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  • The Price Of Bitcoin Fell By Rs 18 Lakh In Three Months, The Risk Of Collapse Of The Digital Currency Is Increasing Due To Intensifying Volatility 8 August 2021

बिटकॉइन का बुलबुला:तीन माह में बिटकॉइन के मूल्य में 18 लाख रुपए की गिरावट, उतार-चढ़ाव तेज होने से डिजिटल मुद्रा के ध्वस्त होने का खतरा बढ़ रहा

3 महीने पहले
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डिजिटल या आभासी मुद्रा-क्रिप्टोकरेंसी का विस्तार आश्चर्यजनक है। एकसाल पहले वेबसाइट कॉइनमार्केटकैप पर 6000 करेंसी लिस्टेड थी। आज 11145 हैं। उनका कुल मार्केट पूंजीकरण 2.44 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर आज 11.86 लाख करोड़ रुपए हो गया है। डिजिटल करेंसी की 63% ट्रेडिंग संस्थाएं और कंपनियां कर रही हैं। इसके बावजूद क्रिप्टोकरेंसी के बाजारों में जबर्दस्त उथल पुथल मची है। इससे डिजिटल करेंसी के ध्वस्त होने की आंशकाओं ने जन्म लिया है।

बिटकॉइन का मू्ल्य अप्रैल में 47 लाख रुपए से घटकर मई में 22 लाख रुपए रह गया था। आज यह 29 लाख रुपए के आसपास है। 29 जुलाई को तो बिटकॉइन का बाजार मूल्य 21 लाख रुपए पर आ गया था। हर गिरावट से सवाल उठता है कि गिरावट कितनी बदतर हो सकती है। क्रिप्टोकरेंसी में दांव पर बहुत कुछ लगा है। बिटकॉइन की गिरावट पर ट्रेडर्स भारी लेनदेन कर रहे हैं। करेंसी के धराशायी होने पर क्रिप्टो अर्थव्यवस्था बैठ जाएगी। डिजिटल रूप से बिटकॉइन बनाने वाले माइनर्स को नए कॉइन दिए जाते हैं। यदि मुद्रा में भारी गिरावट आएगी तो वे कॉइन बनाना बंद कर देंगे। निवेशक भी बाकी अन्य क्रिप्टोकरेंसी से छुटकारा पा लेंगे। डेटा फर्म चेन एनालिसिस के फिलिप ग्रेडवैल का कहना है, ताजा हलचल ने दर्शाया है कि बाकी डिजिटल करेंसी भी बिटकॉइन का अनुसरण करेंगी।

बिटकॉइन के पतन से बहुत नुकसान होगा। इसमें हेजफंड, यूनिवर्सिटी के धर्मादा फंड, म्युचुअल फंड और कुछ कंपनियों सहित अधिकतर संस्थागत निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ेगा। डिजिटल करेंसी के ध्वस्त होने से क्रिप्टो एक्सचेंजों और क्रिप्टो कंपनियों को घाटा होगा।

14 लाख करोड़ रुपए का नुकसान संभव
बिटकॉइन के पूरी तरह ध्वस्त होने से बहुत नुकसान हो सकता है। क्रिप्टोकरेंसी को पहले झटके से 14.82 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। गिरावट का प्रभाव कई चैनलों से अन्य एसेट्स पर पड़ेगा। बिटकॉइन में निवेश किया गया 90% पैसा डेरिवेटिव्स में लगाया गया है। इनमें से अधिकतर की ट्रेडिंग एफटीएक्स, बिनांस जैसे नियमन के दायरे से बाहर रहने वाले एक्सचेंजों से होती है। थोड़े से उतार-चढ़ाव का व्यापक असर होगा। एक्सचेंजों को भारी घाटा उठाना पड़ेगा।

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