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अहा! ज़िंदगी:मैग्ज़ीन अहा! ज़िंदगी के जून अंक की चुनिंदा स्टोरीज़ पढ़ें सिर्फ़ एक क्लिक पर

13 दिन पहले
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मांगना कितना ज़रूरी था और लौटाने में कितनी ख़ुद्दारी थी यह कहानी इसी दोहरे-सच का सामना करती है...

जब एक सक्षम पुत्र अपनी वृद्ध मां से रुपए मांगने पहुंचा लेकिन एक दुविधा ने उसे घेर लिया

यह लघुकथा जीवन की अहमियत के बारे में जितने प्रभावी रूप से एक संदेश दे जाती है, वैसा एक पुस्तक भी नहीं कर सकती थी...

एक छोटी सी लघुकथा जीवन की क़ीमत को आसानी से समझा जाती है

सोशल मीडिया चैटिंग और लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप के इस ज़माने में सम्बंधों का स्वरूप भी बदला है...

लाॅन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप और नए ज़माने के सम्बंधों का सजीव ब्योरा प्रस्तुत करती कहानी 'आख़िरी मुलाक़ात'

कुछ बीज ऐसे होते हैं...मन की माटी में दबे हुए, जिनके होने का एहसास तक नहीं होता...

हम सबके भीतर एक कृषक जी रहा है

यह कहानी साहस के साथ एक अनछुए विषय को उठाकर उसे सराहनीय संरचना में बुनती है...

होमोफोबिया जैसे अनछुए विषय पर मां-बेटे के रिश्ते में बुनी ख़ूबसूरत कहानी 'ट्रॉफ़ी'

इशारों में अपनी बात समझाना और समझना भी एक कला ही है...

इशारों की भाषा समझना आसान भी होता है और कठिन भी, ऐसी ही दो हास्य कथाएं

बचपन में विष्णु को गांव के बुज़ुर्ग प्यार से पौधा चोर पुकारते थे, आज वही विष्णु युवा होकर देश का ट्री मैन बन गया है...

देशभर में लगाए और बचाए 50 लाख से अधिक पौधे, डाॅ. प्रणव मुखर्जी ने ट्री मैन ऑफ़ इंडिया के विशेषण से नवाजा था

चिंता से मुक्ति और शांति पाने, अंतस को सकारात्मकता से भरने और भय दूर करने के लिए ध्यान एक कारगर साधन है...

ध्यान का आनंद लेना कितना आसान है! ओशो के सूत्रों से सीखें आसानी से ध्यान लगाना

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