द इकोनॉमिस्ट:पढ़िए, द इकोनॉमिस्ट की चुनिंदा स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर

2 महीने पहले
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1. जानकारी के खुले स्रोत के युग ने नई आशा जगाई है। नए सेंसर,कैमरे और सेटेलाइट धरती के चप्पे-चप्पे पर बारीकी से नजर रखते हैं। बुद्धिजीवियों, एक्टिविस्ट ऑनलाइन कम्युनिटी और स्लेक जैसे माध्यमों ने शौकिया लोगों और विशेषज्ञों के सामने जानकारी का खजाना पेश किया है। रूस द्वारा मलेशियाई यात्री विमान गिराने का राज भी जनता के इंटेलीजेंस ने किया है। शोधकर्ताओं, स्वयंसेवी संगठनों द्वारा खोले गए ऐसे कई रहस्य, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

जनता के खुफिया तंत्र ने उम्मीदें जगाईं; चीन, रूस सहित कई देशों के गलत कारनामों का खुलासा

2. बिटकॉइन का मू्ल्य अप्रैल में 47 लाख रुपए से घटकर मई में 22 लाख रुपए रह गया था। आज यह 29 लाख रुपए के आसपास है। क्रिप्टोकरेंसी के बाजारों में जबर्दस्त उथल पुथल मची है। इससे डिजिटल करेंसी के ध्वस्त होने की आंशकाओं ने जन्म लिया है। एकसाल पहले वेबसाइट कॉइनमार्केटकैप पर 6000 करेंसी लिस्टेड थी। आज 11145 हैं। उनका कुल मार्केट पूंजीकरण 2.44 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर आज 11.86 लाख करोड़ रुपए हो गया है। क्यों मची हुई है उथलपुथल, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

तीन माह में बिटकॉइन के मूल्य में 18 लाख रुपए की गिरावट, उतार-चढ़ाव तेज होने से डिजिटल मुद्रा के ध्वस्त होने का खतरा बढ़ रहा

3. डीएनए सीक्वेंसिंग टेक्नोलॉजी और आधुनिक मशीन लर्निंग से अब जानना संभव हो गया है कि वायरस के कौन से वैरिएंट सक्रिय हैं। उनके कितना बदलने की संभावना है। आने वाले महीनों और वर्षों में वायरस के नए स्वरूप को समझकर उसके हिसाब से वैक्सीन और इलाज के तरीके विकसित किए जा सकेंगे। वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को म्यूटेशनल स्कैनिंग नाम दिया है। कितने जल्दी वैक्सीन बनाना संभव होगा, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख...

वायरस फैलने से पहले ही वैक्सीन बनाना संभव होगा, वैज्ञानिकों ने तकनीक को नाम दिया म्यूटेशनल स्कैनिंग

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