से नजदीकी संबंधों के बीच चल रहे गिले-शिकवे दूर होंगे। आपकी मेहनत और प्रयास के सार्थक परिणाम सामने आएंगे। किसी धार्मिक स्थल पर जाने से आपको...

    और पढ़ें