पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

आनंद-पंचांग:नए साल का श्रीगणेश करें भगवान गणेश की सीखों से, युवाओं के लिए विशेषरूप से लाभदायक हैं ये सीख

12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • किसी भी कार्य के शुभारम्भ को श्रीगणेश कहते हैं। अब जब नए वर्ष का आरम्भ हो रहा है तो क्यों ना श्रीगणेश के इस अवसर पर गणेश-तत्व के कुछ गुणों को जानें और विशेषकर युवाओं के लिए उनकी ज़रूरत को पहचानें।

हर उम्र के पास ज़िंदगी की अपनी एक चाल है। बचपन में लड़खड़ाते हैं, बुढ़ापे में बड़ी ताक़त लगती है चलने में।

एक युवा अवस्था ऐसी होती है, जिसमें चलना तो क्या, उड़ने का ही भाव होता है। फिर युवा मन की उड़ान का तो कहना ही क्या। जीवित प्राणियों की उड़ान में पक्षी बेजोड़ होते हैं।

विज्ञान कहता है सामान्य पक्षी में पांच पंख होते हैं, जिनसे वह उड़ता है। ये ही पांच पंख किसी भी युवा के लिए जीवन के पांच क्षेत्र हैं, जहां सचमुच उसे उड़ान भरना है सफलता की, सुख की और शांति की।

भारत में 12 जनवरी का दिन युवाओं को समर्पित किया गया है, इसलिए इसे युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

हमारी संस्कृति के पास कुछ चरित्र ऐसे हैं, जिन्होंने जीवन में अपनी लीला से इन पांच क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े अद्भुत संदेश दिए हैं। इन्हीं में से एक हैं गणेशजी। सरस्वती बुद्धि की देवी हैं तो गणेशजी विवेक के देवता। बिना विवेक के बुद्धि ग़लत काम करा ले जाएगी।

जिस युवा का विवेक जाग्रत हो गया, उसकी प्रतिभा का तो फिर विस्फोट होना ही है। उसकी उड़ान को ज़माना देखेगा। जोश में होश के लिए विवेक ज़रूरी है और यह मिल सकेगा श्री गणेश से।

इस बात को पांच आयामों में परखते हैं-

1. शिक्षा या कॅरियर
गणेशजी प्रथम पूज्य हैं। यहीं से प्रतिस्पर्धा में प्रथम आना और किसी समूह का नेतृत्व करने के गुण किसी में भी उतर जाएंगे, यदि वह ठीक से गणेशजी से जुड़ जाए।

गणेशजी से जुड़ने का अर्थ उनकी उपासना तो करना ही है, उनके कुछ मंत्रों की भी जानकारी होनी चाहिए। जैसे-

‘ओम् गं गणपतये नम:’

इसको जितना जपें या कहें गुनगुनाएं, उतना लाभ मिलेगा, क्योंकि मंत्रों की अपनी तरंगें होती हैं। फिर गणेश चरित्र को समझें और जीवन से जोड़ें।

दरअसल विवेक मनुष्य से अपना मूल्यांकन करवाता है। आधुनिक प्रबंधन में एक शब्द चलता है- फ़ॉलोअप। सभी के पास होते तो 24 घंटे ही हैं। इस सीमित समय में कोई महत्वपूर्ण काम करना हो तो फ़ॉलोअप बहुत ज़रूरी हो जाता है। सामान्य भाषा में कई लोग इसे पीछे पड़ना भी कहते हैं।

जब फ़ॉलोअप लेते हुए दोनों पक्ष दु:खी हो जाते हैं तो सारा वातावरण चिड़चिड़ा हो जाता है। यदि कुछ काम करते हुए फ़ॉलोअप करना हो तो पहला प्रयोग यह करिए कि अपने भीतर उतरकर ख़ुद का फ़ॉलोअप करें।

जैसे ही आप ख़ुद का फ़ॉलोअप करने भीतर उतरते हैं तो पाएंगे भीतर इतना व्यर्थ, इतना बेकार पड़ा है कि उसे हटाएं तो जो सार्थक है, वह निकलकर आ जाएगा।

2. परिवार-विवाह
किसी भी युवा के जीवन में दो घटनाएं महत्वपूर्ण हैं- जि़म्मेदारी और विवाह।

चूंकि युवा मन उन्मुक्त होता है, इसलिए कभी-कभी ज़िम्मेदारियों को बोझ मान लेता है, बंधन समझ लेता है।

गणेशजी अपनी जि़म्मेदारियों के प्रति अद्भुत थे। उनके जन्म की एक कथा है: पार्वतीजी ने अपने कक्ष में दूसरे लोगों का प्रवेश रोकने के लिए अपने शरीर के मैल से एक पुतला बनाया, उसमें शक्ति डाली और उसे आदेश दिया कि तुम हमारे द्वारपाल हो, कोई भीतर न आने पाए। गणेशजी ने अपनी ज़िम्मेदारी समझी, उसे निभाई। इसी बात पर शिवजी से उनका युद्ध भी हुआ और उनका मस्तक काट दिया गया था।

परिवार के प्रति ज़िम्मेदारी समझने और निभाने के लिए युवाओं को गणेशजी से सतर्कता और समर्पण का भाव समझना चाहिए।

इस पूरे प्रसंग में गणेशजी को क्रोध आया, शिवजी को क्रोध आया, पार्वतीजी को भी क्रोध आया, पर बाद में गणेशजी ने सबसे क्षमा मांगी और आज के लिए हमें एक संदेश दे गए कि घर-परिवार में मतभेद होना, क्रोध आना स्वाभाविक है।

यहां जिसने समझ और विवेक से काम ले लिया, वह सफल हो जाएगा। तो जब भी क्रोध आए, धैर्य से विचार करना, विवेक का इस्तेमाल करना।

3. मित्रता
युवा अवस्था में कहानी के सारे केंद्र मित्रों के पास सिमटे होते हैं। लेकिन मित्रता के साथ सबसे बड़ा ख़तरा है संग कब कुसंग में बदल जाए, मौज-मस्ती कब भोग-विलास में उतर आए।

युवा अवस्था में काम-ऊर्जा का वेग बहुत तेज़ होता है। इसलिए चरित्र-पतन की सारी सम्भावनाएं होती हैं।

गणेशजी ने कामासुर नाम के एक दैत्य को मारने के लिए विकट अवतार लिया था। जलंधर नाम के राक्षस की पत्नी वृंदा को विष्णुजी ने मोहित किया था, उस समय कामासुर की उत्पत्ति हुई थी।

मनुष्य के भीतर जब काम-वासना जागती है तो उसकी सारी समझ समाप्त हो जाती है। गणेशजी ने अपने विकट अवतार में कामासुर से युद्ध किया। उसके पुत्रों को मारा, पर कामासुर को छोड़ते हुए आशीर्वाद दिया कि तुझे शांति प्राप्त हो।

काम को समाप्त नहीं करना है, काम-ऊर्जा का रूपांतरण करना है। गणेशजी ने यह जो बात समझाई, युवा अवस्था में बहुत आवश्यक है। भरी जवानी में यदि काम-ऊर्जा का सदुपयोग कर लिया तो वह आपका जोश, आपकी ज़िद, आपका संकल्प और आपकी ताक़त बन जाएगी।

4. स्वास्थ्य
हर क्षेत्र में इतनी प्रतिस्पर्धा है कि काम करते हुए किसी का भी तनाव में डूब जाना स्वाभाविक है। प्रसन्न रहकर काम करना गणेशजी सिखाते हैं।

उनकी पूरी छवि देखिए, ऐसा लगता है आकर्षण के साथ-साथ संदेश भी है। जब वे लड्डू खा रहे होते हैं तो लगता है कह रहे हैं जीवन की मिठास को सदैव ग्रहण करते रहना चाहिए। उनका बड़ा उदर, लम्बी सूंड और उठे हुए हाथ हमें आश्वस्त करते हैं कि जीवन में कितना ही तनाव आए, अपनी मस्ती मत छोड़ना।

तनाव इसलिए भी होता है कि ख़ासकर इस समय कोई भी काम करो, उसमें बाधाएं, अड़ंगा, अड़चन बनी ही रहती है। समर्थ से समर्थ व्यक्ति को भी कुछ पाने के लिए घोर संघर्ष करना पड़ता है।

गणेशजी का एक अवतार है विघ्नराज अवतार। किसी काम में आने वाली बाधाओं को विघ्न कहते हैं। यह अवतार गणेशजी ने तब लिया था, जब पार्वतीजी की हंसी से ममतासुर नाम का राक्षस पैदा हुआ था।

देखिए, पैदा हास से हुआ, पर संसारभर में लोगों को रुलाने लगा। तब गणेशजी ने विघ्नराज बनकर उसे सही दिशा दी थी। सबसे अच्छा स्वास्थ्य है ख़ुश, प्रसन्न रहना। जि़ंदगी में छोटी-मोटी बीमारियां तो आती रहती हैं लेकिन, जिसने विघ्नराज का अर्थ समझ लिया, वह इस अड़चन को दूर कर पार पा जाएगा।

विवेक हासिल कर लो, वह समझा देगा कहां, कितना दु:खी होना और कब, कैसे तुरंत दु:ख से मुक्ति पा जाना।

5. देश-समाज
गांधी जी कहा करते थे मैं भारत को लेकर सबसे ज़्यादा आश्वस्त इसलिए हूं कि यहां के कण-कण में धर्म-अध्यात्म बसता है। लेकिन, एक बात को लेकर मुझे बड़ी पीड़ा, निराशा होती है कि धीरे-धीरे युवाओं के मन से करुणा जाती जा रही है।

गांधी जी की यह चिंता बढ़ती ही गई और आज हम देखते हैं कि युवा मन उत्साहित है, बहुत कुछ करना चाहता है, पर साइंस और टेक्नोलॉजी के इस युग में उनकी संवेदनाएं कम होती जा रही हैं। उनके लिए हर व्यक्ति, हर रिश्ता एक यंत्र बन गया है। अब तो ज़्यादातर युवा देश को, समाज को, परिवार को प्लेटफ़ॉर्म की तरह इस्तेमाल करने लगे हैं।

ध्यान रखिए, अपनी महत्वाकांक्षा और निज हित की अति न करें। आपके पास जो भी हो, जो भी मिले, उसमें से कुछ देश को, समाज को भी ज़रूर अर्पित करें। आज की युवा पीढ़ी के लिए गणेश चरित्र का यह बड़ा संदेश है...।

(लेखक परिचय
पं. विजयशंकर मेहता

2 जुलाई, 1957 को जन्मे पंडितजी ने 20 वर्षों तक भारतीय स्टेट बैंक में सेवाएं दीं। भास्कर समूह से भी 20 वर्षों तक जुड़े रहे। 15 वर्षों से पंडितजी विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दे रहे थे, किंतु 2004 में इन विषयों को जीवन प्रबंधन से जोड़ा। श्रीरामकथा, श्रीमद्भागवत, महाभारत, श्रीहनुमानचालीसा, गीता आदि अन्य 25 विषयों पर उनके व्याख्यानों को देखा, सुना, पढ़ा जा रहा है।)

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज ऊर्जा तथा आत्मविश्वास से भरपूर दिन व्यतीत होगा। आप किसी मुश्किल काम को अपने परिश्रम द्वारा हल करने में सक्षम रहेंगे। अगर गाड़ी वगैरह खरीदने का विचार है, तो इस कार्य के लिए प्रबल योग बने हुए...

और पढ़ें

Open Dainik Bhaskar in...
  • Dainik Bhaskar App
  • BrowserBrowser