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  • Opening Avenues For Treatment Of Malaria, Cancer, Serious Heart Diseases; Their Medicines And Vaccines Will Be Made 28 March 2021

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नई रिसर्च:मलेरिया, कैंसर, दिल की गंभीर बीमारियों के इलाज का रास्ता खुला; इनकी दवाएं और वैक्सीन बनेंगी

2 महीने पहले
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  • कोरोना वैक्सीन बनाने की बायोटेक्नोलॉजी से मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव
  • कई लाइलाज बीमारियों का इलाज संभव होने के कारण दवा निर्माण के पुराने तरीके बदलेंगे

सबसे पहले किसी वायरस की संरचना-जीनोम की खोज 1976 में हुई थी। बेल्जियम की एक लेबोरेटरी में दस साल तक वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत के बाद वायरस एमएस2 में 3569 आरएनए पाए गए थे। इससे लगभग नौ गुना बड़े कोविड-19 फैलाने वाले सार्स-सीओवी-2 जीनोम का पता कुछ सप्ताह में लग गया । महामारी ने मेडिकल साइंस में तेज हलचल पैदा की है। कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया ने कई तरह के कैंसर के इलाज को आसान बनाया है। दिल, दिमाग, किडनी, लीवर, नर्वस सिस्टम की बीमारियां आने वाले दिनों में लाइलाज नहीं रहेंगी।

कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने का मुख्य आधार चिकित्सा विज्ञान में जेनेटिक्स के उपयोग से जुड़ा है। यह तरीका मानवों को बीमारियों से प्राकृतिक सुरक्षा दिलाएगा। जेनेटिक्स के राज खोलने की रिसर्च में बहुत तेजी से तरक्की हुई है।

वैक्सीन की टेक्नोलॉजी पर गौर कीजिए। अमेरिका की मॉडर्ना और जर्मनी की बायोएनटेक दवा कंपनियां कई वर्ष से राइबोन्यूक्लिक एसिड(आरएनए) पर रिसर्च कर रही थीं। टेक्नोलॉजी के तहत शरीर की कोशिकाओं को इम्यून सिस्टम मजबूत बनाने वाले प्रोटीन के निर्माण का निर्देश दिया जाता है। यह प्रोटीन वायरस से लड़ने में मदद करता है। वायरस को पहचानकर उसके खिलाफ बचाव का सिस्टम बनाता है। इस सिद्धांत की सफलता का सबूत मिलने के बाद आरएनए रिसर्च में जुटी कंपनियों को अब फायदा होगा। किसी भी बीमारी के खिलाफ आरएनए वैक्सीन जेनेटिक भाषा में लिखा एक संदेश है। इस तरह कोविड-19 के समान मलेरिया या कुछ प्रकार के कैंसर के खिलाफ वैक्सीन बनाई जा सकेगी। मानव की जैविक संरचना से जुड़ी दुर्लभ गड़बड़ियों का इलाज आसान होगा। बायोटेक्नोलॉजी में नई खोजों के कारण कई लाइलाज बीमारियों का इलाज संभव हो सकेगा। इससे दवा कंपनियों को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी।

नई टेक्नोलॉजी से बनी वैक्सीन कई बीमारियों पर कारगर
आरएनए वैक्सीन ऐसी सभी बीमारियों के इलाज में काम आ सकती हैं जिन पर कोई अन्य तरीके कारगर साबित नहीं हुए हैं। मॉडर्ना और बायोएनटेक ने कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर मैसेंजर आरएनए सीक्वेंस (स्पाइक प्रोटीन के कण) का निर्माण किया है। ये कण वायरस की बाहरी परत पर लगे रहते हैं। आरएनए कण मरीज के शरीर में इंजेक्शन से डाले जाते हैं। इम्यून सिस्टम वैक्सीन के जरिये शरीर में बनने वाली स्पाइक प्रोटीन को पहचानना सीख जाता है। इस तरह वह किसी वायरस या संक्रमित कोशिका की सतह पर आए ऐसे ही प्रोटीन को पहचानकर बचाव करता है।

कई दवाइयों का ट्रायल
कैंसर, दिल की बीमारियों,अल्जाइमर, पार्किंसंस जैसी बुढ़ापे की बीमारियों, विरासत में मिली दिमाग की बीमारियों के लिए आरएनए आधारित दवाइयों का ट्रायल शुरू हो गया है। मॉडर्ना हरपीस वायरस, सांस की बीमारियां फैलाने वाले वायरस और मच्छर से होने वाली बीमारी जिका के लिए वैक्सीन बना रही है।

क्या है आरएनए व सीक्वेंसिंग
किसी भी प्राणी की जीवित कोशिकाओं में पाए जाने वाले अणु को डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (डीएनए) कहते हैं। इनका क्रम बनाने की प्रक्रिया सीक्वेंसिंग कहलाती है। जीवन के अब तक ज्ञात जितने भी स्वरूप हैं उनके तीन प्रमुख जैविक सूक्ष्म कणों में आरएनए (राइबोन्यूक्लिक एसिड) एक है। बाकी दो स्वरूप हैं डीएनए और प्रोटीन।

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