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नई राह:महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को लेकर लापरवाह रहती है और ये इनके बहानों में साफ़ झलकता है, आप भी स्वास्थ्य को लेकर लापरवाह है तो अब जागरूक हो जाइए...

डॉ. चंद्रकांति शर्मा, स्त्री रोग विशेषज्ञ20 दिन पहले
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  • बच्चों की तरह आप भी सेहत को लेकर बहाने बनाती हैं तो ऐसा करने से बचें।
  • ये बहाने आपको नुकसान पहुंचा रहे हैं।

एक सशक्त परिवार के लिए ज़रूरी है एक सशक्त और स्वस्थ महिला का होना। महिला घर की चीज़ों के साथ ही हर सदस्य का पूरा ध्यान रखती है। लेकिन जब बात ख़ुद का ख़्याल रखने, स्वयं को निखारने और बेहतर बनाने की आती है, तो उनकी तरफ़ से बहानों की झड़ी लग जाती है। इन्हें हम डिफेंस मेकैनिज़्म या आम भाषा में सुरक्षात्मक युक्ति कहते हैं। लेकिन इनसे सुरक्षा तो नहीं मिलती, उल्टे लंबे समय में नुक़सान ही होता है। अत: ख़ुद को इस तरह की बहानेबाज़ी से रोकें और जो काम ज़रूरी हैं, वे करें।

क्या करूं, मुझे तो समय ही नहीं मिलता
ख़ुद की सेहत और बेहतरी के लिए कुछ करना हो, तो हमेशा एक बहाना तैयार रहता है- समय ही नहीं मिलता। रुटीन चेकअप हो या सुबह-शाम की सैर पर जाने की बात, वे अक्सर यही कहती मिलेंगी कि घर के कार्यों से फ़ुरसत ही नहीं मिलती। यहां समझने वाली बात ये है कि अतिरिक्त समय किसी को नहीं मिलता, समय निकालना पड़ता है। सबके पास चौबीस घंटे ही होते हैं। आप भी ख़ुद का ख़्याल रखने के लिए चौबीस घंटे में से एक घंटे का समय निकालकर योग और प्राणायाम शुरू करें। बच्चे आपको ही देखकर सीखते हैं। आप अपने स्वास्थ्य के लिए लापरवाही बरतेंगी, तो वे भी वही सीखेंगे।

यह कोई मेरी सीखने की उम्र है भला
कुछ महिलाएं ख़ुद को पीछे ही रखती हैं। वे अपने आपको आज के समय के अनुसार ढालना ही नहीं चाहती हैं। नया सीखने की बारी आती है तो रटा-रटाया जवाब दे देती हैं कि यह मेरी सीखने की उम्र है भला। अव्वल तो सीखने की कोई उम्र नहीं होती और दूसरी बात, आजकल सीखना आसान भी है। बच्चों, अन्य परिजनों या सहेलियों से मोबाइल फोन, लैपटॉप चलाना सीख लीजिए। इन डिवाइस की मदद से बिल भरना, पैसे ट्रांसफर करना, ऑनलाइन रिचार्ज करना, कोई भी जानकारी प्राप्त करना, नए हुनर सीखना आदि बड़ी सरलता से हो सकता है। जब आप कुछ नया सीखेंगी, तो आपका आत्मविश्वास और आत्मशक्ति
दोनों ही बढ़ेंगे।

फिंक जाए इससे अच्छा है खा लिया जाए
अक्सर महिलाएं गैस-उल्टी की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचती हैं। जब उनसे बात की जाती है तो पता चलता है कि बासी सब्ज़ी खाई थी। कुछ बढ़े हुए वज़न के साथ आती हैं, तब पता चलता है कि घर का जो भी बचा हुआ भोजन होता है उसे ख़त्म करने के चक्कर में जबरन खा लेती हैं। तथ्य यह है कि भोजन को बनने के दो घंटे के अंदर ही खा लेना चाहिए, क्योंकि उसके बाद वह अपने पौष्टिक तत्व खोने लगता है। बासी भोजन अपच का कारण बनता है और अन्य नुक़सान भी पहुंचाता है। कोशिश करें कि खाना उतना ही पकाएं जितना खाया जा सके।

सस्ती मिल रही थी सो ख़रीद ली
कुछ नया सीखने और नई तकनीक से नाता रखने के साथ ही आज के ज़माने में स्व-नियंत्रण की कला भी महत्वपूर्ण है। मिसाल के लिए, ऑनलाइन शॉपिंग उपयोगी है, परंतु तभी तक, जब तक कि समझदारी से की जाए। आजकल मनोवैज्ञानिक बेतहाशा ऑनलाइन शॉपिंग को नशे के रूप में देखने लगे हैं। एक चीज़ ख़रीदने के लिए वेबसाइट देखें तो दस चीज़ें सामने आ जाती हैं। उनमें से पांच चीज़ें पसंद आ जाती हैं और तीन चीज़ें घर आ जाती हैं जिनमें से दो की वास्तव में ज़रूरत ही नहीं होती है। बहाना यह कि सस्ती मिल रही थी सो ख़रीद ली। ख़रीदारी न करें, तब भी नई-नई चीज़ें देखते रहने में घंटों का वक़्त बर्बाद हो जाता है। तब बहाना होता है जानकारी हासिल करने का। अत: बहाना छोड़ें और यह सीखें कि कब स्क्रीन से दूर हो जाना है।

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