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  • Biden's Tough Stand Against China; Impact Mitigation Strategy, Projects Worth Rs 150 Lakh Crore 18 July 2021

दो महाशक्तियों की होड़:चीन के खिलाफ बाइडेन का कड़ा रुख; प्रभाव कम करने की रणनीति, 150 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट

9 दिन पहले
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  • बाइडेन नहीं चाहते कि चीन किसी कीमत पर अमेरिका की जगह ले पाए

1970 के दशक में रिचर्ड निक्सन की बीजिंग यात्रा के बाद अमेरिका ने चीन से कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की नीति पर अमल किया था। लेकिन, डोनाल्ड ट्रम्प ने इसकी जगह आक्रामक रणनीति अपनाई थी । उम्मीद थी कि नए राष्ट्रपति जो बाइडेन चीन से संबंध बेहतर बनाएंगे। इसके उलट बाइडेन ने ट्रम्प से अधिक कठोर रुख अपनाया है। वे चीन के खिलाफ रणनीतिक ढांचा बना रहे हैं। उसके उदय को रोकने की कोशिश में लगे हैं। उन्होंने, टेक्नोलॉजी,इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन का मुकाबला करने के लिए 150 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट मंजूर किए हैं। वे अमेरिका की ताकत और प्रभाव को बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।

बाइडेन सरकार ने अपने पहले छह महीनों में चीन के शिनजयांग प्रांत में उइगुर मुसलमानों पर अत्याचारों को जनसंहार करार दिया। उनके बहुत ज्यादा कड़े रुख से लोगों को आश्चर्य हुआ है। वे हुवावे और कई अन्य टेक्नोलॉजी कंपनियों, सैनिक साज-सामान से जुड़े कारोबार को नियंत्रित करने की कोशिश में लगे हैं। उन्होंने, दुनियाभर में अपने सहयोगी देशों से चर्चा में चीन से निपटने के मुद्दे को प्राथमिकता दी है। बाइडेन सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इकोनॉमिस्ट को बताया कि चीन अगले 10-15 वर्षों को विश्व में अपनी धाक जमाने के लिए अवसर के रूप में देखता है। शीत युद्ध के दौर में अमेरिका ने जैसे सोवियत संघ को काबू में रखा था, वैसा वह चीन के साथ नहीं कर सकता है क्योंकि चीन को ग्लोबल अर्थव्यवस्था से अलग रखना संभव नहीं है। इसकी बजाय बाइडेन अमेरिका का प्रभाव बढ़ाकर चीन को नियंत्रण में रखना चाहते हैं।

बाइडेन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, शायद ही अमेरिका जैसी कोई महाशक्ति पटरी से इस तरह उतरी होगी। अमेरिका को अपनी महानता फिर से हासिल करनी होगी। इसलिए सीनेट ने जून में अमेरिका को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इनोवेशन, कॉम्पटीशन एक्ट पास किया है। इसके तहत सेमीकंडक्टर रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए 3.88 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और अन्य टेक्नोलॉजी पर 2.16 लाख करोड़ रुपए रखे हैं। चंद्र मिशन के लिए भी अतिरिक्त धन की व्यवस्था है। इंफ्रास्ट्रक्चर सहित महामारी से संभलने के लिए 142 लाख करोड़ रुपए के पैकेज को भी चीन से निपटने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अमेिरका के लिए चीन की मौजूदा स्थिति का मुकाबला आसान नहीं है। किसी गंभीर आघात को छोड़कर चीन की अर्थव्यवस्था अगले 10-15 वर्ष में सबसे बड़ी हो जाएगी। वैश्विक कारोबार में भी चीन हावी है। लेकिन, कई देश चीन से टकराव नहीं चाहते हैं। ब्रिटेन ने कहा है कि वह चीन से संतुलित रिश्ते रखना चाहता है। फ्रांस और जर्मनी ने भी टकराव में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यूरोप,एशिया के कई देश चीन से कारोबारी रिश्ते रखना चाहते हैं। अमेरिकी कंपनियां भी चीन के बाजार तक पहुंच बनाए रखने के लिए निर्यात बंदिशों में ढील के पक्ष में हैं। इसलिए अमेरिका को हर क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ाकर चीन का मुकाबला करना पड़ेगा।

चीन को उसकी भाषा में जवाब देने की राय
अमेरिका को चीन की ताकत और प्रभाव बेअसर करने और अपनी ताकत बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए। यह संदेश ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के पूर्व विशेषज्ञ रस दोषी की नई किताब का है। द लांग गेम: चाइनाज ग्रेंड स्ट्रेटजी टु रिप्लेस अमेरिकन ऑर्डर- पुस्तक बताती है कि चीन वर्षों से अमेरिका के राजनीतिक प्रभुत्व में सेंध लगाने और चीन के हितों की रक्षा करने वाली अधिक अनुदार वैश्विक व्यवस्था बनाने में जुटा है। किताब का निष्कर्ष है, चीन के प्रयासों का उसकी भाषा में जवाब देने की जरूरत है। इस राय को ज्यादा अहमियत मिल गई है क्योंकि दोषी राष्ट्रपति जो बाइडेन की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में चीनी मामलों के डायरेक्टर हैं।

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