खेतों के वैज्ञानिक:युवा कृषि वैज्ञानिक ने प्राकृतिक विधि से तैयार की औषधीय फसलें, अब अन्य किसानों को भी कर रहे हैं प्रशिक्षित

डॉ. महेंद्र मधुप20 दिन पहले
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  • प्राकृतिक विधि से औषधीय फ़सलें किशोर राजपूत न केवल प्राकृतिक विधि से औषधीय फ़सलों का उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि इसके लिए उन्होंने किसानों को प्रशिक्षित भी किया है। विशिष्ट पहचान बनाने वाले छत्तीसगढ़ के इस युवा किसान वैज्ञानिक की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी।

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जि़ले की नगर पंचायत नवागढ़ में, पिता गेंदलाल से बचपन से खेती-किसानी का पाठ पढ़ा। जन्म पास के ही गांव जूनाडांडू में 1984 की 26 जुलाई को हुआ। स्कूल के रास्ते में आते-जाते खेतों, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों से लगाव हो गया। खेतों की पगडंडियों पर जड़ी-बूटियों को देखता-समझता। उम्र बढ़ी तो समझ भी बढ़ी। 12वीं के बाद पढ़ाई छूट गई थी। 2006 से 2017 तक लोकेश्वर आयुर्वेदिक दवाख़ाना चलाया। इस बीच 2011 में लक्ष्मी लोधी से विवाह हुआ। अभी बिटिया संस्कृति कक्षा चौथी और बेटा स्वस्तिक नर्सरी में है।

बहरहाल, 2012-13 में औषधीय खेती शोध संस्थान, नवागढ़ शुरू किया। 2013 में सामाजिक कार्यों के लिए सुरभि सेवा संस्थान की शुरुआत की। इसी साल संस्कृति शिक्षण संस्थान के माध्यम से आठवीं तक शिक्षा देने के लिए विद्यालय खोला।

अंतरवर्तीय खेती के लाभ

सर्वप्रथम 2011 में, आधा एकड़ ज़मीन पर 300 रुपए के बीज से औषधीय पौधों की प्राकृतिक विधि से खेती शुरू की। खेत की मेड़ पर सतावर, कौच बीज, सर्पगंधा आदि लगाए ताकि अनुपयोगी जगह से अतिरिक्त आय हो। बरसाती दिनों में अपने आप उगने वाली वनस्पतियों को संगृहीत किया, जिनमें भूमि आंवला, भृंगराज, सरपुंख, नागर मोथा आदि मुख्य थीं। खेतों में अश्वगंधा के साथ सरसों, धान में बच और ब्राह्मी, गन्ने के साथ मंडूकपर्णी, तुलसी, लेमनग्रास, मोरिंगा, चना, खस, चिया, किनोवा, गेहूं, मेंथा सहित अन्य अंतरवर्तीय फ़सलें लगाकर आमदनी बढ़ाई। विगत ग्यारह वर्षों में विफलता भी ख़ूब मिली। घबराया नहीं।

हठयोगी साहिलनाथ महाराज का मार्गदर्शन ऊर्जा देता रहा कि संघर्ष में घबराकर हार मत जाना। आने वाला समय आयुर्वेद का है। मैंने सर्पगंधा और अन्य क़िस्मों पर ध्यान केंद्रित किया। बाज़ार के लिए हर्बल कंपनियों के संपर्क में आया। आज तो छत्तीसगढ़ के सभी जि़लों में अच्छा नेटवर्क है। सौ किसान परिवार तो सीधे जुड़े हैं। आधा एकड़ ज़मीन से शुरू हुई औषधीय फ़सलों की खेती 70 एकड़ तक फैली है।

बहुतेरे कृषि नवाचार

गोमूत्र के उपयोग के चलते, बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि में बहुत कम नुक़सान हुआ। ख़रीफ़ फ़सल में साठिया धान के साथ अरहर की खेती लाभकारी रही। प्रति एकड़ 175 रुपए की ताम्रयुक्त छाछ खाद का उपयोग करके 25 से 30 फ़ीसदी धान का उत्पादन बढ़ाया।

छत्तीसगढ़ के जैविक ख़ुशबूदार चावल की मांग निरंतर बढ़ रही है। प्राचीन ‘कुबरी ममहानी’ की ख़रीद का आदेश नेपाल से मिला है। यहां का काला चावल (ब्लैक राइस) शुगर फ्री है। कैंसर और बीपी जैसे रोगों के लिए भी कारगर है। 40 टन काला चावल उपलब्ध है। तीन क्विंटल चावल के निर्यात का आदेश मिला है। सऊदी अरब, अमेरिका, लंदन में इसकी बहुत मांग है। केरल से लाल केले के 500 पौधे मंगवाए हैं। फिलहाल प्रदेश में इसकी खेती कहीं नहीं हो रही है। इसकी मांग देश-विदेश में बहुत है। उत्पादन के परिणाम आने पर ही भविष्य के लिए निर्णय कर सकूंगा।

छत्तीसगढ़ में सड़क किनारे उगने वाला खरपतवार सेना अलाटा (हिंगलाज) जापानियों की चाय का हिस्सा बन गया है। इसे यहां ‘पीला सोना’ भी कहा जाता है। इसे बढ़ावा देने के लिए साथी किसानों को प्रेरित कर रहा हूं। उड़द के साथ उगे खरपतवार सुलवारी को बेचकर 5 हज़ार रुपए कमाए। दवा कंपनियों की ओर से इसकी बहुत मांग है। इन सबके अलावा, विलुप्त होती देसी धान की 200 प्रजातियों को सहेजा है। इन्हें देखने के लिए दूर-दूर से नवाचारी किसान और कृषि विशेषज्ञ आते हैं।

भविष्य की योजनाएं

जो देखा, सुना और समझा, उसके अनुसार जिरेनियम फूल की खेती बहुत लाभकारी है। कोशिश रहेगी कि सौ एकड़ ज़मीन लीज़ पर लेकर इसकी खेती करूं। किसानों के बीच औषधीय उत्पादक किसान कंपनी (एफपीओ) बनाकर, फार्मेसियों की मांग के अनुसार औषधीय फ़सलों की खेती करने और करवाने का काम करना चाहता हूं।

दैनिक उपयोग के हर्बल उत्पाद की शुरुआत कर, खेत से सीधे उपभोक्ता के घर पर पहुंचाने के लिए मंथन चल रहा है। इन सबके लिए सामाजिक सरोकारों से जुड़कर ऊर्जा मिलती है। इलाज के लिए लोगों को औषधीय पौधे निःशुल्क देता हूं।

सम्मान और पुरस्कार...
2010 में भारतीय आयुर्वेद विकास एवं विश्व विज्ञान संस्थान, जौनपुर (उ.प्र.) द्वारा ‘आयुष चिकित्सा विशारद’, वनौषधि माला, चरखी दादरी (हरियाणा) द्वारा ‘आयुर्वेद निधि’।
2010 में डॉ. ईश्वरसहाय गुरुजी आयुष आश्रम, लखनऊ द्वारा मानद उपाधि ‘आचार्य’।
2010 में भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और योग अनुसंधान केंद्र द्वारा भोपाल में ‘योग शिक्षक’ सम्मान।
2010 में धरा धाम इंटरनेशनल फाउंडेशन, जनकपुर (नेपाल) द्वारा ‘पर्यावरण योद्धा सम्मान’।
2022 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रायपुर में ‘जैव विविधता अवॉर्ड’, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री द्वारा दिल्ली में ‘संत कबीर अवॉर्ड’, भारतीय जैविक किसान उत्पादक संघ और आईआईएएएसडी द्वारा जयपुर में ‘जैविक किसान अवॉर्ड’।

संपर्क कर सकते हैं...
किशोर राजपूत, वार्ड नं. 11, शंकर नगर, नवागढ़- 491337, जिला बेमेतरा (छत्तीसगढ़), ईमेल: kishorrajput26684@gmail.com, मोबाइल : 9770551132

लेखक परिचय

डॉ. महेंद्र मधुप

वरिष्ठ कृषि पत्रकार। किसान वैज्ञानिकों के जीवन, संघर्ष और शोध पर चार पुस्तकें ‘खेतों के वैज्ञानिक’, ‘वैज्ञानिक किसान’, ‘प्रयोगधर्मी किसान’ और ‘अन्वेषक किसान’ प्रकाशित।मिशन फ़ार्मर साइंटिस्ट परिवार और मिशन पर्यावरण योद्धा परिवार के प्रणेता।

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