जैसी श्रद्धा, वैसा पूजन:नवरात्र में क्षमता और श्रद्धा के अनुसार करें देवी मां भगवती का पूजन

पं. राहुल शर्मा (शास्त्री)11 दिन पहले
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  • इस संसार को चलायमान रखने वाली ‘शक्ति’ का महापर्व है नवरात्र।
  • सदियों से उपासना, पूजन, व्रत, ध्यान, गरबा आदि से देवी मां को प्रसन्न करने की रीत चली आई है।
  • यह समय विशेष फलदायक होता है।

विभिन्न वर्गों के लिए देवी आराधना के नियम भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। सबसे श्रेष्ठ यही है कि जिसकी जैसी क्षमता और श्रद्धा हो उस अनुसार देवी मां भगवती का पूजन करना चाहिए। सच्ची श्रद्धा से किए गए प्रत्येक कार्य से ईश्वर प्रसन्न होते हैं। आप अखंड ज्योत जला सकते हैं, जवारे भी लगा सकते हैं। मूलत: नवरात्र में घटस्थापना का महत्व होता है। पूर्वकाल से हमारी संस्कृति में नवरात्र में गरबे करने का प्रचलन रहा है, वह भी एक तरीक़ा है मां भगवती को प्रसन्न करने का।

षोडशोपचार पूजन

इसमें सर्वप्रथम भगवती का आवाहन, फिर पाद्य, अर्घ्य और आचमन तीन प्रकार के स्नान करवाए जाते हैं। इसके बाद पंचामृत, शुद्ध स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्थात भोग, ताम्बूल अर्थात लौंग-इलायची-पान एवं यथाशक्ति दक्षिणा आदि से देवी का पूजन किया जाता है। पूजन के पश्चात देवी की आरती की जाती है। विशेषकर नवरात्र में लाल पुष्पों द्वारा देवी पूजन विशेष फलदायी माना गया है।

जवारे का पूजन

मां भगवती की अर्चना जवारे (यवांकुर) लगाकर भी की जाती है। जवारे लगाने के लिए सबसे पहले स्वच्छ काली मिट्‌टी लें। इसमें गाय का गोबर और गंगाजल भी मिला सकते हैं। गेहूं के साथ विशेषकर जौ को मिश्रित करके जवारे लगाए जाते हैं। नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में कलश में जल लेकर आम के पांच पत्ते रखकर श्रीफल लेकर घटस्थापना करें। फिर जवारे लगाएं। भगवती अन्नपूर्णा का आवाहन करें कि वे इन जवारों में पधारें। फिर उनके साथ ही मां दुर्गा का ध्यान करके जवारों का पूजन करें।

पूजन की विधि में घट की पूजा करें, जवारों पर सीधे हाथ से थोड़ा जल अर्पित करें, जो पाठ करते हों, वो करें और फिर आरती करें। अंतिम दिन विसर्जन हेतु बाएं हाथ में अक्षत (चावल) लेकर यह प्रार्थना करें कि जिस धाम से आप पधारी हैं, उसी धाम काे पुन: पधारें। तत्पश्चात कलश एवं जवारों को उनके स्थान से थाेड़ा हिला दें। कुछ जवारे लेकर देवी मां को चढ़ा दें और कुछ आशीर्वाद स्वरूप अपने पास रख लें। शेष का किसी तीर्थ क्षेत्र या बहते पानी में विसर्जन कर दें।

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