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इंस्पायरिंग:पूरा ध्यान जीतने पर लगा देंगे तो सफर का मज़ा छूट जाएगा - विराट कोहली

5 दिन पहले
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  • ज़िंदगी में वास्तविक सफलता क्या है? बता रहे हैं विराट कोहली। विराट कोहली इन दिनों इंग्लैंड दौरे पर हैं और उनकी टीम ने टेस्ट सीरीज में 2-1 से बढ़त हासिल की। इस जीत में भी विराट की यही बातें आप महसूस कर सकते हैं...

हमारी तमन्ना हमेशा बड़े टूर्नामेंट जीतने की होती है। हम हमेशा अपना बेस्ट देने की कोशिश करते हैं। लेकिन अगर केवल सफल होने को ध्येय मानेंगे तो कभी भी प्रोसेस को एंजॉय नहीं कर पाएंगे। हम बतौर टीम उस प्रोसेस को जीना चाहते हैं, खूब मजे से खेलना चाहते हैं।

चाहे कितने भी मुश्किल हालात हों, हम लम्हों का आनंद लेते हैं। हम तो रोज ही खुद से कम्पीट करते हैं कि कैसे हम मुश्किल हालात में शांत रहकर अपना बेस्ट दे सकते हैं। हम कभी किसी मैच में दूसरों को गलत साबित करने नहीं उतरते, केवल अपना स्तर ऊंचा करने की कोशिश करते हैं। यह भी ध्यान रहता है कि आने वाली पीढ़ी के लिए सही उदाहरण पेश करें।

वैसे मैं बता दूं कि मुझे हारना कतई पसंद नहीं है। मैं खेल ही नहीं, कहीं भी हारना पसंद नहीं करता हूं। सारे खिलाड़ी इसी मिट्टी के बने होते हैं। हार के साथ कोई खिलाड़ी खुश नहीं रह सकता। आप इसे स्वीकारना वक्त के साथ सीखते हैं।

मैं जब खेलता हूं तो बस इस बात का ध्यान रखता हूं कि कोई गुंजाइश ना छूटे। मैं अपने जीवन में किसी तरह के अगर-मगर को जगह नहीं देता। मैच के बाद यह नहीं सोचता कि काश कैच के लिए कोशिश की होती। जब मैदान में उतरता हूं तो खुद को खुशकिस्मत समझता हूं और जब बाहर आ रहा होता हूं तो मेरा एनर्जी लेवल शून्य होता है और इसी के लिए मैं मैदान में भेजा गया था।

क्रिकेट से ज्यादा मेहनत 10वीं क्लास पास करने में की

गणित में मुझे 100 में से 3 नंबर मिलते थे। गणित के वो फॉर्मूले आज तक मेरे किसी काम नहीं आए जिन्होंने मेरी नींद उड़ा रखी थी। मेरा संबंध खेल से था, गणित से कभी खुद को जोड़ नहीं पाया। जैसे-तैसे दसवीं पास करना थी। मैंने कभी इतनी मेहनत क्रिकेट में नहीं की जितनी दसवीं पास करने में की। मैंने पास भी की... और फिर कभी गणित की ओर मुड़कर नहीं देखा। मेहनत ऐसी चीज है जो हर मुसीबत का हल है।

  • खुद पर भरोसा और कड़ी मेहनत हमेशा आपको सफलता अर्जित करके देंगे।
  • मुझे हमेशा आगे रहना और साथियों के लिए उदाहरण पेश करना पसंद है, जिम्मेदारी मुझे पसंद है और यह स्वाभाविक भी है।
  • मुझे दबाव में खेलना पसंद है। बल्कि, कोई दबाव नहीं है तो यह माहौल मुझे अनुकूल नहीं महसूस होता।

जिंदगी रोज बदल रही है, फिर आप क्यों एक जगह अटके रहेंगे
जब मैं छोटा था तो कोशिश करता था कि जैसा मैंने पहले किया है वैसा ही आगे भी करूं। मैं खुद को दोहराने की कोशिश करता था। लेकिन वक्त के साथ समझ आया कि इससे बात नहीं बनने वाली। जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं आपको समझ में आ जाता है कि माहौल के अनुसार खुद को ढालना ही सर्वोत्तम है। जिंदगी रोज बदल रही है, फिर आप क्यों एक जगह
अटके रहेंगे।’

(विभिन्न टीवी कार्यक्रमों में विराट कोहली)

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