द इकोनॉमिस्ट:पढ़िए, द इकोनॉमिस्ट की चुनिंदा स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

18 दिन पहले
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1. दुनियाभर में सरकारों ने कोरोना वायरस महामारी पर 126 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं। यह कुल वैश्विक जीडीपी का 16% है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार 2026 में हर बड़े देश के जीडीपी में सरकार खर्च की हिस्सेदारी अधिक होगी। अमेरिका कल्याणकारी कार्यों पर 13 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च करेगा। ये राजनेताओं और अफसरशाही की ताकत का लगातार विस्तार क्यों है, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

सरकारों ने महामारी पर 126 लाख करोड़ रु. खर्च किए; हर क्षेत्र में उनका दखल बढ़ेगा

2. ब्रिटेन में कंजरवेटिव पार्टी के मुकाबले लेबर पार्टी को अब भी ब्रिटिश भारतीयों का समर्थन दस प्रतिशत अधिक है, लेकिन इधर लेबर पार्टी की ऐतिहासिक बढ़त में सेंध लगी है। 18 नवंबर को जारी कार्नेगी एनडोमेंट और जॉन्स हॉपकिंस एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज स्कूल की स्टडी के अनुसार तीसरी पार्टियों से जुड़े या किसी का समर्थन न करने वाले ब्रिटिश भारतीयों की संख्या बढ़ रही है। क्या कहता है सर्वे, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

ब्रिटेन में भारतीय मूल के वोटरों का महत्व बढ़ रहा

3. साइंस फिक्शन लेखक नील स्टीफेंसन ने 1992 में साइबर दुनिया से संबंधित उपन्यास-स्नो क्रेश में टेक्नोलॉजी के नए रूप के लिए मेटावर्स शब्द का उपयोग किया था। फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबर्ग ने 28 अक्टूबर को अपना फोकस नई टेक्नोलॉजी की ओर दर्शाने के लिए कंपनी का नाम मेटा कर दिया है। माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया ने भी मेटावर्स को अपनाने का इरादा जताया है। क्या बदल रहा है इंटरनेट का भविष्य, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

वीडियो गेम इंडस्ट्री भी मेटावर्स टेक्नोलॉजी की ओर तेजी से बढ़ी

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