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विचारधारा की लड़ाई:अमेरिका में उदारवाद को वामपंथी एक्टिविस्ट से खतरा; अभिव्यक्ति की आजादी कमजोर पड़ी

19 दिन पहले
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  • वफादारी की शपथ, ईश्वर निंदा पर दंड जैसे धार्मिक राज्य के तरीके पुनर्जीवित

350 साल पहले उदारवाद ने चर्च और राज्य के गठजोड़ के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी। इस विचारधारा का नतीजा तीन क्रांतियों के रूप में सामने आया। अमेरिका में थॉमस जैफरसन ने चर्च और राज्य के घृणास्पद मेल को दुनिया की सभी बुराइयों की जड़ बताया था। फ्रांस ने धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र की स्थापना की थी। अंग्रेज क्रांति ने चर्च ऑफ इंग्लैंड को कायम रखा लेकिन उसके प्रभाव को सीमित कर दिया। लेकिन पश्चिमी देशों में कुछ असाधारण घटित हो रहा है। प्रगतिशीलों की एक नई पीढ़ी वफादारी की शपथ और ईश्वर निंदा कानूनों जैसे तरीकों को पुनर्जीवित कर रही है। ये धार्मिक राज्य जैसे हैं। यह प्रयास उदारवाद की मुख्य भूमि अमेरिका और ब्रिटेन में उन लोगों की अगुआई में हो रहा है जो स्वयं को उदारवादी कहते हैं। दक्षिणपंथियों के साथ वामपंथी उदारवादी भी उदारवाद के लिए खतरा हैं।

आज रूढ़िवाद को अध्यात्म की बजाय बुद्धिजीवी कुलीन वर्ग आगे बढ़ा रहा है। उनका कुदरती घर विश्वविद्यालय हैं। बरबेक कॉलेज, लंदन के एरिक कौफमैन के अनुसार ब्रिटेन और अमेरिका में दक्षिणपंथी झुकाव रखने वाले कोई 70-80 विद्वानों और रिसर्च छात्रों का कहना है कि उनके विभागों का माहौल बेहद आक्रामक है। वामपंथियों का छात्रों के बीच प्रभुत्व है। वर्तमान सुधारक व्यवहार और भाषण से संबंधित नियम लागू करने की मांग करते हैं। 2019 में नाइट फाउंडेशन के चार हजार कॉलेज छात्रों के सर्वे में 68% ने बताया कि छात्र जो सोचते हैं, वह कह नहीं पाते क्योंकि उनकी क्लास के साथी उसे आक्रामक मान सकते हैं। हर पीढ़ी के साथ उदारता की बुनियाद- स्वतंत्र अभिव्यक्ति कमजोर पड़ती जा रही है। प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे का कहना है, सन् 2000 के आसपास जन्मे 40% लोग अल्पसंख्यकों के लिए आक्रामक समझी जाने वाली अभिव्यक्ति को दबाने के पक्ष में हैं। इसके मुकाबले 1946 से 1964 के बीच जन्म लेने वाले 27%, 1965 से 1980 के बीच जन्मे 24% और इनसे अधिक बुजुर्ग 12% लोग ऐेसी राय रखते थे।

पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इंग्लैंड में हॉब्स और मिल्टन की कृतियो ंको जला दिया था। आज किताबों पर छात्रों के लिए उसे पढ़ने के खतरे से आगाह किया जाता है। युवा प्रकाशक विवादास्पद किताबों को नहीं छापते हैं। इन दिनों चर्च लोगों से कोई पद संभालने से पहले अपनी धार्मिक आस्था पर लिखित बयान मांगते हैं। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी भी कुछ ऐसा ही कर रही है। वह शिक्षक पद के आवेदकों से पूछती है कि वे धर्म, नस्ल की विविधता को कैसे आगे बढ़ाएंगे। दक्षिणपंथियों और वामपंथियों के अतिवादी विचारों से अंतत: नुकसान है। दोनों पक्ष सामाजिक संघर्ष सुलझाने के लिए संस्थाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए वे अक्सर दबाव, जोर-जबर्दस्ती का सहारा लेते हैं।

धार्मिक राज्य से विद्रोह के रूप में जन्मा था उदारवाद
यूरोप में एक हजार साल तक हुकूमत करने वाले धार्मिक राज्य के खिलाफ विद्रोह के लिए उदारवाद का जन्म हुआ था। मध्यकालीन यूरोप में रोमन कैथोलिक चर्च ने काले कोट वाले पादरियों की एक सेना खड़ी की थी। यह आध्यात्मिक, नैतिक सहित सभी मामलों में आदेशों के पालन की अपेक्षा रखती थी। सुधारवाद ने धार्मिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाई और धार्मिक राज्य मजबूत हो गया। फ्रांसीसी पादरी ने जिनेवा में असंतोष को गिरफ्तारियों, मौत की सजा और निर्वासन से कुचल दिया था। राजा हेनरी द्वितीय ने असंतुष्टों को जीवित गर्म पानी में उबालकर मारने का रास्ता अपनाया था।

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