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कोरोना काल में जन्म दर:महामारी के बाद भारत सहित कई देशों में अधिक बच्चों के पैदा होने की संभावना

3 महीने पहले
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  • लॉकडाउन के बाद परिवार नियोजन साधनों के उपयोग में कमी आई
  • कई अमीर देशों में जन्मदर में गिरावट होने की संभावना बढ़ी

कोरोना वायरस महामारी के जन्म दर पर असर के संबंध में अभी निश्चित रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी। फिर भी, अमीर और गरीब देशों में अलग पैटर्न सामने आए हैं। धनी देशों में बहुत लोग परिवार सीमित रखना चाहते हैं। लेकिन, भारत और कुछ निर्धन देशों में बड़ी संख्या में बच्चों के जन्म लेने की संभावना नजर आ रही है। यहां इस मामले में महिला की मर्जी कम ही चलती है। वैसे, कुछ संपन्न देशों में सरकारें जन्मदर बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। इनमें सिंगापुर, जापान शामिल हैं।

जापान के नए प्रधानमंत्री सुगा योशिहिदे ने इन विट्रो फर्टिलिटी उपचार को स्वास्थ्य बीमा में शामिल करने का आग्रह किया है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में पिछले साल की तुलना में मई के बाद तीन महीनों में नए गर्भधारण के मामलों में 13% गिरावट आई है। गरीब देशों में लोगों के बड़े पैमाने पर विस्थापित होने से स्त्रियों, पुरुषों को साथ रहने का अधिक अवसर मिला है। भारत में मार्च के अंत में लॉकडाउन लागू होने के बाद लाखों शहरी कामगार देशभर में अपने गांव लौटे थे। परिवार नियोजन संस्था यूएनएफपीए के विनीत शर्मा कहते हैं, इस स्थिति में आबादी से संबंधित अनुमान गड़बड़ा सकते हैं। भारत में दिसंबर और मार्च के बीच गर्भ निरोधक गोलियों और कंडोम का वितरण 15% और 23 % गिर गया। गर्भ नियंत्रण के अन्य उपाय भी प्रभावित हुए हैं।

जन्म दर से संबंधित गटमाचेर इंस्टीट्यूट का अनुमान है, 132 मध्यम और निम्न आय के देशों में परिवार सीमित रखने से जुड़ी सेवाओं के उपयोग में 10% कमी हुई है। पांच करोड़ से अधिक महिलाओं को इस साल गर्भनिरोधक उपलब्ध नहीं हो सकेंगे। इस कारण 15 लाख अनचाहे गर्भधारण हो सकते हैं। 28 माताओं और एक लाख 70 हजार नवजात शिशुओं की मौत हो सकती है। 33 लाख असुरक्षित गर्भपात संभव हैं। अमीर देशों में परिवार नियोजन में महिलाओं की इच्छा अधिक चलती है। गटमाचेर इंस्टीट्यूट ने 18 से 34 साल की अमेरिकी महिलाओं के सर्वें में पाया कि महामारी के कारण एक तिहाई महिलाएं बाद में बच्चा पैदा करना चाहती हैं या उनका विचार कम बच्चे पैदा करने का है। आईजेडए इंस्टीट्यूट ने नवंबर और फरवरी के बीच अमेरिका में मासिक जन्म की संख्या में 15% गिरावट का अंदाज लगाया है।

न्यूयॉर्क शहर में लॉकडाउन लगने के बाद बहुत लोगों ने प्रजनन की कमजोरी दूर करने के लिए चल रहा इलाज बंद कर दिया है। महिलाओं में अजन्मे बच्चे के वायरस से संक्रमित होने की भी आशंका है। गर्भपात और प्रजनन सेवाएं उपलब्ध कराने वाली अमेरिका की सबसे बड़ी चेन- प्लांड पेरेंटहुड में गर्भपात की संख्या बढ़ गई है। मध्यम आय वाले देश ब्राजील में जिका बीमारी फैलने के बाद जन्म दर कम हो गई थी। साओ पाउलो जैसे बड़े शहरों में कई महिलाओं ने बच्चे को जन्म देने का इरादा छोड़ दिया है। मिलान,इटली में केटोलिका डेल सेक्रो कुओर यूनिवर्सिटी की फ्रांसेस्का लुपी की रिसर्च में पाया गया कि स्पेन में 29% और इटली में 37 % युवतियों ने बच्चे का जन्म टाल दिया है।

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