मरासिम:सफ़र में सिर्फ़ अनुभव और आनंद ही नहीं, अक्सर अच्छे दोस्त भी मिल जाते हैं

आलोक सेठी4 महीने पहले
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  • सफ़र में बहुत कुछ मिलता है। सुख और आनंद होता है, मौज होती है और सबक़ भी होते हैं। इन सबके साथ एक और संभावना होती है, जिसे लोग आमतौर पर अनेदखा कर देते हैं।
  • सफ़र में छोटे-छोटे रिश्ते भी मिलते हैं- इनमें से कुछ को सफ़र के साथ पूर्ण विराम मिल जाता है, कुछ ताज़िंदगी क़ायम रह जाते हैं। लेकिन हर रिश्ता एक सुखद याद या साथ के रूप में जीवन को महकाता रहता है। मरासिम में बात ऐसे ही रिश्तों की...

दुनिया एक किताब की तरह है। जो यात्राएं नहीं कर पाते वे किताब का सिर्फ़ एक पन्ना ही पढ़ते हैं।

यात्राएं आपको भीतर से समृद्ध करती हैं, पर अगर आपमें यात्राओं के दौरान दोस्त बनाने की कला है तो ये आपको संबंधों से भी मालामाल कर सकती हैं। घुमक्कड़ नाचीज़ के फ़ोन में भारत और विश्व के साठ-सत्तर देशों के दोस्तों के नम्बर उनकी तस्वीर के साथ सेव हैं। यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। एक फ़िल्मी गाने का अंतरा है- तू है तो बढ़ जाती है क़ीमत मौसम की...।

किसी भी सफ़र के आनंद में हमसफ़र का बड़ा योगदान होता है। अच्छा हमसफ़र आपकी यात्रा को ख़ुशगवार बना सकता है। वहीं ख़राब सहयोगी उस यात्रा का मज़ा किरकिरा कर सकता है। यहां हमसफ़र साथियों में सिर्फ़ आपका ग्रुप नहीं, आपके ड्राइवर, गाइड, होटल कर्मचारी कोई भी हो सकते हैं। जब आप लोगों से दोस्ती करते हैं उन्हें सुनते हैं, देखते हैं, जानते हैं, तब पता लगता है कि दुनिया में कितने अच्छे लोग पड़े हैं। आपके हीरो बदलने लगते हैं, भ्रम टूटते हैं, और आपके अंदर आया आत्ममुग्धता का मुग़ालता भी दूर होने लगता है। यात्राएं संकीर्ण सोच, पूर्वग्रह जैसी बीमारियों के लिए जानलेवा हैं। आइए देखते हैं यात्रा के दौरान संबंधों को कैसे कमाया जा सकता है, दोस्त कैसे बनाए जा सकते हैं।

प्रशंसा बनाती है प्रिय
प्रशंसा ऐसी शराब है जो कानों से पिलाई जाती है। किसी की सराहना करना ना केवल उसे प्रेरित करता है बल्कि आप सहज ही उसके दिल में अपना कोना बना लेते हैं। हम लोग किसी के काम में त्रुटि तो तुरंत निकालने लगते हैं पर ना जाने क्यों शुक्राना अदा करने या तारीफ़ करने में कंजूसी करते हैं। इसी तरह टूर में आपके साथ चल रहे सहयात्रियों में सबकी कुछ न कुछ ख़ूबी ज़रूर होती है, आपको बस उसकी अनुमोदना करना है। हां एक बात का ख़याल ज़रूर रखना चाहिए कि प्रशंसा और चापलूसी के बीच बड़ी पतली लकीर होती है, इसे पार करने से बचें।

सहयोग से मिलता है साथ
छोटे-मोटे कामों में सहयात्री की मदद, उनकी चिंता जैसे उनका लगेज उठाने में, बैठने की जगह, चाय-पानी शेयर कर देखिए, व्यवहार परिवार में बदल जाएगा। पुराने ज़माने में टेलर की दुकानों पर एक लाइन लिखी होती थी, आपका एडवांस आपके कार्य को गति देगा। अगर किसी को गिफ़्ट या टिप देना है तो शुरुआत में दे दीजिए, सेवा में चमत्कारिक फ़र्क आ जाएगा।

सबको भाते हैं उपहार
उन हाथों में हमेशा ख़ुशबू रहती है जो औरों को गुलाब बांटते हैं। एक टूर गाइड थे, अनेक विदेश यात्राएं उनके साथ कीं। अपरिचित को भी परिचित बनाने का बड़ा आसान नुस्ख़ा-सा था उनके पास। यात्रा से पहले वे खादी ग्रामोद्योग से सौ रुपए नग वाले चंदन के कुछ बुक मार्क ख़रीद लाते थे, विदेशों में चंदन विशिष्ट वस्तु है। टूर में एयर होस्टेज, बस ड्राइवर, लोकल गाइड आदि जो भी उनके सम्पर्क में आता उसे उपहार स्वरूप देते चलते। मैंने कभी उनका काम रुकते नहीं देखा। बच्चा हो या बूढ़ा, उपहार सबको अच्छा लगता है। यह प्रेम का प्रतीक है। इसमें क़ीमत से ज़्यादा, प्रस्तुति, मौक़ा और पसंद के मायने हैं। इसे आदत बनाइए, और हो सके तो इसे विदाई के बजाय मुलाक़ात होते ही दीजिए। अगर आपके पास कुछ और नहीं है तो भी चिंता की बात नहीं, मुलाक़ात में हम अपनी गर्मजोशी और मुस्कान, और विदाई में दिल की गहराइयों से आभार तो दे ही सकते हैं।

सतत संपर्क से प्रगाढ़ता
संबंधों को लगातार रिन्यू करना भी ज़रूरी है। बदलते दौर ने हमसे समय तो छीन लिया है पर साधन दे दिए हैं। यात्रा में बने दोस्तों को कुछ अच्छा लिख भेजिए। वक़्त-बेवक़्त यूं ही घंटी कर लिया करें। संबंध जीवंत रहेंगे तो ज़रूरत के समय याद करने में संकोच नहीं होगा, क्योंकि ये तय है कि बुरे समय में संपत्ति और साधन नहीं, स्वभाव और संबंध ही काम आते हैं। अगले पांच वर्ष बाद कैसे व्यक्ति होंगे यह तीन बातों पर निर्भर करता है –
1... आप किन विषयों पर बात कर रहे हैं। 2... आपका उठना, बैठना किन लोगों के साथ है। 3... और अंत में, आप कौन-कौन से देश/ शहर घूम रहे हैं।

निजी विषयों पर चर्चा से बचें
बहरहाल, हर संबंध के श्वेत और श्याम दोनों पक्ष होते हैं। यात्राओं के दौरान होने वाली सारी दोस्तियां नई होती हैं। अतः अपनी निजी जानकारियां देने से बचें। आर्थिक व्यवहार में भी सावधान रहें। कॉमन विषय पर बातें करना दोनों के हित में होता है। किसी विषय पर अगर उनसे मतांतर है तो बहस करने की जगह, क्षमा मांगकर उससे बाहर हो जाना हितकर है।

ऐसे बन जाता है अपनापन
किसी को अपना बनाना है तो उसके हो जाइए। एक हैं मिस्टर शारुल, क्वालालम्पुर के एक टैक्सी ड्राइवर। एक बार मलेशिया जाना हुआ, यात्रा के दौरान जब मैं इनकी कैब में बैठा, कार आगे बढ़ते ही इन्होंने धीमे स्वर में टेप चालू कर दिया। कानों में आवाज़ आई... तेरे मन की गंगा और मेरे मन की जमुना का बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं। मैंने आश्चर्यचकित होकर पूछा– अरे आपके पास हिंदी गाने भी हैं! उसने इठलाते हुए कहा– सर मेरे पेन ड्राइव में लगभग हर देश का संगीत है, जिस देश का सवार, उसी का संगीत लगा देता हूं। मैंने पूछा कि तुम बोर नहीं होते हो दूसरी भाषा के गानों से, तो उसने विनम्रता से जवाब दिया– मेरा क्या, परदेस में अपना संगीत सुनकर ग्राहक के चेहरे की ख़ुशी और होंठों की मुस्कान ही मेरा सबसे बड़ा मनोरंजन है। उस दिन से शारुल मेरे सबसे अच्छे दोस्तों की सूची में शुमार हो गया।

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