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योग:योग से आंखों की सूजन में आराम मिलता है, कैसे करना है जानिए

अक्षर, योग विशेषज्ञ7 दिन पहले
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  • आंखों के नीचे के हिस्से के फूले होने या सूजन को पफी आइज़ कहते हैं। ये बढ़ती उम्र के चलते हो सकती है, लेकिन इसके अलावा भी इस सूजन के कई कारण हो सकते हैं।
  • कम नींद लेना या स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से भी ऐसा हो सकता है। इसका इलाज भी कराना पड़ता है। लेकिन कुछ योग मुद्राएं भी हैं, जो भले ही सीधी आंखों से जुड़ी ना हों, पर इस समस्या के लिए मददगार हो सकती हैं।

भ्रामरी प्राणायाम

— सुखासन में बैठ जाएं। — पीठ को सीधा और आंखें बंद करें। — हथेलियों को घुटनों पर ऊपर की ओर रखें (प्राप्ति मुद्रा में)। — दोनों कानों को अंगूठे से बंद करें। — तर्जनी उंगली को माथे पर रखें, मध्यमा उंगली मेडियल कैन्थस पर और अनामिका उंगली को नथुने के कोने पर। — श्वास लें और फेफड़ों में हवा भरें। फिर सांस छोड़ें। — जैसे ही सांस छोड़ते हैं, मधुमक्खी की तरह धीरे-धीरे एक भिनभिनाहट की आवाज़ करें यानी ‘म्म्ममममममम...।’ — इसे करते वक़्त मुंह बंद रखें और महसूस करें कि ध्वनि का कंपन पूरे शरीर में फैल रहा है।

सेतु बंधासन

— पीठ के बल लेट जाएं। हाथों को बगल में रखें। हथेलियों को ज़मीन पर सटा कर रखें। — पैरों को घुटनों से मोड़कर कूल्हों के क़रीब ले जाएं। — कूल्हों को जितना हो सके फर्श से ऊपर की तरफ़ उठाएं। — गर्दन सीधी रखें और शरीर को ऊपर उठाते हुए छाती को ठोड़ी के साथ लगाएं। — इस दौरान सिर को स्थिर रखें। ध्यान रहे कि दोनों जांघें एक साथ रहेंगी। — सांस छोड़ते हुए आसन को एक-दो मिनट या कुछ सेकंड के लिए करें। — फिर सामान्य अवस्था में लौटें।

मकर मुद्रा

— दाएं हाथ की हथेली को बाएं हाथ की हथेली के नीचे रखें। — दाएं हाथ के अंगूठे को बाएं हाथ की कनिष्ठा और अनामिका उंगली के बीच से निकालते हुए बाएं हाथ की हथेली के बीच में रखें। — अब बाएं हाथ के अंगूठे और अनामिका उंगली के सिरे को मिलाएं। बाकी उंगलियों को जितना हो सकते फैलाएं। — इसे पांच से दस मिनट रोज़ करें।

पादहस्तासन

— सीधे खड़े हो जाएं और पैरों को दो इंच की दूरी पर रखें। — अब सांस लें और हाथों को ऊपर उठाएं। — शरीर को ऊपर की तरफ़ उठाएं। — हाथों से लेकर कमर तक के हिस्से को आगे की तरफ़ ले जाते हुए नीचे की तरफ़ झुकें। — हाथ से ज़मीन को छुएं। यदि हो सके तो नाक को घुटनों के पास तक ले जाएं। — इसे दस से तीस सेकंड तक करें। — सांस लेते हुए धीरे-धीरे ऊपर की तरफ़ आएं। — सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौटें। इन अभ्यासों के साथ-साथ, त्रिकुटी ध्यान जैसी ध्यान तकनीकें उद्गीत नेत्र स्वास्थ्य के लिए उत्तम हैं।

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