रूस और चीन से खतरा:वैश्विक भूमिका से अमेरिका पीछे हटा तो दुनिया में अस्थिरता का खतरा बढ़ेगा

8 महीने पहले
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  • चीन, रूस जैसे देशों से उदार वैश्विक व्यवस्था को खतरा

दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी के नेतृत्व में स्थापित उदारवादी वैश्विक व्यवस्था के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। अमेरिका ने सैनिक ताकत का उपयोग अपने छोटे सहयोगी देशों की कीमत पर व्यावसायिक फायदा उठाने के लिए नहीं किया। दुर्भाग्य से उदार व्यवस्था की गारंटी देने वाले देश की भूमिका से अब अमेरिका थक रहा है। दुश्मन उसकी परीक्षा ले रहे हैं। चीन और रूस उदार वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा बन चुके हैं।

रुसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन यूक्रेन की सीमा पर फौजों का जमावड़ा कर रहे हैं। यूक्रेन पर जल्द हमला हो सकता है। चीन अपने लड़ाकू विमानों से ताइवान की हवाई सीमा में घुसपैठ कर रहा है। ईरान ने परमाणु वार्ता में कड़ा रुख अपनाया है। विशेषज्ञ पूछते हैं,ऐसी मनमानी रोकने के लिए अमेरिका किस हद तक जा सकता है। राष्ट्रपति जो बाइडेन कई बार सख्ती दिखाते हैं। उन्होेंने 7 दिसंबर को पुतिन को यूक्रेन पर हमला करने की स्थिति में गंभीर नतीजों की चेतावनी दी है।

ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध जारी रखे हैं। बाइडेन ने अक्टूबर में कहा था कि अमेरिका ने ताइवान की रक्षा का वचन दिया है। उनके सहायक कहते हैं, इस नीति में बदलाव नहीं हुआ है। 7 दिसंबर को अमेरिकी संसद के प्रतिनिधि सदन ने प्रतिरक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की है।

बाइडेन के संकेतों के बावजूद अमेरिका विश्व में ताकत का इस्तेमाल करने में दिलचस्पी नहीं रखता है। वाशिंगटन में शांति और उग्र नीति के पक्षधर गुट संयम बरतने की अपील करते हैं। शांति के समर्थकों का कहना है, दुनियाभर में पुलिसमैन की भूमिका निभाने से अमेरिका विदेशों में ऐसे गैरजरूरी टकरावों में फंसता है जिनमें विजय नहीं पाई जा सकती है। उग्र गुट का तर्क है, अमेरिका को चीन का मुकाबला करने के मुख्य काम से ध्यान हटाने की जरूरत नहीं है। दोनों विकल्पों में अमेरिका के थोड़ा पीछे हटने का विचार है। इससे दुनिया अधिक खतरनाक और अस्थिर हो जाएगी।

अमेरिका अब कई मुद्दों पर विभाजित दिखता है

इराक, अफगानिस्तान में लंबे युद्ध के बाद अमेरिकी वोटर विदेशी अभियानों से ऊब चुके हैं। राजनीतिक विभाजन से नीतियां ठप हो रही हैं। अमेरिका ने एशिया में उसके फौजी और आर्थिक गठजोड़ को मजबूत बनाने वाले व्यापार समझौते में शामिल होने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रपति चुनाव में विवाद और मास्क पहनने जैसे मामलों में विवाद से अमेरिका देश में बहुत अधिक विभाजित लगता है।

90 से ज्यादा अमेरिकी राजदूतों के पद खाली पड़े हैं। अमेरिकी संसद ने इन्हें रोक रखा है। इससे अमेरिका की विश्व में पकड़ घटी है।

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