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  • 70 Percent Of Republican Lawmakers Collude With Donald Trump; He Was In Favor Of Canceling Biden's Election 9 January 2021

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अमेरिका में हिंसा का असर:70 फीसदी रिपब्लिकन सांसदों की डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मिलीभगत ; वे बाइडेन का चुनाव रद्द करने के पक्ष में थे

7 दिन पहले
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  • संसद पर हमले और सीनेट की दो सीटों के चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत से नए राष्ट्रपति के कार्यकाल की दिशा बदलेगी
  • राष्ट्रपति ने लगातार झूठा प्रचार करके अपने समर्थकों और पार्टी के लोगों को उन्मादी भीड़ में बदला

चार साल पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी संसद भवन (केपिटोल बिल्डिंग) के सामने खड़े होकर राष्ट्रपति पद की शपथ लेते हुए ‘अमेरिकी जनसंहार’ बंद करने का वादा किया था। उनके कार्यकाल का समापन स्वयं राष्ट्रपति द्वारा भीड़ से संसद की ओर कूच के साथ हो रहा है। इतना ही नहीं ट्रम्प ने भीड़ की हिंसा के बाद उसकी तारीफ भी की। उनके झूठ ने लोगों में असंतोष भड़काया। संविधान और कानून के प्रति उनके असम्मान ने संसद को शिकार बनाया है। रिपब्लिकन पार्टी भी ट्रम्प के प्रभाव में है। प्रतिनिधि सदन के 70% और सीनेट के 25% रिपब्लिकन सांसद बाइडेन की जीत को रद्द करने के पक्ष में वोट कर सकते थे। रिपब्लिकन पार्टी को ट्रम्प की पकड़ से बाहर निकलने में बहुत मुश्किल हो सकती है।

संसद की हिंसा को ट्रम्प समर्थकों का शक्ति प्रदर्शन माना गया है। वस्तुत: इसके पीछे पराजय छिपी है। जब ट्रम्प के समर्थक संसद में घुसकर तोड़फोड़ कर रहे थे। उस समय कांग्रेस राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प की हार पर मुहर लगा रही थी। दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी जार्जिया में सीनेट की दो सीटों पर अप्रत्याशित जीत का जश्न मना रही थी। इससे पार्टी को सीनेट में बहुमत मिल गया है। भीड़ का गुस्सा विपक्ष में बैठने वाली रिपब्लिकन पार्टी पर प्रभाव डालेगा। इसका असर नए राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल पर भी होगा।

रिपब्लिकन पार्टी को इस बार वापसी में बेहद मुश्किल हो सकती है। हालांकि, हार के बावजूद रिपब्लिकन समर्थकों के बीच ट्रम्प की रेटिंग 90% के आसपास है। ट्रम्प ने अपनी लोकप्रियता से फायदा उठाकर झूठ गढ़ा कि राष्ट्रपति चुनाव वे ही जीते हैं। इकोनॉमिस्ट के लिए यूगव के सर्वे में 64 % रिपब्लिकन वोटरों की राय थी कि बाइडेन की जीत पर कांग्रेस को रोक लगानी चाहिए। अमेरिकी प्रतिनिधि सदन के तीन चौथाई और सीनेट के एक चौथाई रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रम्प के शर्मनाक षडयंत्र में उनका साथ दिया। संसद में भीड़ के घुसने के बाद भी वे ट्रम्प का समर्थन कर रहे थे। यह पार्टी पर ट्रम्प की गंदी और खराब पकड़ का संकेत है। किसी नाकाम नेता और बेकार रणनीति से पीछा छुड़ाना एक बात है। लेकिन उस व्यक्ति को छोड़ना एकदम दूसरी बात है जिसके बारे में आपके अधिकतर मित्र सोचते हैं कि वे सही राष्ट्रपति हैं और आपके राजनीतिक दुश्मनों में बहुत बड़ी धोखाधड़ी से उनकी सत्ता छीन ली है।

संसद पर हमले की घटना का एक अच्छा पहलू है कि ट्रम्प का समर्थन करने वालों की संख्या कम होगी। स्पीकर की कुर्सी पर ट्रम्प के एक समर्थक के बैठने का दृश्य उन रिपब्लिकन वोटरों को डराएगा जो सोचते हैं कि उनकी पार्टी व्यवस्थित है। संविधान को मानती है। ट्रम्प द्व्रारा संसद पर हमले के लिए उकसाने की बात सुनकर मध्यमार्गी अमेरिकी उनसे मुंह मोड़ सकते हैं। सीनेट में दोनों पार्टियों की 50-50 सीटें होने और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के निर्णायक वोट की वजह से बाइडेन कई सुधार कर सकेंगे।

1892 के बाद इतनी बुरी हालत
चुनावी धांधली का झूठा आरोप लगाने वाले ट्रम्प के समय में रिपब्लिकन पार्टी को बहुत नुकसान उठाना पड़ा है। पार्टी ने 2016 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के साथ कांग्रेस में बहुमत हासिल किया था। जार्जिया में सीनेट की दो सीटों पर चुनाव हारने के साथ पार्टी चार साल बाद वह सब गंवा चुकी है। रिपब्लिकन पार्टी के साथ अंतिम बार ऐसा 1892 में हुआ था। उस जमाने में बेंजामिन हैरीसन चुनाव हारे थे। आमतौर पर इतनी भारी पराजय के बाद कोई राजनीतिक दल कुछ सबक सीखकर वापसी करता है। 1964 में बैरी गोल्डवाटर की पराजय के बाद रिपब्लिकन पार्टी और 1984 में वाल्टर मांडेल की हार के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐसा किया था।

राजनीति विज्ञानियों ने पहले ही आशंका जताई थी
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के दो राजनीति विज्ञानियों-स्टीवन लेविट्सिकी और डेनियल जिब्लाट ने अमेरिका में लोकतंत्र की बिगड़ती हालत के संकेत लगभग तीन साल पहले दिए थे। डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के एक साल बाद दोनों ने एक किताब- हाउ डेमोक्रेसीस डाई में अपने देश की स्थितियों पर चिंता जताई थी। उन्होंने, पूर्वी यूरोप और लेटिन अमेरिका में लोकतंत्र में आई गिरावट पर कई साल की रिसर्च के बाद किताब लिखी थी। उन्होंने लिखा, हम भयभीत हैं.... फिर भी हम स्वयं को आश्वस्त करते हैं कि अमेरिका में स्थितियां इतनी अधिक खराब नहीं होंगी।

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