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सूक्तियां:जुलाई माह में ही आता है तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिन, पढ़ें उनके प्रेरक वचन

9 दिन पहले
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  • जुलाई के इसी महीने में वर्ष 1935 में तिब्बत में जन्मे और दुनिया के अग्रणी धर्मगुरुओं में से एक, दलाई लामा तिब्बती जनसमुदाय के आध्यात्मिक-नेता तो हैं ही, बौद्ध धर्म-दर्शन की अधिकृत आवाज़ भी हैं। शांति और सह-अस्तित्व के पक्ष में दलाई लामा की दलीलें पूरी दुनिया के द्वारा सुनी और मानी जाती हैं। हमारे पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं –
  1. आप जिन्हें प्यार करते हैं, उन्हें उड़ने के लिए पंख दीजिए, लौट आने के लिए जड़ें दीजिए, और वो हमेशा आपके साथ रहें इसके लिए उन्हें ठोस वजहें दीजिए।
  2. लोग ख़ुशी की तलाश में अलग-अलग रास्ते तलाशते हैं। अगर कोई आपके साथ आपके रास्ते पर नहीं है तो इसका यह मतलब नहीं कि वह रास्ता भटक गया है।
  3. करुणा से बड़ी क्रांति हमारे मौजूदा समय में भला और कौन-सी हो सकती है...?
  4. हज़ार युद्ध भी जीत लिए तो क्या है, सबसे बड़ी जीत तो स्वयं पर विजय प्राप्त करने में है।
  5. हमारा लक्ष्य औरों से बेहतर होना नहीं, हम जैसे पहले थे उससे बेहतर बनकर दिखाना होना चाहिए।
  6. कभी-कभी चुप रहना भी सबसे अच्छा जवाब होता है।
  7. ख़ुशी कभी किसी बनी-बनाई चीज़ की तरह नहीं होती।
  8. यह हमें रोज़ अपने कार्यों से प्राप्त करना पड़ती है।
  9. एक बात हमेशा याद रखिए−प्रेम और महान उपलब्धियां कभी भी बिना बड़ा जोख़िम उठाए सम्भव नहीं।
  10. जब भी सम्भव हो, उदारता दिखाने की कोशिश कीजिए। और यह हमेशा सम्भव है।
  11. एक बात हमेशा याद रखें− कभी-कभी जो आप चाहते हैं, वह आपको नहीं मिलना भी बड़े सौभाग्य की बात हो सकती है।
  12. आप जितने ज़्यादा प्रेम से प्रेरित होकर काम करेंगे, उतने ही निडर और मुक्त बनते जाएंगे।
  13. नियमों को अच्छी तरह से समझिए। ताकि जब आप उन्हें तोड़ें तो यह प्रभावी रूप से कर सकें।
  14. प्रेम और करुणा लग्ज़री की चीज़ें नहीं, ये हमारी बुनियादी ज़रूरतें हैं। इनके बिना मनुष्यता जी ही नहीं सकती।
  15. ये लगभग नामुमकिन है कि कोई चीज़ हर कोण से ग़लत ही हो।
  16. अगर हम ख़ुश और संतुष्ट होना चाहते हैं तो हमें यह सीखना होगा कि जो हमारे पास है, उसे ही हम चाहें, यह नहीं कि जो हम चाहते हैं, उसे हासिल करने की कोशिश करते रहें।
  17. सबसे अच्छा रिश्ता वही होता है, जिसमें एक-दूसरे के लिए हमारा प्यार एक-दूसरे के लिए हमारी ज़रूरत से बड़ा हो जाता है।
  18. सफलता मापने का एक ही तरीक़ा है −उसे पाने के लिए आपको जो खोना पड़ा- उसकी नापजोख कीजिए।
  19. त्रासदियों को ख़ुद को मज़बूत बनाने का उपाय समझें। चाहे कितना ही मुश्किल समय हो, वास्तविक त्रासदी तभी घटित होती है जब हम हार मान लेते हैं।
  20. सच्ची करुणा तो तभी है, जब कोई आपको तक़लीफ़ पहुंचाए तब भी उसके लिए आपके रवैए में कोई बदलाव ना आए।
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