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आशा-जनक:अपने पहनावे में छोटा-सा बदलाव भी आपके जीवन पर बड़ा असर डाल सकता है

12 दिन पहले
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  • हल्की-सी लिपस्टिक महिलाओं को निराशा से निकाल सकती है और दाढ़ी बनाने का छोटा-सा काम पुरुषों के मन में उत्साह भर सकता है।
  • कपड़े, बाल, जूलरी, यानी कुल मिलाकर हमारा हुलिया हमारे जोश और आत्मविश्वास के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण होता है।
  • इसमें थोड़ा-सा बदलाव भी जीवन पर बड़ा असर डाल सकता है।

एक बिज़नेसमैन सैन फ्रैंंसिस्को हवाई अड्‌डे पर हवाई जहाज़ का इंतज़ार कर रहा था। अचानक वह एक अच्छी पोशाक वाले सज्जन के पास गया और बोला, ‘देखिए, चूंकि आपने मुझे पहले कभी नहीं देखा और शायद मुझे दुबारा कभी देखेंगे भी नहीं, इसलिए मैं आपसे यह आग्रह करना चाहता हूं कि आप मेरी एक मदद करें।’ ‘बिलकुल! बताइए तो सही।’ उस आदमी ने जवाब दिया। ‘मैं जानता हूं कि यह आपको अजीब लगेगा, लेकिन मैं चाहता हूं कि आप मुझे ऊपर से नीचे तक देखें और मेरे हुलिए के बारे में ईमानदारी से अपनी राय दें।’ अजनबी ने उस आदमी को देखा और कहा, ‘देखिए, चूंकि आपने मुझसे पूछा है इसलिए मैं आपको अपने विचार बता देता हूं। आप चाहें तो एक-दो चीज़ें बदल सकते हैं। पहली बात तो यह कि आपका चश्मा फ़ैशन से बाहर हो चुका है। आजकल इतने मोटे फ्रेम नहीं चलते। फिर मैं इन मूंछों को भी थोड़ी छटवाऊंगा।’ ‘यही तो मुझे सुनना था।’ बिज़नेसमैन ने कहा और हवाई जहाज़ पर चढ़ गया। अगले ही दिन वह बार्बर और चश्मे की दुकान पर गया।

पहनावे से फ़र्क़ पड़ता है
अक्सर हमें सबसे अंत में पता चलता है कि हम सचमुच कैसे दिखते हैं। हो सकता है कि हममें किसी अजनबी से सलाह मांगने की हिम्मत न हो, लेकिन शायद हमें आईने में ख़ुद को देखकर यह पूछने की ज़रूरत है, ‘मेरी छवि मेरे बारे में क्या कहती है?’
जॉन टी. मोलॉय ने अपनी पुस्तक ‘ड्रेस फॉर सक्सेस’ में यह पता लगाने के लिए कई रिसर्च की हैं कि लोग कपड़ों के आधार पर दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। एक परीक्षण में मोलॉय ने 1,362 आम लोगों को एक ही आदमी के दो लगभग एक जैसे फोटो दिखाए। उनमें बस एक ही चीज़ अलग थी। आदमी वही था, पोज़ भी वही था; सूट, शर्ट, टाई और जूते- सबकुछ समान था। इकलौता फ़र्क़ रेनकोट के रंग का था। एक फोटो में यह काला था और दूसरे में हल्के बालुई रंग का था।
लोगों से कहा गया कि फोटो जुड़वां भाइयों के हैं और उन्हें पहचानना है कि उनमें से कौन ज़्यादा प्रतिष्ठित है।
परिणाम आश्चर्यजनक थे।
मोलॉय ने कहा, ‘87 प्रतिशत से ज़्यादा लोगों ने हल्के बालुई रंग के रेनकोट वाले व्यक्ति को चुना।’ पता नहीं क्यों सामान्य जनता काले रेनकोट को मध्यवर्गीय और हल्के बालुई रंग वाले रेनकोट को उच्चवर्गीय व्यक्तियों के साथ जोड़कर देखती है।
क्या लोग आपके पहनावे के आधार पर आपके बारे में तत्काल मूल्यांकन करते हैं?
बिलकुल। आप भी यही करते हैं। उदाहरण के लिए, मज़दूरों के जूते पहनकर इंटरव्यू देने वाले व्यक्ति को आप मैनेजर पद का उम्मीदवार नहीं मानेंगे।

ख़ुद से पूछें सवाल
कई बार साबित हो चुका है कि जो स्त्री-पुरुष अपने मनचाहे कार्यों के अनुरूप यूनिफॉर्म पहनने लगते हैं, उन्हें जल्द ही उन पदों का संभावित उम्मीदवार मान लिया जाता है। सिद्धांत यह है कि जब लोग इसे ‘देख’ सकते हैं तो वे वह ‘बन’ भी सकते हैं।
यह सवाल पूछा जा सकता है, ‘क्या प्रमोशन हुलिया बदलने का परिणाम था या फिर प्रबल लक्ष्य-निर्धारण और सकारात्मक आत्म-छवि का?’ अधिकांश लोग अपने हुलिए को तब तक नहीं बदलते हैं, जब तक कि वे अपना आत्म-सम्मान बढ़ा न लें या अपने लिए नए लक्ष्य न तय कर लें। दरअसल, आपका लक्ष्य दूसरों को नहीं, बल्कि ख़ुद को प्रभावित करना है!
सुबह तैयार होते समय थोड़ा-सा समय निकालकर अपने हुलिए के बारे में ख़ुद से ये सवाल पूछें-

क्या ये रंग और स्टाइल मेरे कामकाज के हिसाब से उपयुक्त हैं?
क्या आज के लिए मेरे कपड़ों का चुनाव सही है?
क्या मेरे बाल सबसे अच्छी तरह कढ़े हैं?
ये छोटी-छोटी बातें क्यों महत्वपूर्ण हैं?

जब आप अपने हुलिए के बारे में गर्व और आत्मविश्वास महसूस करते हैं तो यह आपके सामने आने वाली हर स्थिति में सकारात्मक कर्म में बदल जाता है। जूते चमकाने जैसे छोटे-से काम से आपके व्यवहार पर सूक्ष्म लेकिन गहरा प्रभाव पड़ सकता है। अचानक आप अपने बारे में बेहतर महसूस करने लगते हैं। आप ज़्यादा प्रभावी तरीक़े और आत्मविश्वास से चलने व बोलने लगते हैं। महिलाएं कोई ख़ास आभूषण पहनकर यही असर डाल सकती हैं। पुरुष स्टाइलिश टाई पहन सकते हैं। कई मामलों में प्रगति का सबसे प्रभावी तत्व मनचाही छवि के अनुरूप पोशाक का परिवर्तन होता है। ज़्यादातर लोग एक निश्चित शैली की पोशाक पहनने की आदत डाल लेते हैं और अपने हुलिए में कभी कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं करते हैं। अपनी पसंद का ध्यान ज़रूर रखना चाहिए, लेकिन समय-समय पर यह मूल्यांकन भी करना चाहिए कि आप अपने आस-पास की दुनिया की तुलना में कैसे हैं।

जिम हार्टनेस और नील एस्केलिन की पुस्तक ‘24 घंटे में ज़िंदगी बदलें’ से...

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