प्रदूषण का असर:कार्बन उत्सर्जन रोकने के भारत के प्रयास सराहनीय, पर कोयले का इस्तेमाल समस्या

22 दिन पहले
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  • जलवायु परिवर्तन की दिशा में भारत की पहल अच्छी, पर कई क्षेत्रों में काम बाकी

दुनिया के नेताओं को संबोधित करते हुए, ग्लासगो में आयोजित कॉप26 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया को जलवायु परिवर्तन से हो रहे नुकसान में गरीब देशों की कम हिस्सेदारी है और अमीर देशों की तुलना में भारत जैसे देशों ने पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को ज्यादा निभाया है। मोदी सही हैं। दुनिया की 18% आबादी होने के बावजूद भारत का कार्बन उत्सर्जन 3% ही है। भले ही भारतीय नेताओं की बात सही हो, लेकिन फिर भी देश में लोग दूषित हवा से पीड़ित हैं और कई लोग अपनी जान भी गंवाते हैं।

दिल्ली जैसे शहरों में स्थिति बुरी है। लेकिन समस्या यहीं तक सीमित नहीं है। सर्दियों में हिमालय विशाल भारत-गंगा के मैदानों को आबाद करने वाले 60 करोड़ लोगों के प्रदूषण को झेलता है। सिंचाई के लिए डीजल पंप से लेकर कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों तथा पेट्रोल-डीजल से चलने वाली एसयूवी तक, धुआं एक जहरीला मिश्रण बनाता है, जो आमतौर पर इस मौसम की हवा में हफ्तों तक बना रह सकता है।

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत पांच वर्षों में, 122 शहरों में प्रदूषण को 30% तक कम करने की योजना बनाई है। फिर भी कुछ मामलों में अभी बहुत काम किए जाने की जरूरत है। सरकार का कोयले पर खासतौर पर नरम रुख रहा है। देश में अब भी 70% बिजली उत्पादन कोयले से होता है और 10% पार्टिकुलेट प्रदूषण के लिए यही जिम्मेदार है। फिर भी भारत दुनिया में इसका सबसे बड़ा उत्पादक है। दिल्ली के एक थिंक-टैंक के अध्ययन के मुताबिक भारत बिजली आपूर्ति में बहुत गंभीर व्यवधान डाले बिना अपने सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले 20-30 कोयला आधारित बिजली संयंत्र बंद कर सकता है क्योंकि ये बुरी तरह से अक्षम साबित हो रहे हैं। सरकार को बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए नौकरशाहों को भी जिम्मेदार बनाने पर जोर देना चाहिए। अच्छी बात यह है कि भारत के लोगों में प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ी है और अब स्थानीय स्तर पर भी लोग इसे कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं।

सरकार और कॉर्पोरेट, दोनों के प्रयास उत्साहजनक
​​​​​​​भारत में सरकार ने प्रदूषित हवा को नजरअंदाज नहीं किया है। मोदी सरकार ने सॉलिड फ्यूल्स (कोयला, लकड़ी आदि) की जगह गैस देकर हजारों लोगों का अंदरूनी दूषित हवा से बचाया है। भारत ने अपनी सौर व पवन ऊर्जा क्षमता को भी बढ़ाया है। गाड़ियों से उत्सर्जन संबंधी नियम सख्त किए हैं और स्वच्छ वायु कार्यक्रम भी चलाया है। वहीं अंबानी तथा अडाणी जैसे कॉर्पोरेट घराने भी, जो हायड्रोकार्बन का बिजनेस करते थे, अब बहुत तेजी से ग्रीन एनर्जी के व्यापार में उतर रहे हैं। ग्रीन बॉन्ड्स में भी भारी निवेश हुआ है।

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