इंस्पायरिंग:प्रासंगिकता सबसे जरूरी, उसे बनाए रखना ही असली लड़ाई -  निखिल कामत

6 दिन पहले
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‘मैं बचपन से ही चेस में ठीक-ठाक रहा। पांच या छह की उम्र से इसे खेल रहा हूं। मेरा ध्यान उस दौर में चेस में रहा इसलिए कभी अच्छे नंबर नहीं आए। मुझे आज भी अफसोस है कि मुझे स्कूल बीच में ही छोड़ देना पड़ा। जब भी आप लोगों से मिलो तो वो अपने अच्छे समय के बारे में बात करते हैं, अपने स्कूल और कॉलेज के दोस्तों के बारे में बात करते हैं। मेरे पास इनमें से कुछ नहीं था। मुझे महसूस होता है कि मैंने जीवन के कुछ खास अनुभव मिस कर दिए।

थोड़ा बड़ा हुआ तो कमाई का चसका लगा। 16 की उम्र से मोबाइल फोन बेचने लगा था। 17 की उम्र में कॉल सेंटर में काम करना शुरू कर दिया था। ये 17 की ही उम्र थी जब मैंने पहली बार शेयर बाजार में प्रवेश किया। तब मेरा ट्रेडिंग अकाउंट ‘शेरखान’ के साथ हुआ करता था। इस बाजार में आप पैसा लगाते हैं, कमाते हैं, गंवाते हैं, फिर कमाते हैं... ये चक्र चलता रहता है लेकिन यह आपको अनुभव देता जाता है।

जब कंपनी अच्छा करती है तो उसके पीछे कई तथ्य होते हैं जिसमें मेहनत के अलावा टाइमिंग और लक का भी योगदान होता है। मुझे लगता है कि जो लोग भी कंपनियां चला रहे हैं उन्हें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि आपकी प्रासंगिकता कम हो सकती है। हर इंडस्ट्री में लगातार आपसे स्मार्ट लोग आते रहेंगे और नई पीढ़ी चीजें संभालती रहेगी। मैं अभी 34 साल का हूं और मुझे लगता है कि अगले पांच साल में मैं कम रिलेवेंट हो जाउंगा। कोई नया बंदा आएगा, जो 25 साल का होगा वो ज्यादा लाव-लश्कर के साथ बेहतर करने लग जाएगा। आज मुझे ऐसे ही लोगों से ज्यादा स्मार्ट होने की जरूरत है। मुझे ये निश्चित करना होगा कि मैं ऐसे लोगों को नौकरी पर रखूं जो इतना दम रखते हैं। ये इंतजार तो कतई नहीं कर सकता कि ये लोग आगे बढ़कर मेरी प्रासंगिकता खत्म कर दें। मुझे लगता है कि आप ऐसा सोचेंगे तो कंपनी को ज्यादा लंबा जीवन दे पाएंगे।

मैं अभी भी खुद को सफल नहीं मानता। मैं अभी खुद को असुरक्षित दायरे में ही रखता हूं। मैं सोचता हूं कि इस सोच से बाहर आने के लिए भी जरूरी है कि आप अच्छे लोगों से घिरे रहें। ये वो लोग होने चाहिए जो आपकी आलोचना भी करें, विरोध भी करें, आपकी हर चीज पर सवाल भी करें।’

पैसे के पीछे मत भागो, उसका बहाव अपनी तरफ करो

एक बार मेरे परिवार में किसी ने मुझ से धन की देवी लक्ष्मी के संदर्भ में कहा था ‘लक्ष्मी जी कमल पर विराजित हैं, जो पानी पर तैरता रहता है। आप कभी उस चीज के पीछे नहीं जा सकते जो तैर रही हो। आप करीब जाएंगे, वो और दूर हो जाएगी। आपको सिर्फ इतना करना करने की आवश्यकता है कि वो आपकी ओर बहती हुई आ जाए।’ मैंने इस राय को काफी गंभीरता से लिया। बचपन में मैं पैसों के पीछे भागने वाला हुआ करता था लेकिन अब कुछ साल से मैंने इसकी चिंता छोड़ दी। जब पैसों की चिंता बंद की तो महसूस हो रहा है कि मेरा जीवन ही बदल गया है।

(इस साल फरवरी में सोशल मीडिया के ‘टीआरएस’ मंच पर निखिल कामत)

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