सैटेलाइट:धरती की निचली कक्षा में सैटेलाइट की भीड़ से समस्या

2 महीने पहले
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  • 2040 तक स्पेस इकोनॉमी 74 लाख करोड़ रु. की होगी

24 मई 2019 को स्पेसएक्स कंपनी के फाल्कन 9 रॉकेट ने धरती की निचली कक्षा में 60 संचार उपग्रह छोड़े थे। उस शाम लग रहा था कि सूर्य के प्रकाश से जगमगाती लड़ी आसमान में घूम रही है। खगोलशास्त्रियों के लिए यह दृश्य चिंता पैदा करने वाला था। इससे पहले धरती की निचली कक्षा में सैटेलाइट फोन कंपनी इरिडियम के 70 सैटेलाइट घूम रहे थे। स्पेसएक्स ने एक साथ 60 सैटेलाइट छोड़कर लगभग उसकी बराबरी कर ली थी। दुनियाभर में तेज इंटरनेट सेवाओं के लिए कंपनी की योजना 12 हजार सैटेलाइट छोड़ने की है।

रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड्स के इस्तेमाल का नियमन करने वाली इंटरनेशनल कम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) के पास दर्ज जानकारी के अनुसार 2030 तक पृथ्वी की निचली कक्षा में एक लाख कम्युनिकेशन सैटेलाइट लॉन्च किए जा सकते हैं।

ब्रिटिश सरकार की फर्म वन वेब ने 6400 सैटेलाइट भेजने की जानकारी अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशन को दी है। चीन ने आईटीयू को 13 हजार सैटेलाइट लॉन्च करने की सूचना दी है। वनवेब के फाउंडर ग्रेग वाइलर ने रवांडा स्पेस एजेंसी के साथ मिलकर तीन लाख 27 हजार कम्युनिकेशन सैटेलाइट भेजने की सूचना आईटीयू को दी है। मोर्गन स्टेनले बैंक का अनुमान है कि 2040 तक ग्लोबल स्पेस अर्थव्यवस्था 74 लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी।

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