रिसर्च:एयरोप्लेन के लिए हवा से ईंधन बनाने की नई तकनीक ईजाद

एक महीने पहले
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  • एयरोप्लेन के लिए हवा से ईंधन बनाने की नई तकनीक ईजाद

हवाईजहाजों में जीवाश्म ईंधन की जगह बैटरी जैसे हरित स्रोत इस्तेमाल करना फिलहाल मुश्किल है क्योंकि बैटरी बहुत भारी होती हैं। इसलिए जहाजों में फिलहाल हायड्रोकार्बन ईंधन (जैसे मीथनॉल) का इस्तेमाल लंबे समय तक होता रहेगा। लेकिन जरूरी नहीं कि यह जीवाश्म ईंधन ही हो। ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक स्विट्जरलैंड के तकनीकी विश्वविद्यालय ईटीएच ज्यूरिख के वैज्ञानिक एल्डो स्टीनफेल्ड और उनके सहयोगियों ने ऐसी तकनीक खोजी है, जिससे हवा से ही हवाईजहाज का ईंधन बनाया जा सकता है।

यह तकनीक पेड़-पौधों से प्रेरित है यानी हवा में मौजूद कार्बनडायऑक्साइड को ऊर्जा के लिए इस्तेमाल करना। इस नए ईंधन को बनाने की प्रक्रिया में तीन चरण हैं, जिनमें वातावरण से सीओटू और पानी अवशोषित करना, उन्हें सूर्य की रोशनी से सीरियम ऑक्ससाइड के साथ गर्म करना और मिश्रण को एविएशन ईंधन में बदलना शामिल है।

डॉ स्टीनफेल्ड की टीम ने इस तकनीक से यूनिवर्सिटी की छत पर 32 मिली मीथनॉल बनाने में सफलता पाई है, जो इस सिद्धांत को साबित करता है। हालांकि दुनिया के पूरे एविएशन ईंधन बाजार का विकल्प बनने के लिए जरूरी उत्पादन हेतु करीब 45,000 वर्ग किमी जगह की जरूरत होगी। यह क्षेत्र सुनने में बहुत ज्यादा लगता है, लेकिन यह सहारा रेगिस्तान का मात्र 0.5% है।

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