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  • The System Of Transactions Is Changing In The World, The Value Of Crypto Assets Is Rs 184 Lakh Crore 19 September 2021

करेंसी का भविष्य:दुनिया में लेनदेन का सिस्टम बदल रहा, 184 लाख करोड़ रुपए हुआ क्रिप्टो संपत्ति का मूल्य

4 महीने पहले
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  • फाइनेंस की नई व्यवस्था में कई खामियां पर उसका तेजी से विस्तार

डिजिटल पैसा यानी क्रिप्टोकरेंसी के आलोचकों की कमी नहीं है। उन्हें इसका विरोध करने के मौके भी खूब मिलते हैं। मूल क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन का इस्तेमाल नशीली ड्रग्स की खरीद के लिए होता था। अब साइबर हैकर फिरौती की रकम क्रिप्टो में दिन की मांग करते हैं। हैकर एक अन्य डिजिटल करेंसी ईथर के करोड़ों डॉलर की चोरी इस साल कर चुके हैं। फिर भी, क्रिप्टो संपत्ति का बुखार दुनिया पर चढ़ रहा है। इसका मूल्य 184 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। आलोचकों और ठगों की हलचल के बावजूद वित्तीय सेवाओं के विकेंद्रीकरण (डेफि-डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस) का नया सिस्टम आकार ले रहा है। वैसे, सिस्टम के साथ कुछ खामियां भी हैं। इसका दुरुपयोग हो सकता है।

इस समय फाइनेंस सेक्टर को जिन तीन टेक्नोलॉजिकल ट्रेंड ने प्रभावित किया है,उनमें डेफि शामिल है। टेक्नोलॉजी कंपनियां पेमेंट और बैंकों पर असर डाल रही हैं। सरकारें डिजिटल करेंसी या गवकॉइंस लांच कर रही हैं। डेफि ने वैकल्पिक रास्ता पेश किया है जिसका लक्ष्य केंद्रीकरण नहीं बल्कि फैलाव का है। क्रिप्टोकरेंसी के मूल तत्व ब्लॉकचेन को देखिए। कंप्यूटरों का विराट नेटवर्क खुला और साफ-सुथरा रिकॉर्ड रखता है। किसी केंद्रीय प्राधिकरण या व्यवस्था के बिना इसको अपडेट कर सकते हैं।

2009 में बनी पहली बड़ी ब्लॉकचेन बिटकॉइन अब कमजोर पड़ चुकी है। उसकी बजाय 2015 में बना ब्लॉकचेन नेटवर्क एथीरम अधिक लोगों के बीच पहुंच रहा है। परंपरागत बैंकिंग के लिए भारी-भरकम ढांचे, पूंजी के नियम-कायदों और अदालतों की जरूरत पड़ती है। यह खर्चीला है। सिस्टम पर अंदरूनी लोगों का कब्जा है। इसकी तुलना में ब्लॉकचेन विश्वसनीय, सस्ता, पारदर्शी और तेज सिस्टम है। डेफि से शेयर बाजारों में ट्रेडिंग, कर्ज देना, पैसा जमा करना जैसी गतिविधियां हो सकती हैं।

क्रिप्टोकरेंसी से कुछ समस्याएं भी हैं। ब्लॉकचेन प्लेटफार्म आसानी से नहीं चलते हैं। वे जिन कंप्यूटर पर चलते हैं, उनमें बिजली की बहुत खपत होती है। यह भी सवाल है कैसे कोई आभासी या वर्चुअल अर्थव्यवस्था अपने नियम-कायदों के साथ वास्तविक दुनिया से घुल-मिल सकती है। परंपरागत पैसे और करेंसी के पीछे सरकारें और रिजर्व बैंक हैं।

डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस की दुनिया में जवाबदेही प्रारंभिक दौर में है। कई बड़े लेनदेन जिन्हें मानवीय हस्तक्षेप से रोकना संभव नहीं है, खतरनाक हो सकते हैं। कंप्यूटर कोडिंग में भूल होती ही है। एथीरम और बैंकिंग सिस्टम के बीच सेवाओं के बड़े क्षेत्र में पैसे का अवैध लेनदेन मनी लांडरिंग के जरिये चल रहा है। विकेंद्रीकरण के दावों के बावजूद कुछ प्रोग्रामर और एप मालिकों का डेफि सिस्टम पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण है। इसके अलावा बुरे इरादों वाला कोई व्यक्ति ब्ल़ॉकचेन चलाने वाले अधिकतर कंप्यूटरों पर कब्जा कर सकता है।

नए सिस्टम के एक करोड़ से अधिक यूजर हुए
नई करेंसी की गतिविधि को मापने का पैमाना डिजिटल लेनदेन के मूल्य से लगाया जा सकता है। लगभग शून्य से इसका मूल्य 2018 में 6.61 लाख करोड़ रुपए हो गया था। इस साल की दूसरी छमाही में इसका मूल्य 184 लाख करोड़ रुपए हो गया था। यह अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज नेस्डाक की गतिविधि के छठवें हिस्से और वीसा के जरिये लेन-देन के बराबर है। डेफि का विस्तार अधिक महत्वाकांक्षी क्षितिज पर हो रहा है। डेफि के वालेट मेटामास्क के एक करोड़ से अधिक यूजर हैं।

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