इंस्पायरिंग:नियमित नहीं हैं तो कहीं नहीं टिक पाएंगे, कंसिस्टेंसी ही शिखर पर बनाए रखती है - रोजर फेडरर

13 दिन पहले
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  • रोजर फेडरर 2023 मेट गाला होस्ट करेंगे। महान टेनिस प्लेयर को नए रोल में देखना अलग अनुभव होगा। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने करियर से जुड़ी कुछ बातें कही हैं, उन्हीं के चुनिंदा अंश...

‘मैं हमेशा खेलना चाहता हूं। मुझे कोर्ट से प्यार है, ट्रैवल से प्यार है, अच्छे खिलाड़ियों के साथ खेलने से प्यार है। मुझे कभी यह सब मुश्किल नहीं लगा। जीतना, हार के सबक सीखना... सब अच्छा लगा। मुझे मेरा करियर हर एंगल से अच्छा लगता है। रिटायरमेंट जरूर थोड़ा कड़वा रहा। मैं जानता हूं एक मुकाम पर आकर हर किसी को यह अपनाना ही होता है। गेम छोड़ना होता है। मेरा सफर कमाल का था और इसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं। करियर में जैसे-जैसे आप बढ़ते हैं, सीखते हैं। मुझे याद है कि करियर की शुरुआत में मैं जरा भी रेगुलर नहीं था। नियमित न होने के कारण मैं बदनाम था। वहां से दुनिया का सबसे कंसिस्टेंट खिलाड़ी बनकर उभरना मेरे लिए हैरानी भरा था। निजी तौर पर मेरे लिए यह बड़ी उपलब्धि है। लंबे समय तक नंबर एक खिलाड़ी बने रहना मेरे लिए खास रहा। मैंने इसका भरपूर आनंद लिया। मैं इतने लंबे समय तक टॉप पर रहा कि हर टूर्नामेंट में जाकर उम्मीद करता कि इसे मैं जीत सकता हूं। यह पूरे 15 साल चला। इसका श्रेय मेरे नियमित होने को जाता है। कंसिस्टेंसी ही सफलता की चाबी है। कोशिश करते रहें। पहले आपकी कोशिशें कंसिस्टेंट होंगी, फिर सफलता। माइकल शूमाकर, टाइगर वुड्स को मैं जब टॉप पर देखता था, तो सोचता था कैसे ये लोग इतने लंबे समय तक आगे रहे। सफलता मिलने पर आप महसूस करते हैं कि आप भी इसी ग्रुप का हिस्सा हैं, यह अद्भुत अहसास है।

मेहनत के अलावा सफलता तक कोई रास्ता नहीं जाता
- डरो किसी से नहीं, लेकिन सम्मान सभी के लिए हो।
- मेहनत के अलावा कोई रास्ता नहीं, इसे तुरंत अपनाइए।
- मैं हमेशा पॉजिटिव थिंकर रहा, और इसी ने हर मुश्किल में साथ दिया।
- प्लान लॉन्ग टर्म हो, गोल्स शॉर्ट टर्म हों, तभी आप मोटिवेटेड रह सकते हैं।
- बुरा नहीं लगे, इसके लिए आपको ही कोशिश करना होगी।

रिटायरमेंट के लिए दिमाग आपको बोलता है, अब ये कठिन है। आपको स्वीकारने में वक्त लगता है। फिर आप बोलते हैं- ओके... इसे छोड़ते हैं। इसे स्वीकारने में बुराई नहीं। हर अंत नई शुरुआत की उम्मीद होता है।’

खेल में एक जैसे नहीं रह सकते, हर कला आनी चाहिए
खेल या किसी भी काम में एक जैसा नहीं रहा जा सकता। मैं यकीन करता था कि अगर आप आक्रामक खेल खेलते हैं तो आपको रिएक्ट कम करना है। अगर आप हमेशा ही विरोधी को रिएक्ट करते रहेंगे तो खेल मुश्किल हो जाएगा। हर हफ्ते, हर साल, पूरी जिंदगी अगर आप भरपाई करते रहेंगे और गेंद के पीछे भागते रहेंगे, तो विरोधी आप से पार पा जाएंगे। आपको हर कला आनी चाहिए। महान खिलाड़ी हमेशा ऑफेंसिव और डिफेंसिव दोनों रहे हैं। अधिकतर मैं आक्रामक रहा लेकिन मुझे डिफेंस भी आता था।

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