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  • Supply Of More Than 5 Billion Doses Of Vaccine This Year, Russia And China Want To Increase Their Influence With The Help Of Vaccine 9 January 2021

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प्रभुत्व की लड़ाई बनती कोरोना:इस साल वैक्सीन की 5 अरब से अधिक डोज की सप्लाई, रूस और चीन वैक्सीन के सहारे अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं

4 महीने पहले
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  • 2021 में कई देशों में वायरस के इलाज की कमी महसूस होगी

दिन गुजरने के साथ कोरोना वायरस वैक्सीन लगवाने के प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ रही है। ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में वायरस के दो नए स्ट्रेन ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाई है। दोनों स्ट्रेन अधिक जानलेवा नहीं हैं पर तेजी से फैलते हैं। इसका इलाज वैक्सीन में है। हालांकि 2021 में वैक्सीन की कमी महसूस की जाएगी। यह अरबों लोगों की पहुंच से दूर होगी। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस साल वैक्सीन के पांच अरब से अधिक डोज लोगों के लिए उपलब्ध होंगे।

वैक्सीन के संबंध में सरकारों की भूमिका पर लोगों की नजर है। 5 जनवरी तक इजरायल में 16%आबादी को वैक्सीन लग चुकी थी। फ्रांस में केवल 0.1 % और स्पेन में 6 % लोगों का वैक्सीन लगी थी। नीदरलैंड्स में अभी हाल शुरुआत हुई है। 7 जनवरी तक अमेरिका में केंद्र सरकार एक करोड़ 73 लाख डोज की सप्लाई कर चुकी थी। केवल 53 लाख लोगों को वैक्सीन लगी है। इजरायल जैसे छोटे देश में बेहद ठंडी वैक्सीन को नष्ट हुए बिना यहां से वहां पहुंचाना आसान है। अमेरिका बहुत विशाल देश है। उसका स्वास्थ्य सिस्टम केंद्र और राज्यों के बीच विभाजित है। लेकिन,वैक्सीनेशन में देर के पीछे अक्षमता की भी भूमिका है।

देशों के पास तैयारी के लिए महीनों का समय था लेकिन इसे गंवा दिया गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार ने राज्यों को नया साल शुरू होने से कुछ समय पहले तक वैक्सीनेशन की तैयारियों के लिए पर्याप्त पैसा नहीं दिया था। फ्रांस में वैक्सीन का बहुत अधिक विरोध है। वहां अधिकारियों ने कार्रवाई करने की बजाय लोगों की सहमति पर फोकस किया है। नए साल की छुटि्टयों के कारण कुछ स्थानों में वैक्सीनेशन रोक दिया गया।

वैक्सीन लगाने की तैयारियों के बावजूद सवाल उठता है कि कितनी वैक्सीन उपलब्ध है। फाइजर, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका 2021 तक पांच अरब से थोड़ी अधिक डोज मुहैया करा सकते हैं। यह ढाई अरब लोगों के लिए पर्याप्त होगी। रूस की स्पूतनिक की एक अरब से अधिक डोज मिल सकती हैं। चीन की भी दो वैक्सीन हैं। दोनों देशों ने अपनी वैज्ञानिक सक्षमता दर्शाने के लिए वैक्सीन उपलब्ध कराने की पेशकश की है। यदि वैक्सीन को सरकारों ने स्वीकृति नहीं दी तो बहुत लोग उन पर भरोसा नहीं करेंगे। अर्जेंटीना में स्पूतनिक वी वैक्सीन पहुंच गई है पर उसे मंजूरी का इंतजार है। अगर उचित ट्रायल के बिना वैक्सीन को मंजूरी मिलेगी जैसा कि भारत में भारत बायोटेक की वैक्सीन के साथ हुआ है तो भी लोग उस पर विश्वास नहीं करेंगे।

सही वितरण से ज्यादा लोगों की जान बचेगी
वैक्सीनेशन से दुनिया के मिल-जुलकर खतरों का सामना करने की स्थिति की परीक्षा होगी। कई विकासशील देशों ने वैक्सीन के ट्रायल किए हैं। कुछ देश मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए वैक्सीन बना रहे हैं। मॉडलिंग से पता लगा है कि केवल अमीर देशों पर ध्यान देने की बजाय जरूरत के अनुसार दुनियाभर में वैक्सीन के वितरण से डेढ़ गुना अधिक लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। वायरस का जितना अधिक प्रसार होगा, उसके स्वरूप में उतना ही बदलाव होगा।

दूसरी डोज में देर पर विवाद
वैक्सीन की सप्लाई बढ़ाने का एक अन्य तरीका बड़ी संख्या में पहली डोज लगाने का है। दूसरी डोज में देर कर दी गई है। ब्रिटेन, डेनमार्क ने ऐसा किया है और जर्मनी भी ऐसा कर सकता है। आलोचकों की दलील है, दूसरी डोज में देर करने से वैक्सीन कम असरकारक रहेगी। लोगों का उस पर भरोसा कम होगा। आंशिक तौर पर सुरक्षित लोगों से संपर्क होने के कारण वायरस प्रतिरोध की क्षमता हासिल कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एेसे सबूत मिलने तक विभिन्न देशों को दूसरी डोज देने में विलंब ना करने की अपील की है।

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