इंस्पायरिंग:जिंदगी इतनी सरल होनी चाहिए कि आपके पैशन और मूल्यों से कदम मिलाए - श्रीधर वेम्बू

20 दिन पहले
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  • श्रीधर खुद एक गांव में रहते हैं और वहीं से इतनी बड़ी कंपनी ऑपरेट करते हैं, उनकी बातें जो बताती हैं कि गांवों की और लौटना क्यों जरूरी है और क्यों जिंदगी सरलतम होना चाहिए...

‘बिजनेस, जिंदगी का ही हिस्सा है। बिजनेस को जिंदगी से अलग नहीं किया जा सकता। दोहरापन ही दिक्कत है। मैं अपनी जिंदगी को उस तरह व्यतीत करना चाहूंगा, जो मेरे पैशन और मूल्यों से लगातार कदमताल कर सके। उस जिंदगी में ग्रामीण विकास की अहम जगह है और उस इंसान तक अवसर पहुंचाने की भी, जो अभी मौकों से बहुत दूर बैठा है। काम के साथ देश की वास्तविक समस्याओं से निपटना और समाज पर सकारात्मक असर डालना बेहद अहम है। मैं चाहता हूं कि जितना कम हो सके उतना कम तनाव काम का लूं। जो लोग ज्यादा दबाव में काम करते हैं, वो सेहत से समझौता करते हैं। मैं मेरे और मेरे कर्मचारियों के लिए ऐसा माहौल नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि मेरे कर्मचारी भी गांवों में रहें ताकि विचारों का प्रचुरता से आदान-प्रदान हो। एक बार जब ज्यादा कमाई करने वाले लोग गांव पहुंचते हैं तो कई अच्छी और बुरी आदतें भी साथ पहुंचती हैं। हम अच्छी आदतों पर फोकस करें, तो लोगों को एक मार्गदर्शक मिलेगा, उन्हें कोचिंग मिलेगी। शहरी लोग, गांव वालों से सीखेंगे। ये अच्छा लेन-देन है।

अवसर पैदा करने पर सारा फोकस होना चाहिए
- कम्प्यूटर कभी चीजें नहीं खरीदते, लोग खरीदते हैं और उनके पास इन्हें लेने की एक वजह होती है।
- प्यार करने की अपनी क्षमता को कभी कम न होने दें।
- मैं पूंजी पर फोकस करता हूं मूल्यांकन पर नहीं।
- आप ग्राहक से लंबा रिश्ता बनाना चाहते हैं तो पैसा भूल जाइए, बस उनसे व्यवहार ठीक कीजिए।
- फोकस अवसर पैदा करने पर हो।
- कर्मचारियों से पारदर्शी रहिए, कंपनी के पास पैसा नहीं है तो उन्हें सबसे पहले बताइए।

जब आप गांव में रहते हैं, तो अनावश्यक तनाव अपने आप चले जाते हैं। जैसे कि मेरे पड़ोसी के पास फरारी है, या वो विदेश में छुट्टियां बिता रहा है। जीवन की सरलता आप समझते हैं। मैं हमेशा से कम चीजों में जीवन बिताने वाला रहा हूं। मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो नया फोन लॉन्च होते ही ले लेते हैं, मैं तो तब खरीदता हूं जब उसे आए दो-एक साल बीत चुके होते हैं और सब के पास वो होता है। मैं खुद से और मेरे लोगों से शहरों को ‘नहीं रहने लायक’ नहीं बनाना चाहता।

बदलाव मिडिल क्लास से नहीं, नीचे से शुरू होगा
भारतीय सिस्टम निर्माण पर आधारित है, जिसे बदलने की आवश्यकता है। हमें यह जानने की आवश्यकता नहीं है कि नेल कटर कैसे बनता है। स्कूल में और बिजनेस में इतनी बेसिक बातों पर जोर देने की आवश्यकता नहीं है। व्यावहारिकता जरूरी है। यह बदलाव मिडिल क्लास से नहीं आ सकता। बदलाव नीचे से शुरू होगा। जब कोई स्टार्टअप गांव के स्कूल में मुफ्त खाना, मुफ्त पढ़ाई देगा तो अपने आप लोगों का भरोसा व्यावहारिकता पर आ जाएगा।
(विभिन्न सोशल मीडिया इंटरव्यूज में जोहो के संस्थापक पद्मश्री श्रीधर वेम्बू)

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