कही-सुनी:क्या आपको भी लगता है कि गिरगिट छिपने के लिए रंग बदलता है! कुछ ऐसी ही अफ़वाहें और उनके सच

तेजस्वी मेहता4 महीने पहले
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  • हर सुनी-सुनाई बात सच नहीं होती। ज़्यादा सम्भावना तो इसी की है कि वह भ्रामक और मिथ्या हो।

हमारे आसपास कई सूचनाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें हर व्यक्ति दोहराता है और बिना तफ़्तीश किए उन्हें मान लेता है। इससे वे सत्य की पंक्ति में सिर ऊंचा किए खड़ी रहने लगती हैं। जैसे कि गोल्डफ़िश की याददाश्त, चमगादड़ों का अंधापन और गिरगिट का रंग बदलना।

गिरगिट की तरह रंग बदलना
गिरगिट की प्रसिद्धि का कारण है उसका रंग बदलना।
गिरगिट की तरह रंग बदलना एक प्रसिद्ध कहावत भी है। माना तो यही जाता है कि गिरगिट अपने आसपास की प्रकृति और परिवेश में ख़ुद को ढालने के लिए रंग बदलता है। किंतु यह बात भी मिथक ही है। सच तो यह है कि गिरगिट अपने शरीर के तापमान को नियंत्रण में बनाए रखने के लिए तथा दूसरे गिरगिटों को संकेत देने के अपने शरीर का रंग बदलते हैं। वे एक-दूसरे से सम्पर्क साधने के लिए तथा शक्ति प्रदर्शन के लिए चमकीले रंगों को धारण कर लेते हैं। दूसरे गिरगिटों के साथ लड़ाई में गिरगिट गहरा रंग अख़्तियार कर लेते हैं।
गिरगिटों की एक और विशेषता है और वह है उनकी आंखें। गिरगिट अलग-अलग दिशाओं में एक साथ देख सकते हैं। यह ऐसी विशेषता है, जो उनके अलावा किसी सरीसृप के पास नहीं होती है। अलबत्ता छिपकलियों के विपरीत गिरगिट की पूंछ एक बार टूटने पर फिर नहीं उग सकती।

गोल्डफ़िश की याददाश्त
गोल्डफ़िश की छवि एक भुलक्कड़ मछली की बनी हुई है...
...किंतु वास्तविकता यह है कि गोल्डफ़िश की याददाश्त 5 से 6 महीने तक रहती है। यहां तक कि उन्हें समय और एक तय दिनचर्या का भी भान होता है। देखा जाता है कि घरों के बंद इक्वेरियम में रहने वाली गोल्डफ़िश अपने भोजन का डिब्बा देखते ही उत्साहित हाे जाती हैं। यदि वे आसपास अपने मालिक को देख लें तो उत्साह में पानी से बाहर कूदने की भी कोशिश करती हैं। साथ ही गोल्डफ़िश की उम्र भी अधिक होती है। गिनीज़ बुक में सबसे उम्रदराज़ गोल्डफिश के रूप में ‘टिश' नामक मछली का नाम दर्ज है, जिसकी उम्र 43 वर्ष थी।
गोल्डफ़िश को लोग अपने घरों के फ़ेंगशुइ एक्वेरियम में रखना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें चीन के फ़ेंगशुइ शास्त्र में शुभ माना गया है। गोल्डफ़िश को गुडलक चार्म भी माना जाता है। दक्षिणी यूरोप में शादी की पहली सालगिरह पर पति अपनी पत्नी को गोल्डफ़िश तोहफ़े के तौर पर दिया करते हैं।

चमगादड़ देख नहीं सकते!
चमगादड़ देख नहीं सकते, यह भी बहुविख्यात मिथक है।
चमगादड़ नेत्रहीन नहीं होते हैं, बल्कि उनकी आंखें बहुत छोटी-छोटी होती हैं। उन्हें नेत्रहीन इसलिए मान लिया गया क्योंकि उनकी दृष्टि कमज़ोर होती है और वे रात के अंधेरे में ही शिकार करने को तरजीह देते हैं। किंतु चमगादड़ अपनी छोटी-छोटी आंखों से उस अंधेरे में आराम से देख सकते हैं जिसमें मनुष्यों को अंधकार के सिवाय कुछ नज़र नहीं आता। उनकी सुनने की क्षमता भी अत्यधिक होती है।
चमगादड़ों के बारे में यह भी प्रचलित है कि वो ख़ून चूसते हैं। जबकि सच यह है कि चमगादड़ की अधिकांश प्रजातियां कीड़े, फल या परागकण खाती हैं। इनकी तीन ही प्रजातियां ऐसी हैं, जो ख़ून चूसती हैं लेकिन वे मूल रूप से अमेरिका में पाई जाती हैं। और ऐसा तो काफ़ी कम देखा गया है कि वे इंसानों का खू़न पीते हों, वे ज़्यादातर दूसरे पक्षियों का ही ख़ून चूसते हैं।

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