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देश-भूषा:जापान का राष्ट्रीय परिधान है किमोनो, जानिए क्या है यह परिधान और जापानी संस्कृति में क्या है इसका महत्व

ज्योत्स्ना पंत21 दिन पहले
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  • सदियों से जापानियों के स्टाइल को एक परिधान परिभाषित करता आया है- किमोनो।
  • यह जापान की ऐतिहासिक संस्कृति और कला का विशिष्ट संगम है।
  • 8 वीं सदी से अब तक किमोनो पारंपरिक जापानी इतिहास के साथ ही समकालीन जापानी संस्कृति का गवाह रहा है।
  • यह जापान का राष्ट्रीय परिधान भी है। हालांकि अब यह पोशाक केवल विशिष्ट अवसरों पर पहनी जाती है।
  • हमारे नए स्तम्भ देश-भूषा के इस पहले अंक में पढ़िए- किमोनो की कहानी।

किमोनो की उत्पत्ति दो शब्दों से मिलकर हुई है- कि यानी वियर (पहनने) और मोनो यानी थिंग (वस्तु) अर्थात पहनने की वस्तु या कपड़ा। किमोनो विभिन्न स्टाइल और पैटर्न में आते हैं। यह एक ही बड़े कपड़े को चार भागों में बांटकर टी आकार में हाथ से सिला जाता है। इस सिंगल कपड़े को टेन्स कहा जाता है। किमोनो को कमर पर बेल्ट से बांधते हैं, जिसे ओबी कहते हैं। इसके साथ ताबी (मोज़े) और ज़ोरी या गेता (चप्पल) पहनी जाती है। किमोनो जापान की महिलाएं और पुरुष दोनों पहनते हैं, लेकिन इनके बेल्ट, बॉटम वियर और पहनने का तरीक़ा अलग होता है। पुरुषों के किमोनो में एक ही बेल्ट बंधी जाती है, जबकि महिलाएं पांच तरह की ओबी यानी बेल्ट बांधती हैं।

कैसे पहनते हैं किमोनो
किमोनो को पहनने का सबसे ज़रूरी नियम यह है कि इसमें बायां हिस्सा हमेशा दाहिने हिस्से के ऊपर आता है। जब किसी की मृत्यु हो जाती है, तभी किमोनो को बांधते वक़्त दाहिना हिस्सा, बाएं के ऊपर आता है।

किमोनो दो लाइनिंग के साथ पहना जाता है...

1. पहले हादाजुबान (जापानी अंडरगारमेंट्स) और ताबी (मोज़े) पहने जाते हैं। फिर नागाजुबान (एक अन्य जापानी अंडरगारमेंट) पहनते हैं। नागाजुबान के नेकबैंड में कॉलर पट्टी डाली जाती है, जो किमोनो के कॉलर को गर्दन से नीचे रखने में मदद करती है। पहले दाएं हिस्से के कपड़े को बाईं ओर ले जाते हैं, फिर बाईं तरफ़ का हिस्सा ऊपर आता है। ये कॉलरबोन को कवर करना चाहिए। इसे सेट करते हुए पहला बेल्ट जिसे सेस कहते हैं, अंडरबस्ट बांधते हैं।

2. अब किमोनो पहनते हैं। कॉलर (एरी) ऐसे एडजस्ट करते हैं कि नागाजुबान की कॉलर बाहर दिखे। नागाजुबान की स्लीव्स को किमोनो की स्लीव्स के साथ एडजस्ट करते हैं। किमोनो की लंबाई महिला की पूरी लंबाई जितनी होती है। हिपबोन के पास से किमोनो को ऊपर उठाकर एंकल लेंग्थ तक लाते हैं और दाहिने हिस्से को अंदर करके बायां हिस्सा ओवरलैप करते हैं। कमर पर दूसरा बेल्ट बांधा जाता है। कमर में नीचे वाले हिस्से को ट्यूब जैसा शेप देते हैं और ऊपरी हिस्से को एडजस्ट करते हैं, जिसे ओहाशोरी कहते हैं। इसके ऊपर एक बेल्ट बांधते हैं, जिसे दातेजिमे कहते हैं।

3. इसके बाद आता है ओबी, जो एक चौड़ा बेल्ट है। यह 13 फ़ीट लंबा और 13 इंच चौड़ा होता है। ओबी के अलग-अलग नॉट बंधे जाते हैं। इसके ऊपर एक बेल्ट ओबीगे बांधते हैं। ओबी के सेंटर में एक पतली रस्सी जैसा बेल्ट बांधते हैं, जिसे ओबीजिम कहते हैं।

किमोनो के प्रकार
किमोनो की लंबाई महिला की पूरी लंबाई जितनी होती है, ताकि इसको बांधते समय कमर पर फ़ोल्ड आ सके, जिसे ओहाशोरी हिप फ़ोल्ड कहते हैं। इसी पर बेल्ट बांधी जाती है। किमोनो के मुख्य प्रकार इस तरह हैं-

युकाता
ये गर्मियों में पहने जाने वाला किमोनो है। पारंपरिक किमोनो सिल्क से बनते हैं, जबकि युकाता को कॉटन से बनाया जाता है। 1980 के दशक से युकाता को कैज़ुअल किमोनो के रूप में पहचान जाने लगा। यह बाथरोब की तरह होता है और इसके साथ अंडरस्कर्ट नहीं पहना जाता। पहले यह घर में पहना जाता था, लेकिन अब इसको समर फ़ेस्टिवल और फ़ॉर्मल इवेंट्स में पहनते हैं। अब युकाता चटख रंगों और बड़े मोटिफ्स में मिलते हैं। इन्हें हनहाबा ओबी (ओबी की चौड़ाई से आधा) के साथ पहनते हैं।

फ़्यूरिसोड
ये पारंपरिक उत्सवों में किमोनो विशेष रूप से पहना जाता है। इनमें आई लड़की विवाहित है या नहीं, इसका पता उसके किमोनो से लगाया जाता है। फ़्यूरिसोड किमोनो केवल अविवाहित लड़कियां पहनती हैं। इनकी स्लीव्स कंधे से नीचे एड़ी तक होती है।

इरोमुजी
ये टी सेरेमनी में पहने जाते हैं और मोनोक्रोमेटिक (सिंगल कलर के) होते हैं। इन्हें रिंज़ू सिल्क से बनाया जाता है और ऑटम सीज़न में पहनते हैं।

ओचिकेक
ये औपचारिक किमोनो है, जिसे दुल्हन पहनती हैं। इन्हें 20 वीं सदी में इसे ब्राइडल वियर के रूप में अपनाया गया। लाल और सफेद दाेनों रंगों से बनाए जाने वाले इन किमोनो पर हैवी मोटिफ्स का काम किया जाता है। पूरे सफ़ेद ब्राइडल किमोनो को शिरोमुकु कहते हैं, और इन्हें जापानी शिंतो वेडिंग में पहना जाता है।

मोफुकु
ये काले रंग के किमोनो हैं, जिन्हें शोक के मौक़े पर पहनते हैं।

पुरुषों के किमोनो
ये महिलाओं के किमोनो की तुलना में ज़्यादा सरल होते हैं। ये शर्ट की तरह कमर / हिप तक लंबे होते हैं, जिन्हें कोसोड कहते हैं। इन्हें ओबी से कमर पर बांधा जाता है। इनकी स्लीव्स छोटी, संकरी और किमोनो से जुड़ी होती है। इसे हकामा (पैंट/ स्कर्ट) के साथ पहना जाता है। कोसोड और हकामा के साथ एक जैकेट हाओरी पहनी जाती है, जो सामने से खुली रखते हैं। इनके रंग गहरे, ब्लैक, डार्क ब्लू, ग्रीन, ब्राउन होते हैं और फैब्रिक मैटी (बिना चमक का) रहता है।
किमोनो का फ़ैशनेबल अंदाज
इन दिनों किमोनो कंफर्ट वियर, लाउंज वियर का अहम हिस्सा बन गए हैं। विदेशी और देसी फ़ैशन डिज़ाइनर इस परिधान को नित नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, ख़ासकर किमोनो जैकेट। बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने अपनी क्लोदिंग लाइन ड्रीम्सबिस में किमोनो को जैकेट स्टाइल में मैचिंग पैंट के साथ पेश किया है। जापान के प्रसिद्ध डिज़ाइनर जातारो सेईटो ने किमोनो को नए अंदाज़ में पेश किया है। उनके स्प्रिंग/समर 2015 कलेक्शन में चटख रंगों के डॉग प्रिंट वाले किमोनो चर्चित रहे थे। जापानी रॉकस्टार व फ़ैशन डिजाइनर योशिकी ने भी फ़ैशन-फ़ॉरवर्ड किमोनो की रेंज अपने कलेक्शन में पेश की। उनके ब्रांड का नाम है- योशीकिमोनो। उनके किमोनो में फ्लोरल, एनिमल प्रिंट के साथ जॉमैट्री पैटर्न दिखते हैं।

रंग, मोटिफ़ और मौसम
किमोनो को प्रकृति, मौसम और विशिष्ट अवसरों के हिसाब से बनाया जाता है। सबसे ज़्यादा ध्यान रखा जाता है रंगों का। हर सीज़न के अलग रंग और उनका अर्थ होता है। महीनों के हिसाब से भी रंग तय होते हैं, जैसे पीच रंग मार्च, स्काई ब्लू अगस्त और मैपल नवंबर बताता है। लाल रंग समृद्धि, शक्ति दिखाता है, सफ़ेद पवित्रता, नीला शांति व सुरक्षा, गुलाबी विविधता व स्त्रीत्व, पीला समृद्धि व साहस और पर्पल सत्ता का प्रतीक है। किमोनो हाथ से बने हुए और हाथों से सजाए हुए फैब्रिक से तैयार किए जाते हैं, जिनमें सिल्क, लिनेन और हेम्प शामिल हैं। इन दिनों कॉटन, रेयॉन और पॉलीस्टर से भी किमोनो बनाए जा रहे हैं। ये पहनने वाले के स्टेटस और पर्सनालिटी के बारे में बताते हैं।

किमोनो का इतिहास
चीन में तांग वंश (618-907) के शासन काल के दौरान किमोनो अस्तित्व में आया। हालांकि चीन का पारंपरिक परिधान हेइअन काल में जापान की कोर्ट सोसायटी में काफ़ी लोकप्रिय हुआ। कोर्ट सोसायटी में ही पहला किमोनो पहना गया जिसे जूनिहितोई कहा गया।

हेइअन काल... 794-1185
आधुनिक किमोनो को पहनने की शुरुआत हेइअन काल से हुई। तब इसको एप्रोन जिसे मो कहते थे या फिर हकामा (स्कर्ट या पैंट) के साथ पहना जाता था। रोचक बात यह है कि ये पैंट, चीन के पारंपरिक परिधान से प्रेरित थी। धीरे-धीरे किमोनो को बिना हकामा के पहनने का चलन शुरू हुआ। ऐसे में किमोनो को कमर पर बांधने के लिए एक बेल्ट की ज़रूरत लगी तो ओबी अस्तित्व में आया।

कामकुरा काल... 1185-1333
इस दौरान किमोनो रोज़ पहने जाने वाले परिधान के रूप में विकसित हुआ और इसके साथ लेयरिंग की जाने लगी। मन जाता है कि इसी दौरान जापान के पारंपरिक रंगों के साथ कॉम्बिनेशन का चलन बढ़ा। अब रंग मौसम, लिंग और कभी-कभी राजनीतिक व पारिवारिक संबंधों पर आधारित होने लगे।

ईदो काल... 1603-1868
किमोनो बनाने की कला इस दौर में ख़ूब विकसित हुई। ओबी को अलग-अलग तरह से बांधा जाने लगा। कुछ किमोनो को बनाने में इतनी मेहनत और धन ख़र्च हुआ कि इतने में एक घर ख़रीदा जा सके। इस दौर में बने बेशक़ीमती किमोनो को लोगों ने पारिवारिक विरासत के रूप में सहेजकर रखा।

मेजी काल... 1868-1912
किमोनो के फ़ैशन में गिरावट इस दौर में आई। सरकार ने लोगों को प्रेरित किया कि वे पश्चिमी परिधानों को अपनाएं। यही समय था जब जापान ने पश्चिमी देशों से व्यापार को बढ़ावा देना शुरू किया। नतीजा लोगों ने किमोनो की जगह पश्चिमी परिधानों को रोज़ पहनना शुरू किया और किमोनो विशेष अवसरों पर पहने जाने लगे।

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