इंस्पायरिंग:लाइफ के ‘सेट’ होने से भी ज्यादा जरूरी है लाइफ का ‘हैप्पी’ होना - जितेंद्र कुमार

14 दिन पहले
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  • यूट्यूब और ओटीटी प्लेटफॉर्म से नाम कमाने वाले जीतू भैया उर्फ जितेंद्र कुमार ने की तो आईआईटी से इंजीनियरिंग लेकिन मन हमेशा अटका रहा एक्टिंग में, उनका यह सफर उन्हीं की जुबानी...

‘मैं सामान्य था, हूं और रहूंगा। मैं वैसा ही हूं जैसे जेईई के लिए तैयारी करने वाले लड़के होते हैं, वो कोटा जाते हैं, या कहीं और तैयारी करते हैं। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं कभी एक्टिंग करूंगा। मेरी लाइफ का जो गेम चेंज हुआ, वो आईआईटी में हुआ... और ऐसा इसलिए हुआ कि मुझे शायद कभी आईआईटी की पढ़ाई समझ में नहीं आई। मेरी दिक्कत यह थी कि मैंने अपना जो जेईई दिया था, वो हिंदी में था। जैसे ही मैं आईआईटी में घुसा तो बस मुझ पर अंग्रेजी की बमबार्डिंग हो गई।

आईआईटी के प्रोफेसर मुझ पर अंग्रेजी के भारी-भारी शब्द फेंक रहे थे और मैं झेल रहा था। दो-चार महीने इस उम्मीद में गुजर गए कि सब ठीक होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। दोस्तों के कहने पर वहां ड्रामा सोसायटी जॉइन कर ली। कुछ साल ऐसे ही गुजर गए। पढ़ाई होने लगी थी। मेरे सीनियर थे, विश्वपति सरकार। हम साथ में प्ले करते थे। वो मुंबई में टीवीएफ प्रोडक्शन में इंटर्न करने आते थे। जब मैं सिविल इंजीनियर बन गया, तो उन्होंने मुझसे कहा कि तेरी जॉब तो लग नहीं रही है, तू मुंबई चल... एक्टिंग करना और मैं लिखूंगा। तो वो मुझे मुंबई ले आए।

यह जून 2012 की बात है। मैं ‘गरीब रथ’ ट्रेन से मुंबई पहुंचा और पहले ही दिन मेरा शूट था। मुझे ‘हर एक फ्रेंड जरूरी नहीं होता’ वीडियो शूट करना था। यह ठीक रहा। कुछ दिन बाद ‘मुन्ना जज्बाती’ शूट किया जो रिलीज ही नहीं हुआ, मैं निराश हो गया और बेंगलुरु जाकर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करने लगा।

कुछ महीने बाद पता नहीं कैसे यह रिलीज हुआ और वायरल हो गया। मुझे विश्वपति का कॉल आया कि आजा, तुझे लोग बुला रहे हैं...मैं तुरंत आ गया। शुरुआती दौर में जब कोई चीज काम नहीं करती थी, तो बेहद परेशान हो जाता था। तब सीनियर्स मुझे समझाते थे कि हर काम में वक्त लगता है, एक्टिंग में भी लगेगा। चीजें धीरे-धीरे ग्रो करेंगी। जैसे आपका निवेश धीरे-धीरे बढ़ता है, वैसे ही आपका काम भी धीरे-धीरे ग्रो करता है। इस दौरान आपको सब्र रखना है। वक्त दीजिए, फ्लो के साथ बने रहिए। जिंदगी आपको अच्छी जगह ही बहाकर ले जाएगी। बस, अपनी ताकत को पहचानना जरूरी है।

मुझे पता चल गया था कि एक्टिंग से मेरा कुछ तो लेना-देना है, इसलिए मैं खुद को यहां आजमाता रहा। जिस काम से आप जुड़ाव महसूस करें, उसे छोड़िए मत। करते रहिए।जीवन में सुरक्षा ही सबकुछ नहीं है। सुरक्षा का भाव आपकी उड़ान को सीमित कर देता है। लाइफ ‘सेट’ होना जरूरी नहीं है, लाइफ हैप्पी होना जरूरी है। मिडिल क्लास के लोग अगर बच्चों को आईआईटी भेजने में लगे रहते हैं तो उसके पीछे यही है। मैंने तो आईआईटी देखा है, महसूस किया है। आईआईटी ही नहीं... आर्ट भी देखिए, स्पोर्ट्स भी देखिए, म्यूजिक में भी करियर है। बहुत कुछ है करने को। आम लोग यह नहीं सोचते हैं। जो सोचा नहीं वो करेंगे कैसे! करेंगे नहीं, तो उड़ेंगे कैसे!’(बिट्स पिलानी समेत अन्य मंचों पर कही गई बातों से। ‘पंचायत 2’ को लेकर चर्चा में हैं।)

हारने वाला भी योद्धा..

- 21 दिन में कोई भी आदत लग जाती है और कोई भी छूट जाती है, यह कभी न भूलें।

- जो युद्ध में है वो वॉरियर है, हारने वाले भी और जीतने वाले भी।

- अगर आप क्लास में सबसे स्मार्ट हैं, तो निश्चित तौर पर गलत क्लास में हैं।

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