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बदलाव का दौर:पिछले सात वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 40% बढ़ी; इस साल विकास दर बड़े देशों में सबसे अधिक रहेगी

8 दिन पहले
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  • राष्ट्रीय बाजार, डिजिटल पेमेंट और बड़ी कंपनियों के सहारे तेजी से तरक्की

भारत की अर्थव्यवस्था में बदलाव की स्थितियां 19 वीं सदी के अमेरिका की याद दिलाती हैं। एक बड़ा राष्ट्रीय बाजार बन गया है। कंपनियों के बड़े पैमाने पर विस्तार की गुंजाइश है। आंतरिक स्तर पर लाखों गरीब लोग यहां से वहां जा रहे हैं। दूसरी ओर नया उपभोक्ता वर्ग पनप रहा है। नई टेक्नोलॉजी की बुनियाद पर कारोबारी साम्राज्य खड़े हो रहे हैं। 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल की शुरुआत की थी तब भारत विश्व की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। उसके बाद सात वर्षों मेंं 40% की बढ़ोतरी हुई है। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में केवल चीन इस अवधि में 53% वृद्धि के साथ बेहतर रहा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार इस साल बड़े देशों के बीच भारत की विकास दर सबसे अधिक 8% रहेगी।
आईएमएफ का अनुमान है कि 2027 तक भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। बाजार मूल्य पर जीडीपी लगभग 386 लाख करोड़ रुपए (5 ट्रिलियन डॉलर) होगी। भारत का शेयर बाजार अमेरिका, चीन और जापान के बाद चौथे नंबर पर पहुंच चुका है। लगभग 100 यूनिकॉर्न कंपनियों (1 अरब डॉलर मूल्य) के साथ भारत इस मामले में अमेरिका, चीन के साथ तीसरे नंबर पर है। महामारी पर काबू के बाद अगले दशक में विकास को सहारा देने वाले चार आधारस्तंभ स्पष्ट दिखाई देते हैं-1. एक राष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा के नए स्रोतों-सोलर, विंड पर आधारित इंडस्ट्री का विस्तार। 2. अंतरराष्ट्रीय कारणों की वजह से मैन्युफैक्चरिंग का चीन से दूसरे देशों में शिफ्ट होना। 3. आईटी इंडस्ट्री का प्रमुखता से आगे बढ़ना जारी। 4. तरक्की की दौड़ में पीछे छूट गए करोड़ों लोगों के कल्याण की योजनाएं।
भारत के नए विकास पैटर्न का महत्वपूर्ण स्तंभ सिंगल नेशनल मार्केट का उदय है। इस सुधार का अधिकतर हिस्सा और निवेश मोदी के सत्ता में आने से पहले शुरू हो चुका था लेकिन मोदी ने इसे तेज किया है। 2014 के मुकाबले नेशनल हाईवे नेटवर्क 50% ज्यादा हो चुका है। सरकार ने एकल नेशनल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। इसके दो महत्वपूर्ण हिस्से आधार और नेशनल पेमेंट सिस्टम यूपीआई हैं। अप्रैल 2022 में यूपीआई के मार्फत पेमेंट मासिक जीडीपी का 50% रहे। राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा छोटी कंपनियों पर भारी पड़ी है। तरक्की के दूसरे स्तंभ मैन्युफैक्चरिंग को बड़ी कंपनियां संभाल रही हैं।
भारत के नए ढांचे का तीसरा स्तंभ लंबे समय से चल रही उसकी ताकत- टेक्नोलॉजी है। आईटी सर्विस इंडस्ट्री और आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री पिछले दशक में दोगुना बढ़ी है। उसकी सालाना आय 17 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। रोजगार की समस्या जरूर है। 2012 में 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की रोजगार में हिस्सेदारी 55% थी। 2020 में यह 51% थी। इसलिए चौथे स्तंभ-डिजिटल माध्यम से नगद सहायता की भूमिका महत्वपूर्ण है। 2017 के बाद से 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक का नगद भुगतान हो चुका है।
चार महत्वपूर्ण स्तंभों के बूते भारत की अर्थव्यवस्था में अगले दस साल तक अच्छी रफ्तार कायम रहने की संभावना है। फिर भी, सत्ताधारी पार्टी की कार्यशैली के कुछ पहलू चिंता पैदा करते हैं। सत्ता में रहने के लिए लगातार जिस तरह का धार्मिक तनाव बनाए रखा जाता है, अब तक अर्थव्यवस्था उससे बची हुई है। सरकार अल्पसंख्यकों की कीमत पर हिंदू गौरव को बढ़ावा देने के साथ हाई टेक्नोलॉजी पर आधारित बड़ी अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रही है। अब तक दोनों महत्वाकांक्षाएं साथ-साथ चलती रही हैं लेकिन हमेशा ऐसा संभव नहीं होगा।
चार कंपनियों की 19 लाख करोड़ रु. निवेश की योजना

भारत लंबे समय से दुनिया की फैक्टरी बनने का सपना देख रहा है। लेकिन, पिछले दस साल से उत्पादकता में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 17-18% पर अटकी है। बड़ी कंपनियां इस स्थिति में बदलाव का इरादा रखती हैं। मार्सेलस के एसेट मैनेजर सौरभ मुखर्जी का गणित है कि भारत की 20 सबसे बड़ी कंपनियां कॉर्पोरेट इंडिया के नगद धन का 50% कमाती हैं। इन दिग्गजों में शामिल हैं- अदानी (एनर्जी, ट्रांसपोर्ट), रिलायंस इंडस्ट्रीज (टेलीकॉम, केमिकल, एनर्जी, रिटेल), टाटा (रिटेल, एनर्जी, कार) और जेएसडब्लू (स्टील)। अगले पांच से आठ वर्ष में अकेले इन चार कंपनियों की योजना इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरते उद्योगों पर 19 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने की है।

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