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युवमन:कोई है दुनिया का सबसे युवा सेल्फमेड बिलियनेयर तो किसी युवा की उपलब्धि पहुंची है वाइट हाउस तक, पढ़ें युवा उद्यमियों के जीवट की कथा

पद्मनाभ16 दिन पहले
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  • युवाओं की महत्वाकांक्षाओं का कोई पारावार नहीं होता। युवावस्था ही वह समय होता है जब मनुष्य संसार को बदल डालने की चाहत और माद्दा दोनों रखता है।
  • सफलता की ये कथाएं कुछ ऐसे ही युवाओं की हैं, जिन्होंने कम उम्र में धारा के विपरीत तैरकर ऐसे कारनामे कर दिखाए, जिनकी आज मिसाल दी जाती है।

दुनिया के सबसे युवा सेल्फ़-मेड बिलियनेयर
ये हैं रितेश अग्रवाल, ओयो रूम्स के संस्थापक और सीईओ। कायली जेनर के बाद वे दुनिया के सबसे युवा सेल्फ़-मेड बिलियनेयर हैं। आज रितेश की उम्र 28 वर्ष है किंतु जब वे 10 वर्ष पीछे देखते हैं तो बताते हैं कि वे दिल्ली के एक बाज़ार में बैठे थे और उनके पास सिर्फ़ 30 रु. थे। उनका स्टार्टअप ‘ऑरेवल स्टेस' विफल हो चुका था। उन्होंने होटलों में बजट रूम मुहैया करवाने और यात्राओं में ठहरने की एक बड़ी मुसीबत को हल करने का सपना देखा था। उसी सपने की ओर ‘ऑरेवल स्टेस' एक क़दम था। रितेश का जन्म ओडिशा के रायगढ़ बिस्सम, कटक में हुआ था। हमेशा से सपना उद्यमी बनने का था और अपनी यात्राओं के दाैरान उनका होटल्स में ठहरने की समस्याओं से सामना हुआ। इसी को दूर करने के लिए 17 वर्ष की आयु में उन्होंने ‘ऑरेवल स्टेस' की शुरुआत की, जो बाद में ‘ओयो होटल्स एंड होम्स' में तब्दील हुआ।
2013 थिएल फ़ैलोशिप के लिए चयन। 2 साल के प्राेग्राम के लिए एक लाख डॉलर की स्कॉलरशिप। उसके बाद रितेश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
2019 ओयाे कमरों की संख्या के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी होटल चेन बन गई।
2021 ओयाे एप ने 10 करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार किया। आज ओयो के पास विश्व के 35 देशों में करीब 1 लाख 57 हज़ार से अधिक कमरे हैं।

रितेश अग्रवाल
रितेश अग्रवाल

बक़ौल रितेश ‘कोई भी व्यक्ति/कम्पनी यह नहीं कह सकता/सकती है कि उसे सफलता की राह में सब-कुछ सही मिला और उसकी यात्रा पूरी तरह से सुखद रही।’

मिस्टर बिल्लोरे अहमदाबाद चायवाला यानी एमबीए चायवाला

प्रफुल्ल की असली सफलता यह है कि... जिस बिज़नेस स्कूल में दाख़िला पाने के लिए उन्होंने तैयारी की थी और कैट की परीक्षा देते थे, उसी आईआईएम अहमदाबाद में उन्हें अपनी सफलता की यात्रा पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों से साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया था...

प्रफुल्ल एक चायवाले के रूप में प्रसिद्ध हैं। उम्र है 25 वर्ष। आपको यह आश्चर्यजनक प्रतीत हो सकता है कि कोई चाय से भला किस प्रकार प्रसिद्धि पा सकता है! किंतु यह कारनामा कर दिखाया है प्रफुल्ल ने और उन्हें एमबीए चायवाले के रूप में जाना जाता है। प्रफुल्ल एमबीए करना चाहते थे, किसी बड़े बिज़नेस स्कूल से। क्योंकि हर किसी की तरह उनकी भी यही ख़्वाहिश थी कि एक अच्छी जॉब और बढ़िया सैलरी हो, जो कि एक बड़े स्कूल से एमबीए करने के बाद ही उन्हें प्राप्त हो सकती थी। किंतु, दो बार कैट की परीक्षा में वो विफल रहे। उनका अब इस दौड़भाग से मन ऊब चुका था। उन्होंने कैट के लिए प्रयास करने का विचार त्यागा और गुजरात के अहमदाबाद में जॉब ढूंढने लगे। उन्होंने मैक्डॉनल्ड्स में जॉब पकड़ ली, वह भी 6,000 रुपए प्रतिमाह के वेतन पर। किंतु, व्यापार की इच्छा बलवती ही थी। उन्होंने जल्द ही मैक्डॉनल्ड्स की नौकरी के साथ ही चाय की दुकान खोली। प्रफुल्ल ने एक साक्षात्कार में बताया, मैं एक अच्छे परिवार से आता हूं। इसलिए मुझे 50 दिन का समय लगा उस साहस को अपने भीतर लाने के लिए कि हां मैं चाय का स्टॉल लगा सकता हूं। इसके लिए उन्होंने घर से 15 से 20 हज़ार रुपए लिए। लेकिन बताया नहीं कि मैं चाय की दुकान खोलना चाहता हूं। प्रफुल्ल जानते थे कि इसकी इजाज़त नहीं मिलेगी।

प्रफुल्ल बिल्लोरे
प्रफुल्ल बिल्लोरे

चाय से 4 करोड़ की यात्रा...
प्रफुल्ल ने काम का श्रीगणेश तो कर दिया था, किंतु राह इतनी आसान भी नहीं थी। पहले दिन एक भी चाय की बिक्री नहीं हुई थी। प्रफुल्ल जान गए थे कि यह इतना आसान भी नहीं होने वाला है। इसके लिए उन्होंने एक तरीक़ा अपनाया।उन्होंने लोगों से अंग्रेज़ी में बात करना शुरू किया। प्रफुल्ल का व्यवहार और अंग्रेज़ी बाेलकर चाय बेचने का अंदाज़ लोगों को पसंद आया और उस दिन 10 चाय बेचने में क़ामयाबी हासिल की।
प्रफुल्ल की गाड़ी चल निकली और उनकी चाय की बिक्री में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी होती रही। लेकिन, कुछ लोगों को उनकी यह सफलता रास नहीं आई और उन्होंने प्रफुल्ल को डराना-धमकाना शुरू कर दिया। शुरुआत में तो प्रफुल्ल इन मुसीबतों से निपट लिए, किंतु जब उनकी जान को ख़तरा हुआ तो उन्हें वहां से दुकान बंद करनी पड़ी।
प्रफुल्ल हार मानने वालों में से नहीं थे। प्रफुल्ल ने एक अस्पताल में जगह तलाशी तथा वहां पर अपनी दुकान काे पुन: शुरू किया। नाम दिया- ‘मिस्टर बिल्लोरे अहमदाबाद चायवाला' यानी एमबीए चायवाला।
आज एमबीए चायवाला की कई शहरों में फ्रेंचाइज़ी है और सालाना टर्नओवर 4 करोड़ है।
बक़ौल प्रफुल्ल, ‘लोगों की परछाईं बनने से अच्छी है अपने घर की चाय की दुकान।'

श्रीलक्ष्मी सुरेश
श्रीलक्ष्मी सुरेश

23 की वयस में सफलता का शिखर
श्रीलक्ष्मी सुरेश की उम्र 23 वर्ष है और वे ई-डिज़ाइन तथा टिनी लोगो कम्पनी की संस्थापक हैं। श्रीलक्ष्मी 3 वर्ष की उम्र से ही कम्प्यूटर चलाने लगी थीं और 6 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली वेबसाइट तैयार की। 11 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने स्कूल के लिए वेबसाइट तैयार की थी तथा ई-डिज़ाइन नाम से स्वयं की कम्पनी की शुरुआत भी कर दी थी। श्रीलक्ष्मी आज देश की सबसे युवा सीईओ तथा वेब डिज़ाइनर में से एक हैं।

वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उन्हें राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

शरद विवेक सागर
शरद विवेक सागर

युवाओं के लिए युवा की कोशिश
शरद विवेक सागर पटना में रहते हैं। स्वामी विवेकानंद उनके आदर्श हैं। स्वामी जी की तरह ही शरद भी सादे और सरल जीवन को प्राथमिकता देते हैं और उन्हीं की तरह युवाओं को दिशा दिखाने के कार्य में कई सालों से संलग्न हैं। शरद डेक्स्टेरिटी ग्लोबल नामक राष्ट्रीय संगठन के संस्थापक हैं। इसके माध्यम से वे युवाओं को शिक्षा तथा ट्रेनिंग दिलाकर नए अवसर प्रदान करते हैं। इस संगठन के छात्र-छात्राओं ने दुनियाभर के शैक्षणिक संस्थानों से 52 करोड़ से अधिक की स्कॉलरशिप हासिल की है। शरद ने अपने इन्हीं कार्यों की बदौलत फोर्ब्स की 30 अंडर 30 सूची में भी जगह बनाई थी तथा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने स्वयं उन्हें न्योता भेजकर वाइट हाउस में मुलाक़ात की थी। उन्हें नोबल पीस सेंटर ने नोबल शांति पुरस्कार के समारोह में आमंत्रित भी किया था।

रॉकफ़ेलर फ़ाउंडेशन ने उन्हें अगली सदी के 100 इनोवेटर्स की सूची में स्थान दिया था।

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