आगामी अतीत:क्या वाकई में एलियन होते हैं और क्या है उड़नतश्तरियों का सच, डालें एक नज़र

प्रदीप5 महीने पहले
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  • 2 जुलाई को विश्व यूएफ़ओ दिवस भले मनाया जाता है, लेकिन यूएफ़ओ के अस्तित्व से रहस्य का परदा अभी हटाया नहीं जा सका है।
  • क्या यूएफ़ओ सच में हैं और वो महज़ एक अधिकृत घोषणा की दूरी पर हैं? या कोई भी इस बारे में अभी अंतिम निर्णय नहीं कर सका है? थोड़ा और विस्तार से जानते हैं।

तकरीबन 13.7 अरब वर्ष पहले ब्रह्मांड की उत्पत्ति ‘बिग बैंग’ से हुई थी। इसके बाद ब्रह्मांड विस्तार शुरू हुआ और अनेक आकाशगंगाओं का सृजन हुआ। कालांतर में आकाशगंगा मंदाकिनी में हमारे सौरमंडल का गठन हुआ और पृथ्वी की उत्पत्ति हुई। लगभग 450 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत हुई।

इंसानी कल्पना से परे अन्य ग्रह पर जीवन की मौजूदगी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

खगोल विज्ञानी भी मानते हैं कि ब्रह्मांड के सुदूर कोनों में पृथ्वी से हज़ारों-लाखों गुना विकसित बुद्धिमान सभ्यताओं की मौजूदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यह भी हो सकता है कि किसी ग्रह पर जीवन अपनी प्रारंभिक अवस्था में हो, जहां अभी विकास की प्रक्रिया चल रही होगी। लब्बोलुबाब यह है कि वर्तमान विज्ञान के मुताबिक पृथ्वी से इतर किसी अन्य ग्रह या खगोलीय पिंड पर जीवन न पनपने का कोई कारण नही है। आए दिन पूरे विश्व में यूएफ़ओ (उड़नतश्तरी) के दिखाई देने के दावों के समाचार सामने आते रहते हैं। हॉलीवुड फ़िल्मों में भी एलीयंस एक प्रमुख कथानक के रूप में मिल ही जाते हैं, इन फ़िल्मों में अक्सर उन्हें ऐसे खलनायको के रूप में पेश किया जाता है जिनका उद्देश्य पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन/उपभोग करना या इंसान को अपनी ग़ुलाम जाति के रूप में इस्तेमाल करना है। विज्ञान फ़ंतासी फिल्मों से अलग दुनियाभर में लाखों लोग यह मानते हैं कि एलीयंस उड़नतश्तरियों से पृथ्वी पर आते रहते हैं। आकाश में उड़ती किसी अज्ञात वस्तु को यूएफ़ओ (अनआइडेंटिफ़ाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट) या उड़नतश्तरी कहा जाता है। आज तक इस बात के पुख़्ता सबूत नहीं मिले हैं कि यूएफ़ओ के ज़रिए सच में एलीयंस धरती पर आते हैं या नहीं। सामान्यत: वैज्ञानिक समुदाय यूएफ़ओ दिखाई देने के दावों पर यक़ीन नहीं करता और तारों के बीच की विशाल दूरी के मद्देनज़र इसकी संभावना को ख़ारिज कर देता है। खगोल विज्ञानियों की ऐसी ठंडी प्रतिक्रियाओं के बावजूद उड़नतश्तरियों के देखे जाने के दावों में कोई भी कमी नहीं आई है। 2017 में न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कई नौसेना पायलटों ने उड़ान के दौरान यूएफ़ओ को देखा था। पेंटागन ने हाल ही में इस घटना के वीडियो को सार्वजनिक कर दिया है। इस वीडियो में साफ़तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे तेज़ रफ्तार वाली अज्ञात वस्तुएं नौसेना पायलटों के विमानों से आगे निकल रही हैं। हालांकि अमेरिकी सेना और ख़ुफ़िया विभाग को अपनी पड़ताल में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि सैन्य पायलटों द्वारा देखी गई चीज़ें यूएफ़ओ ही थीं। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, जापान, कनाडा, चीन आदि देशों सहित भारत में भी इनके देखे जाने के दावे किए जाते रहे हैं। हालांकि वक़्त के साथ इन दावों से भी परदा उठता गया। कई बार जब बाद में यूएफ़ओ दिखने के दावों की पड़ताल की गई तो प्राकृतिक और मानव निर्मित वस्तु या घटना के तौर पर उनकी पहचान की गई।

2001 से प्रति वर्ष विश्व यूएफ़ओ दिवस मनाया जाता रहा है। पहले यह 24 जून और 2 जुलाई दोनों ही तिथियों को मनाया जाता था। फ़िलहाल आधिकारिक रूप से 2 जुलाई को ही यूएफ़ओ दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का उद्देश्य है कि सारी दुनिया में उड़नतश्तरी और एलीयंस की मौजूदगी पर मुकम्मल बहस हो और वैज्ञानिकों द्वारा इस विषय पर शोध किया जाए। यूएफ़ओ के अस्तित्व को आधिकारिक तौर पर दुनिया में मान्यता नहीं दी गई है।

1947 से ही मीडिया में यूएफ़ओ दिखाई देने की घटनाएं लगातार आती रही हैं। इस बीच सात दशक बीत गए हैं मगर लगता है कि यूएफ़ओ मामले में कुछ ख़ास प्रगति नहीं हुई है, ये हैं या नहीं इसका विधिवत खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। वैसे भी ज़्यादातर वैज्ञानिक मानते हैं कि कुछ ख़ास प्राकृतिक घटनाओं मसलन, उल्का पिंडों के टूटने, तड़ित युक्त तूफान, असाधारण वातावरण, सेन्टीलीनियल बादल बनने वग़ैरह के कारण यूएफ़ओ दिखाई देने की घटनाएं होती हैं। कुछ मानव निर्मित कृत्रिम वस्तुएं भी यूएफ़ओ का भ्रम पैदा करतीं हैं। जैसे- रेडार प्रतिध्वनि, व्यावसायिक और सैन्य विमान, मौसम और अन्य शोधों के लिए प्रयुक्त होने वाले गु़ब्बारे आदि। यहां तक कि यूएफ़ओ के कुछ प्रसिद्ध चित्र भी अफवाह हैं। एक प्रसिद्ध उड़नतश्तरी का चित्र जिसमें खिड़कियां और लैण्ड करने की लेग्स दिखाई दे रही थीं, वास्तव में यूएफ़ओ नहीं बल्कि मानव-निर्मित एक मशीन थी!

95% यूएफ़ओ दिखाई देने की घटनाओं को उपरोक्त कारणों मे से किसी एक की वजह से ख़ारिज किया जा सकता है। लेकिन 5 प्रतिशत घटनाएं आज भी रहस्य बनी हुई हैं, जिनको सुलझाने की कोशिशें अभी जारी हैं। फ़िलहाल यह रहस्य अभी बरक़रार है कि क्या इंटरस्टेलर-लाइफ़ का सच में ही अस्तित्व है, जहां से एलीयंस यूएफ़ओ रूपी स्पेसशिप से मौक़ा-मुआयना करने पृथ्वी पर जब-तब चले आते हैं?

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