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  • Nine Out Of Ten People From Poor Countries Will Not Get The Vaccine This Year, Rich Countries Have Tried To Get Cheaper Vaccines 4 April 2021

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मुश्किल में गरीब देश:गरीब देशों के दस में से नौ लोगों को इस वर्ष वैक्सीन नहीं लगेगी, अमीर देशों ने सस्ती वैक्सीन लेने के प्रयास किए

16 दिन पहले
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  • अब तक वैक्सीन की करीब एक अरब डोज तैयार हो चुकी हैं

24 फरवरी को सुबह 7.39 बजे फ्लाइट ईके 787 अकरा विमानतल पर उतरी। उस पर एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन की छह लाख डोज लदी थी। यह डोज भारत की सीरम इंस्टीट्यूट से घाना के लिए आई थीं। गरीब देशों को वैक्सीन देने के लिए कोवैक्स गठजोड़ के तहत यह पहली सप्लाई थी। पिछले साल गठित कोवैक्स में 192 देश शामिल हैं। हर देश को उसकी आबादी के 20% लोगों के लिए वैक्सीन सप्लाई का वादा किया गया है। लेकिन, 24 मार्च को भारत ने वैक्सीन के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी हैे। कोवैक्स की 86% सप्लाई भारत से होगी। दूसरी ओर अमीर देश पहले ही महंगी वैक्सीनों की अग्रिम खरीद कर चुके हैं। फिर भी, कुछ देशों की नजर कोवैक्स को मिलने वाली सस्ती वैक्सीन पर लगी है।

कोवैक्स ने दो अरब डोज की सप्लाई सुनिश्चित की है। कोवैक्स अब तक तीन करोड़ 20 लाख डोज की सप्लाई कर चुकी है। उधर, दुनिया की केवल 14% आबादी वाले अमीर देशों ने 53% वैक्सीन खरीद ली है। वहीं गरीब देशों के दस में से नौ लोगों को 2021 में वैक्सीन नहीं लग पाएगी। 10 अप्रैल तक दुनियाभर में वैक्सीन की एक अरब से अधिक डोज का उत्पादन हो जाएगा।

विशेषज्ञ आश्चर्यचकित हैं कि कोवैक्स से जुड़ी समस्याओं के बावजूद अमीर देश सीरम इंस्टीट्यूट से एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लेने की कोशिश में लगे हैं। ब्रिटेन पहले ही 45 लाख डोज ले चुका है। उसने 55 लाख और डोज लेने के लिए एक दूत भारत भेजा है। यूरोपियन यूनियन भी वैक्सीन लेने का प्रयास कर रही है। अर्जेटीना, ब्राजील, म्यांमार, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका एक करोड़ 20 लाख डोज ले चुके हैं। कनाडा ने पांच लाख और संयुक्त अरब अमीरात ने दो लाख डोज हासिल की हैं। मौजूदा स्थिति में कोवैक्स इस वर्ष अपने सदस्यों को उनकी डोज की केवल 27% सप्लाई कर सकेगा।

गरीबों का सहारा कोवैक्स
​​​​​​​​​​​​​​फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन महंगी हैं। बहुत कम तापमान पर स्टोर करने के कारण इनका वितरण भी कठिन है। इसलिए गरीब देशों के लिए कोवैक्स ही मुख्य सहारा है। कोवैक्स ने भारत की सीरम इंस्टीट्यूट और दक्षिण कोरिया के एक निर्माता से सप्लाई का करार किया है। कोवैक्स देश नोवावैक्स और जॉनसन एंड जॉनसन से भी वैक्सीन लेना चाहते हैं। दोनों वैक्सीन सस्ती हैं।

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