अर्थव्यवस्था:चीन: 28 प्रॉपर्टी कंपनियां संकट में, जनता काे सरकार के आर्थिक माॅडल पर भरोसा नहीं है

14 दिन पहले
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  • संपत्ति बाजार में निवेश कम हुआ, सरकार की ढील से समस्या बढ़ी

लुओयांग और झेंगझाउ शहरों के बीच 120 किलोमीटर की ट्रेन यात्रा चीन की आर्थिक स्थिति और टूटे सपनों की तस्वीर पेश करती है। एक घंटे लंबी यात्रा में अधूरी रिहायशी इमारतों का अंतहीन सिलसिला दिखाई पड़ता है। कई बिल्डिंग पूरी होने के करीब हैं। कुछ पूरी हो चुकी हैं। लेकिन ऐसी बहुत इमारतें हैं जिनमें लंबे समय पहले निर्माण कार्य बंद हो चुका है। कंपनियों और बिल्डरों के पास पैसा नहीं है। ढेरों प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं। ट्रेन का यह सफर देश के सबसे बड़े संकट को सामने रखता है। जनता का सरकार के आर्थिक मॉडल पर भरोसा नहीं रहा।

कई दशक से प्रॉपर्टी इंडस्ट्री चीन के उदय का प्रतीक रही हैैैै। निजी उद्यमियों ने अपार पैसा कमाया है। लोगों के घरों की कीमत तीन गुना तक बढ़ गई। स्थानीय सरकारों ने बिल्डरों को जमीन बेचकर अपना खजाना भरा है। चीन की 70% घरेलू संपत्ति रियल एस्टेट से जुड़ी है। कोविड-19 लॉकडाउन और निजी उद्यमियों पर कड़ी कार्रवाई से जीडीपी में बीस प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला सेक्टर प्रभावित हुआ है। एक साल पहले की तुलना में जुलाई में नए प्रोजेक्ट की शुरुआत 45% कम रही। नए घरों की बिक्री में 29% गिरावट आई है। प्रॉपर्टी में निवेश 12% कम हुआ है। बड़ी कंपनियां दिवालिया हो रही हैं। फर्नीचर निर्माता और स्टील इंडस्ट्री पर भी असर पड़ा है। संकट ऐेसे समय आया है जब अक्टूबर में पार्टी कांग्रेस में चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग तीसरे कार्यकाल के लिए चुने जा सकते हैं। संकट से निपटने के लिए सरकार की प्रतिक्रिया धीमी रही है। हाउसिंग संकट के दो प्रमुख कारण हैं। पहला है, प्रॉपर्टी इंडस्ट्री की मनमानी के खिलाफ सख्त कार्रवाई। अगस्त 2020 से सरकार ने संपत्ति के अनुपात में बिल्डरों की देनदारियों, कर्ज और नगद धन की सीमा निश्चित की है। इससे कई बिल्डरों के कर्ज लेने पर रोक लग गई। उनकी निर्माण जारी रखने की क्षमता प्रभावित हुई है। दूसरा प्रहार चीन की जीरो कोविड नीति ने किया है। दर्जनों शहर लॉकडाउन में हैं। चेंगडू और शेनझेन जैसे बड़े शहरों में लॉकडाउन ने कारोबार पर असर डाला है। जाता था, वे अब संघर्ष कर रही हैं। इस साल की शुुरुआत में विश्लेषकों ने बिक्री के हिसाब से चीन की सबसे बड़ी प्रॉपर्टी कंपनी कंट्री गार्डन की स्थिति बिगड़ने के संबंध में जताए अनुमानों को खारिज कर दिया था। लेकिन 30 अगस्त को कंपनी ने बताया कि वर्ष के पहले छह महीनों में उसका मुनाफा लगभग 100% कम हुआ है। कंपनी की कठिनाइयां बताती हैं कि समूची इंडस्ट्री खतरे में है। बाजार में खरीदार नहीं हैं। कई साल से लाखों लोग उन मकानों की डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं जिनका वे पैसा दे चुके हैं। 2013 से 2020 के बीच पहले बेचे गए केवल 60% मकानों की डिलीवरी हुई है। विशेषज्ञों को प्रॉपर्टी सेक्टर की समस्याओं की जानकारी वर्षों से थी लेकिन वे सरकार के डर से चुप रहे। अब स्थानीय सरकारों ने इंडस्ट्री का विश्वास बहाल करने के लिए कठोर नियमों में ढील दी है। आवास ऋण की शर्तें आसान बनाई गई हैं। अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट को धन देने के लिए फंड बनाए गए हैं। फिर भी चीन में आबादी की वृद्धि दर कम होने से मकानों की मांग घटने की संभावना है। रिसर्च फर्म प्लेनम के चेन लांग का अनुमान है, अगले दस साल में मकानों की सालाना मांग में 0.88 अरब से 1.36 अरब वर्ग मीटर की गिरावट आएगी।

30 कंपनियों के शेयरों की ट्रेडिंग रुकी

चीन में बिल्डर पैसा जुटाने के लिए बनने से काफी पहले घर बेचते हैं। पिछले साल 90% मकान निर्माण पूरा होने से पहले बेचे गए थे। बैंकों के प्रॉपर्टी सेक्टर को कर्ज में कटौती की वजह से संपत्ति बाजार की स्थिति चिटफंड कंपनियों जैसी हो गई है। विश्व में सबसे अधिक कर्ज से लदी कंपनी एवरग्रांडे दिसंबर में दिवालिया हो गई। उसके विदेशी कर्ज को चुकाने की समय सीमा जुलाई में खत्म हो चुकी है। 28 प्रॉपर्टी कंपनियां निवेशकों को बकाया पैसा नहीं दे सकी हैं। वे दिवालिया हो गई हैं। रिसर्च फर्म गवेकल के अनुसार हांगकांग में लिस्टेड 30 डेवलपर कंपनियों के शेयरों की ट्रेडिंग रोक दी गई है। अगस्त में चीन की आधी लिस्टेड प्रॉपर्टी कंपनियों के शेयर बिक्री मूल्य से नीचे चल रहे थे। चार माह पहले दिवालिया होने से पूर्व एवरग्रांडे की भी यही स्थिति थी।

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