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ग्रेट स्पीचेस:‘हमारा लोकतंत्र परफेक्ट नहीं है, पर सुधार अनुभवों से ही होगा’

8 दिन पहले
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  • अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति ट्रंप से लोकतंत्र खतरे में है। अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति रूसवेल्ट ने लोकतंत्र पर यादगार भाषण दिया था। उसे आज पढ़ना चाहिए ...

‘कल 55 मिलियन अमरीकी वोट करने की पात्रता रखते हैं, मुझे उम्मीद है कि पूरे 55 मिलियन कल वोट करेंगे। मुझे इन करोड़ों लोगों में नागरिक नज़र आते हैं, वो किसान जो अपनी पत्नियों के साथ दूर चलकर आएंगे और वोट करेंगे। रोज कमाने वाले मजदूर घर से काम पर जाते हुए या काम से घर लौटते हुए वोट करेंगे। बिज़नेस प्रोफेशनल्स, शहर और कस्बे की हाउसवाइफ्स, इनको साथ मिलेगा युवाओं का, जो शायद पहली बार वोट करेंगे।

हम अमरीकियों ने इतिहास में कई अच्छी चीजें की हैं लेकिन सिद्धांत एक ही रखा... पूर्ण बहुमत का सिद्धांत। इसी सिद्धांत को हम खुद से जोड़ते हैं और तभी हम सब ‘डेमोक्रेट्स’ हैं। दुनिया के कुछ हिस्सों में डेमोक्रेसी के खिलाफ एक लहर है। लेकिन हमारा विश्वास डिगा नहीं है। हम डेमोक्रेसी में पूरा भरोसा रखते हैं क्योंकि यही हमारे संस्कार हैं।

हर वो पुरुष, हर वो महिला जिसने भी पहले वोट दिया है, उसका हाथ अमेरिका का आज बनाने में है। जो भी महिला और पुरुष कल वोट करेंगे, उनका हाथ अमेरिका के भविष्य निर्माण में नज़र आएगा। वोट करने से इंकार करने का मतलब है - मैं संयुक्त राज्य अमेरिका के भविष्य में रुचि नहीं रखता हूं।

आजाद अमेरिका में रहने वाले हम लोग जानते हैं कि हमारी डेमोक्रेसी परफेक्ट नहीं है। लेकिन हम यह भी सीखना शुरू कर चुके हैं कि स्वशासन की तरह तमाम चीजों में प्रगति केवल अनुभव के साथ ही होती है। केवल जनादेश देने से ही लोग अच्छे नागरिक नहीं बन जाते। वो तो नागरिकता का अभ्यास करते हुए, चर्चा करते हुए, पढ़ते हुए अच्छे नागरिक बनते हैं।

लगभग डेढ़ सौ साल से हमारे यहां फ्री एजुकेशन है, प्रेस भी आजाद है, लोकमंच हैं... एक दशक से तो फ्री रेडियो भी है। 1936 के अमेरिकी नागरिक आजाद व्यवस्था की देन हैं। उनके दिमाग को आजादी के अनुभवों की धार ने तेज किया है। इस वजह से मुझे ना तो तानाशाहों के इरादों का डर है, ना दुर्जनों के नेताओं की धमकियों का। उन लोगों को कोई प्रभावित नहीं कर सकता, जो खुद के लिए सोचना सीख चुके हैं और अपनी सोच अनुसार कार्य करने की हिम्मत जुटा चुके हैं।

मैं उन लोगों की भी तारीफ करूंगा जो विपक्ष में रहे। उन्होंने भी जनता को असल मुद्दे समझाने में मदद की और यही डेमोक्रेसी की सेवा की। मैं आगे भी लोकतंत्र के लिए उनसे इसी सहयोग की अपेक्षा करता हूं। मैंने हाल ही में कहा था कि संयुक्त राज्य अमेरिका की भलाई के लिए उठे विचार में कड़वाहट और नफरत की कोई जगह नहीं है। यह सभी पार्टियों के पुरुष और महिलाओं पर लागू होता है।

जिसका भी चुनाव कल होगा वो सभी लोगों का राष्ट्रपति बनेगा। बिना भेदभाव किए, खुले दिमाग के साथ लोगों की समस्याओं को सुनना उसका सरोकार होगा। जब आप मतदान के लिए जाएं तो बिना डर के उसे वोट करें जिसे आप सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। पोलिंग बूथ में ना कोई बॉस है, ना कर्मचारी। वहां हम सब बराबर हैं।’

(2 नवंबर 1936 को प्रेसिडेंशियल कैम्पेन के अंतिम दौर में रेडियो पर अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी.रूसवेल्ट)

फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट - अमेरिका में सबसे अधिक समय तक राष्ट्रपति रहने वाले अकेले नेता। फ्रेंकलिन 1933 से 1945 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे। यानी चार कार्यकाल। 1951 में 22वां संशोधन पारित हुआ, जिसके तहत यह तय हुआ कि कोई भी शख्स दो से अधिक कार्यकल के लिए राष्ट्रपति नहीं बन सकता।

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