प्रबंध-धन:साेशल मीडिया में छिपे हैं अनेक अवसर, सिर्फ़ यूं ही स्क्रॉल करके आप सुनहरा मौक़ा खो रहे हैं

नवीन चौधरी, नई पीढ़ी के चर्चित लेखक14 दिन पहले
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  • अगर आप सोशल मीडिया पर हर दिन घंटों बस स्क्रॉल करते रह जाते हैं तो निश्चित ही आप एक बड़ी संभावना को यूं ही जाने दे रहे हैं। इस मीडिया के विभिन्न मंच आपको अपनी और अपने कामकाज की ब्रांडिंग का प्रभावी और असीमित अवसर देते हैं– वह भी मुफ़्त...!

लगभग डेढ़ दशक पूर्व इंटरनेट की दुनिया में एक नई क्रांति हुई, एक नया मीडिया ईजाद हुआ जिसे ‘सोशल मीडिया’ नाम दिया गया। सोशल मीडिया का मूल मंत्र लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना है। पेन फ्रेंड से ईमेल के दौर में पहुंचे समाज को सोशल मीडिया ने कुछ ही पलों में जुड़ने और बातचीत करने का मौक़ा दिया। सोशल मीडिया की प्रसिद्धि यूं बढ़ी कि किसी ने पुराना यार खोजा तो किसी ने पुराना प्यार...

जहां लोग हैं वहां प्यार है और व्यापार भी। सोशल मीडिया जो शुरू में जुड़ने का माध्यम था, विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम था, वह अब विज्ञापन एवं व्यापार को बढ़ाने का बहुत बड़ा माध्यम बन चुका है। यहां व्यापार का अर्थ विशुद्ध रूप से व्यापार ही न समझा जाए, बात हर उस संभावना की है जहां किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग किया जा रहा है। मिसाल के तौर पर, राजनेताओं को देखिए, उनके लिए सोशल मीडिया जनता तक अपनी बात पहुंचाने से लेकर अपनी एक विशेष छवि बनाने का माध्यम है। मेरे जैसे कई लेखक सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने पाठकों तक पहुंचने के लिए कर रहे हैं। हम पाठकों से निरंतर संवाद कर रहे हैं जिसका प्रभाव हमारी किताबों की बिक्री पर पड़ता है।

सोशल मीडिया एक आम आदमी के हाथ में बहुत प्रभावशाली हथियार बन कर आया है जिसके फ़ायदे और नुक़सान दोनों हैं। हम यहां सोशल मीडिया के नकारात्मक नहीं बल्कि उस उजले पक्ष की बात करते हैं जिससे कि एक आम आदमी लाभ प्राप्त कर सके।

आपका उद्देश्य क्या है?

सोशल मीडिया पर आप किस उद्देश्य से हैं और इसका इस्तेमाल किसलिए करना चाहते हैं? यदि यह सिर्फ़ अपने मित्रों से जुड़े रहने को है तो आपको ज़्यादा कुछ नहीं करना, किंतु यदि आप नेटवर्किंग करना चाहते हैं, पर्सनल ब्रांडिंग करना चाहते हैं, अपने व्यापार के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना होगा।

सबसे पहले

— चाहिए एक रणनीति

किसी भी सफल काम के लिए रणनीति की आवश्यकता होती है। सोशल मीडिया एक दुधारी तलवार है और इसका उचित इस्तेमाल आपको नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इसकी रणनीति बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण बातें ध्यान रखनी चाहिए– आपकी टारगेट ऑडियंस, सही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का चुनाव एवं एंगेज करने वाला कंटेंट। हम इन तीनों के बारे में बात करेंगे।

— ऑडियंस को पहचानें

इस दुनिया में हम सभी किसी न किसी की ऑडियंस हैं। सोशल मीडिया पर भी यह सत्य लागू होता है। ब्यूटी प्रॉडक्टस के लिए महिलाएं ऑडियंस हैं तो शेविंग ग्रूमिंग प्रॉडक्ट के लिए पुरुष। ये ऑडियंस सिर्फ़ लिंग के आधार पर नहीं बांटी जाती। इन्हें उम्र, स्थान, शिक्षा, आय, रुचि, राजनैतिक विचार एवं कई अन्य आधार पर आगे और बांटा जाता है। आपकी ऑडियंस कौन है? क्या आप उसे पहचानते हैं?

कई बार लोग कहते हैं कि मैं तो अपने विचार प्रकट करता हूं, मेरी बात हर किसी के लिए है। एक लेखक कह सकता है कि कोई भी जो पढ़ सकता हो वह मेरी ऑडियंस है। यह पूर्ण सत्य नहीं है। आप पर्सनल ब्रांडिंग करें, किताब प्रमोट करें या व्यापार बढ़ाना चाहें, हर हाल में आपका ख़ास वर्ग आपकी टारगेट ऑडियंस होगी। उदाहरण के लिए, मेरी किताबें हर हिंदी पाठक पढ़ सकता है लेकिन उसका कंटेंट एक ख़ास आयु वर्ग एवं कुछ ख़ास तरह की किताबें पढ़ने वाले को अधिक आकर्षित करने वाला है। यह आयु वर्ग ही मेरी ऑडियंस है और सोशल मीडिया पर मैं काफ़ी कुछ इन्हें आकर्षित करने के लिए लिखता हूं। अगर हम दुपहिया वाहन की बात करें तो हर कोई इसे चला सकता है लेकिन आप नोटिस करेंगे कि स्कूटर और मोटरसाइकल के विज्ञापन एक वर्ग के लिए होते हैं। इनमें भी अलग-अलग ब्रांड के मोटरसाइकल एक ख़ास वर्ग को आकर्षित करते हैं, जैसे कोई पेट्रोल की बचत की बात करता है तो कोई सिर्फ़ पॉवर की। आप समझ सकते हैं कि कितनी आमदनी वाला एवं कौन-सा आयु वर्ग इनकी ऑडियंस है। आप भी अपनी ऑडियंस तय करें।

अब चुनें मंच

उचित प्लेटफॉर्म का चुनाव तभी हो सकता है जब आपको अपनी टारगेट ऑडियंस पता हो। आपको यह पता हो कि वह किस प्लेटफॉर्म पर है और क्यों है। सोशल मीडिया कई प्रकार के हैं लेकिन हमारे देश में चार बहुप्रचलित माध्यम हैं। इनमें से एक आपको अपने वीडियो बनाकर डालने की अनुमति देता है तो वहीं एक माध्यम आपको सिर्फ़ तस्वीरों से अपनी बात कहने की सुविधा देता है। एक माध्यम आपको अपनी बात सिर्फ़ 240 शब्दों में करने की अनुमति देता है तो एक आपको पूरा निबंध लिख देने की अनुमति देता है। फोटो और वीडियो इन दोनों माध्यमों पर भी चलते हैं।

आपको सभी माध्यमों का चुनाव करना है या एक-दो माध्यमों पर ही ध्यान देना है यह व्यवसाय और उद्देश्य पर निर्भर करता है। मसलन, मीडिया इंडस्ट्री इन सभी माध्यमों का उपयोग करती है, वह 240 शब्दों में कोई ब्रेकिंग न्यूज़ देती है तो पूरा बुलेटिन वीडियो के माध्यम से पहुंचाती है। एक लेखक अपने विचारों को विस्तार से लोगों तक पहुंचाना चाहता है तो उसके लिए माध्यम वह होगा जहां निबंध जैसा लिखने का ऑप्शन मिले।

यदि आपका एक कैफ़े या रेस्तरां है तो आपके लिए वह प्लेटफॉर्म बेहतरीन है जहां पर तस्वीरें ज़्यादा शेयर होती हैं। लेकिन यदि रेस्टोरेंट ऐसा है जहां मीटिंग या फैमिली डिनर होता हो तो इस एक प्लेटफॉर्म से आपका काम नहीं चलेगा। आपको एक और प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना होगा जहां आप फोटो, वीडियो के साथ अपने यहां की सुविधाओं पर बात कर सकें।

यह है सबसे अहम

सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति को एक मूलमंत्र याद रखना है - कंटेंट इज़ द किंग! ये सभी प्लेटफॉर्म आपको अपनी बात अलग-अलग रूप में रखने का मौक़ा देते हैं। यदि आप पर्सनल ब्रांडिंग करना चाहते हैं, अपनी कंपनी / प्रॉडक्ट की एक ख़ास छवि बनाना चाहते हैं या आप कुछ बेचना चाहते हैं तो आपको अपना कंटेंट उसी तरीक़े से तैयार करना होगा। यह कंटेंट लिखित रूप से लेकर फोटो, वीडियो के रूप में भी हो सकता है। आपको अपने प्रॉडक्ट या अपने उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए कंटेंट इन सभी रूपों में या संबंधित रूपों में तैयार करना है और उसे चुने हुए प्लेटफॉर्म्स पर डाल देना है।

सोशल मीडिया पर अच्छे एवं बुरे कंटेंट की भीड़ में अपने कंटेंट की तरफ़ ध्यानाकर्षण करवाना ही सबसे चुनौतीपूर्ण काम है। सोशल मीडिया इंडस्ट्री का सबसे महत्वपूर्ण शब्द है – एंगेजमेंट। इसका अर्थ हुआ कि कितने लोगों ने आपके कंटेंट में रुचि ली। क्या वे आपकी पोस्ट पर रुके, देखा और प्रतिक्रिया दी? सोशल मीडिया के लिए जो कंटेंट बने वह ऐसा हो कि लोग उसमें रुचि लें। ऐसा भी हो सकता है कि लोग आपके कंटेंट पर रुकें पर प्रतिक्रिया न दें। आपका कंटेंट ऐसा हो कि पहले तो लोग उसे देखने रुकें और जब रुकें तो प्रतिक्रिया देकर जाएं।

मापें अपना प्रदर्शन

डिजिटल की दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत बात यह है कि यहां आपके हर एक्शन पर हुए रिएक्शन काे आप माप सकते हैं। अपने सोशल मीडिया चैनल का विश्लेषण लगातार करें, देखें कैसा एंगेजमेंट आ रहा है। फॉलोअर बढ़ रहे हैं या नहीं। इस एनालिटिक्स से आप जान पाएंगे कि किस तरह का कंटेंट आपके ऑडियंस को पसंद आ रहा है। कहां एंगेजमेंट गिर रहा है। किस समय आपकी ऑडियंस सबसे ज़्यादा सोशल मीडिया पर होती है। इन सारी सूचनाओं के बाद आप अपनी ज़रूरत अनुसार सोशल मीडिया की रणनीति को जारी रखें या बदलें।

अंत में एक ज़रूरी बात

सोशल मीडिया पर्सनल ब्रांडिंग के लिए बहुत महत्वपूर्ण माध्यम है। पर्सनल ब्रांडिंग के लिए भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल के सभी नियम वही हैं जिनका ज़िक्र हमने लेख में किया है। आप कंपनी हों या एक व्यक्ति- एक ख़ास बात का ध्यान रखना है कि आपका कंटेंट लोगों को जितना अधिक छुएगा, लोग आपसे जुड़ेंगे। लोग फेक को पहचान लेते हैं, आपके कंटेंट में ईमानदारी होनी आवश्यक है और यही ईमानदारी आपको आपकी ऑडियंस से जोड़ेगी।

कैसे करें अपने सोशल नेटवर्क का विस्तार?

फॉलोअर कैसे बढ़ाएं

आप कहेंगे ज्ञान तो सारा दिया मगर फॉलोअर कैसे आएंगे? जवाब है– कंटेंट। कंटेंट ऐसा हो कि उसे लोग शेयर करें। पोस्ट का शेयर होना हमेशा आपको नए फॉलोअर देगा। आप अपने कंटेंट के लिए क्रॉस-प्रमोशन टाई-अप कर सकते हैं जिससे आपको नए फॉलोअर मिलें। उदाहरण के लिए, यदि आपकी पेंसिल बनाने की कंपनी है तो इरेज़र बनाने वाले या नोटबुक बनाने वाले से टाई-अप करें।

पेड प्रमोशन का विकल्प
सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आपको अपने पोस्ट/पेज को विज्ञापन के ज़रिए प्रमोट करने देते हैं। मेरी नज़र में इस उपाय को तभी अपनाएं जब आपको जल्दी टारगेट पूरा करना हो या आपके पास बजट काफ़ी हो। ऐसा इसलिए कि आप एक बार विज्ञापन चलाएंगे तो आपकी पोस्ट की ऑर्गेनिक रीच कम हो जाएगी। ऑर्गेनिक रीच उस स्थिति को कहते हैं जहां ऑडियंस अपने आप पोस्ट पर आई।

सोशल मीडिया टूल्स
बाज़ार में कई ऐसे टूल्स हैं जो आपको एक साथ सभी प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करने की अनुमति देते हैं। इतना ही नहीं, आप इन टूल्स की मदद से पोस्ट को आगे के लिए शेड्यूल भी कर सकते हैं और उनका पहले से ड्राफ्ट तैयार करके रख सकते हैं। हालांकि अब कई प्लेटफॉर्म ख़ुद भी यह ऑप्शन देने लगे हैं। जिनकी सहायता से आप यह काम किसी विशेषज्ञ की बजाय स्वयं भी कर सकते हैं।

(लेखक मार्केटिंग प्रोफ़ेशनल एवं हिंदी की नई पीढ़ी के चर्चित लेखक हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर एवं ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस जैसे संगठनों में काम किया है। इनके उपन्यास ‘जनता स्टोर’ एवं ‘ढाई चाल’ पाठकों द्वारा काफ़ी पसंद किए गए हैं।)

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