इंटरनेट का भविष्य:वीडियो गेम इंडस्ट्री भी मेटावर्स टेक्नोलॉजी की ओर तेजी से बढ़ी

18 दिन पहले
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साइंस फिक्शन लेखक नील स्टीफेंसन ने 1992 में साइबर दुनिया से संबंधित उपन्यास-स्नो क्रेश में टेक्नोलॉजी के नए रूप के लिए मेटावर्स शब्द का उपयोग किया था। लगभग तीन दशक बाद मेटावर्स सिलिकॉन वैली का अगला सबसे बड़ा पड़ाव है। ऑनलाइन 3-डी आभासी (वर्चुअल) वातावरण, ऑगमेंटेंड रियलिटी या बेहतर वास्तविकता को मिलाकर मेटावर्स टेक्नोलॉजी बनी है। यह अभी कई वीडियो गेम प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबर्ग ने 28 अक्टूबर को अपना फोकस नई टेक्नोलॉजी की ओर दर्शाने के लिए कंपनी का नाम मेटा कर दिया है।

माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया ने भी मेटावर्स को अपनाने का इरादा जताया है। मेटावर्स की संभावनाओं की झलक 8 नवंबर को मिली जब 20 करोड़ मासिक यूजर वाले ऑनलाइन गेम रोबलॉक्स ने अपने तिमाही नतीजों का एलान किया। उसके डेली यूजरों की संख्या एक साल में 31%और आय 3700 करोड़ रुपए बढ़ी है। वेंचर कैपिटलिस्ट मैथ्यू बॉल कहते हैं, रोबलॉक्स,मिनेक्राफ्ट, फोर्टनाइट, एनिमल क्रॉसिंग और वर्ल्ड ऑफ वॉरक्राफ्ट जैसे ऑनलाइन गेम वर्चुअल दुनिया के लोकप्रिय और फायदेमंद होने के सबूत हैं। मार्केट रिसर्च फर्म न्यूजू के अनुसार 2020 में कंज्यूमरों ने वीडियो गेम्स पर 13 लाख करोड़ रुपए खर्च किए है। न्यूजू का अनुमान है, इंडस्ट्री की 75% आय उन गेम्स से होती है जो खिलाड़ियों के कपड़े जैसे वर्चुअल गुड्स की बिक्री करते हैं। गेम प्लेयर अपने प्रोग्राम बनाकर बेच सकते हैं।

मेटावर्स के कुछ समर्थक मानते हैं, रोबलॉक्स, एपिक गेम्स और यूनिटी जैसी वीडियो गेम कंपनियां टेक्नोलॉजी कंपनियों को पीछे छोड़ सकती हैं। रोबलॉक्स गेम और प्लेटफॉर्म दोनों है। यह यूजरों को अपने प्रोग्राम बनाने और स्वयं के 3 डी गेम्स बेचने की सुविधा देता है। एक अन्य गेम एडॉप्ट मी में यूजर वर्चुअल जानवर बेच सकते हैं। वीडियो गेम फोर्टनाइट के वर्चुअल वर्ल्ड का इस्तेमाल म्यूजिक इंडस्ट्री कर रही है।

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