द इकोनॉमिस्ट:पढ़िए, द इकोनॉमिस्ट की चुनिंदा स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

6 दिन पहले
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1. 2007-08 के वित्तीय संकट के बाद दुनिया की अर्थव्यवस्था खर्च की कमी से जूझ रही थी। पर अब बेतहाशा खर्च हो रहा है। मांग इतनी है कि चीजों की सप्लाई नहीं हो पा रही है। ट्रक ड्राइवरों को बोनस दिया जा रहा है, बंदरगाहों में सामान से लदे जहाज खड़े हैं। तेल,गैस के मूल्य ऊंचाइयों पर हैं। इसका मुख्य कारण कोविड-19 महामारी है। क्यों लोग सामान्य से ज्यादा खर्च कर रहे हैं, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

77 लाख करोड़ रुपए के पैकेज से कंज्यूमर खर्च उफान पर, लोग सामान्य से अधिक खर्च कर रहे

2. 30 अगस्त को काबुल से आखिरी अमेरिकी सैनिक की वापसी से अफगानिस्तान में बीस साल के अभियान का अंत होने के साथ पाकिस्तान पर पश्चिमी देशों की निर्भरता भी खत्म हो गई है। तालिबान की जीत से पाकिस्तान के लिए कई मोर्चे पर समस्याएं खड़ी होंगी। अमेरिका और सहयोगी देशों के पाकिस्तान से नाराज होने के कई कारण हैं। क्योंकि तालिबान से नजदीकी पाकिस्तान के लिए भंवरजाल की तरह है, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

तालिबान की जीत से पाकिस्तान की आर्थिक और कूटनीतिक समस्याएं कम नहीं होंगी

3. कई देशों में स्कूलों में नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। इसलिए महीनों स्कूल बंद होने के नुकसान अब सामने आने लगे हैं। कंसल्टेंसी मेकिंसे के अनुसार अमेरिका में प्रायमरी स्कूलों के बच्चे गणित में पांच माह और रीडिंग में चार माह पिछड़ गए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है, कोरोना संकट से यह ट्रेंड और अधिक बढ़ेगा। क्या कारण है इसके पीछे, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

दुनियाभर में ट्यूशन बढ़ी, जापान में 90 फीसदी बच्चे इसके दायरे में

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