पाकिस्तान भंवर में:तालिबान की जीत से पाकिस्तान की आर्थिक और कूटनीतिक समस्याएं कम नहीं होंगी

15 दिन पहले
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  • अमेरिका और पश्चिमी देश कई कारणों से नाराज

30 अगस्त को काबुल से आखिरी अमेरिकी सैनिक की वापसी से अफगानिस्तान में बीस साल के अभियान का अंत होने के साथ पाकिस्तान पर पश्चिमी देशों की निर्भरता भी खत्म हो गई है। तालिबान की जीत से पाकिस्तान के लिए कई मोर्चे पर समस्याएं खड़ी होंगी। अमेरिका और सहयोगी देशों के पाकिस्तान से नाराज होने के कई कारण हैं।

पाकिस्तान पश्चिमी देशों के अब महत्वपूर्ण सहयोगी बन चुके भारत से लगातार उलझता रहता है। उसके चीन से नजदीकी रिश्ते हैं। वह कई मुस्लिम आतंकवादियों का गढ़ है। अमेरिका की योजनाओं में परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका नहीं है लेकिन वह अब भी महत्वपूर्ण और चिंता पैदा करने वाला देश है। वहां शरण लेने वाले मुसलमान आतंकवादी दुनियाभर में आतंकवादी हमलों में लिप्त हैं। चीन और भारत के बीच संबंधों को पेचीदा बनाने की क्षमता के कारण पाकिस्तान की अनदेखी नहीं की जा सकती है।

अफगानिस्तान में पाकिस्तान के सहयोगी तालिबान जीत गए हैं, पर वह कठिन स्थिति में है। फौजी जनरल जानते हैं कि पश्चिमी देश आलोचना तो करते हैं पर संकुचित स्वार्थों के कारण उनसे सहयोग की गुंजाइश बाकी है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दो शिखर वार्ता कर चुके हैं लेकिन उन्होंने पाक प्रधानमंत्री इमरान खान को व्हाइट हाउस आमंत्रित करने की बात तो छोड़िए फोन पर बात तक नहीं की है। इससे पाकिस्तान के प्रति अमेरिका के रुख को समझा जा सकता है।

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