पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

कथेतर:प्रकृति की किताब गणितीय भाषा में लिखी गई है

युवल नोआ हरारी4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • हम प्रकृति को जिस दृष्टि से देखते हैं, क्या वह भी उसी रूप में गढ़ी गई है? कहीं ऐसा तो नहीं कि हम प्रकृति को आख्यान की दृष्टि से देखते हों, जबकि वह गणित की भाषा में रची गई हो?

हमारी पुरानी परम्पराएं अपने सिद्धांतों को क़िस्सों की पदावली में गढ़ती थीं। आधुनिक विज्ञान गणित का इस्तेमाल करता है।

वर्ष 1687 में आइज़ैक न्यूटन ने ‘द मैथेमेटिकल प्रिंसिपल्स ऑफ़ नेचरल फ़िलॉसफ़ी’ पुस्तक प्रकाशित की थी, जिसे आधुनिक इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ कहा जा सकता है।

न्यूटन ने गति और परिवर्तन का एक सामान्य सिद्धांत प्रतिपादित किया था। उनके सिद्धांत की महानता इस बात में थी कि वह तीन अत्यंत सरल गणितीय नियमों के सहारे पेड़ से गिरते सेब से लेकर उल्कापात समेत ब्रह्मांड के सारे पिंडों की गति को समझाने और उसका पूर्वानुमान करने में सक्षम था। इसने जादुई ढंग से काम किया।

उन्नीसवीं सदी के अंत तक जाकर ही वैज्ञानिकों का सामना ऐसे पर्यवेक्षणों से हुआ, जो न्यूटन के नियमों में ठीक से फ़िट नहीं बैठते थे और ये भौतिकी की अगली क्रांति का कारण बने- सापेक्षता और क्वांटम मैकेनिक्स का सिद्धांत।

न्यूटन ने बताया था कि प्रकृति की किताब गणितीय भाषा में लिखी गई है। उनकी पुस्तक के कुछ अध्यायों का मुख्य हिस्सा तो स्पष्ट तौर पर समीकरणों में है, लेकिन जिन अध्येताओं ने जीवविज्ञान, अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान को विशुद्ध न्यूटनीय समीकरणों में बांधने की कोशिश की, उन्होंने पाया कि इन अनुशासनों की जटिलता का स्तर इस तरह की महत्वाकांक्षा को व्यर्थ साबित करता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं था कि उन्होंने गणित को त्याग दिया।

वास्तविकता के ज़्यादा जटिल पक्षों से निपटने के लिए पिछले 200 वर्षों के दौरान गणित की एक नई शाखा विकसित हुई : सांख्यिकी।

-‘सेपियंस’ से

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आप अपने काम को नया रूप देने के लिए ज्यादा रचनात्मक तरीके अपनाएंगे। इस समय शारीरिक रूप से भी स्वयं को बिल्कुल तंदुरुस्त महसूस करेंगे। अपने प्रियजनों की मुश्किल समय में उनकी मदद करना आपको सुखकर...

    और पढ़ें