टिप्स:सोच-विचार करना अच्छा है पर ‘ओवरथिंकिंग’ से बचना जरूरी है

2 महीने पहले
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  • जरूरत से ज्यादा सोच-विचार करने से तनाव होता है और आपके निर्णय लेने की क्षमता भी कमजोर पड़ती है...

धैर्यपूर्वक सोच-विचार करना लीडरशिप के आवश्यक गुणों में से एक है। लेकिन कई बार यही सोच-विचार ‘ओवरथिंकिंग’ का रूप ले लेता है। नए दृष्टिकोण अपनाना, नए सिरे से सोचना अच्छा है लेकिन यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि ज्यादा सोच-विचार करते हुए कहीं आप तनाव के दायरे में ना आ जाएं। जानिए थोड़ा-बहुत सोच-विचार कर कम समय में बेहतर निर्णय कैसे ले सकते हैं।

परफेक्शन की बजाय काम पर फोकस करें

किसी भी काम को करते हुए परफेक्शन के बारे में ज्यादा ना सोचें। केवल अपने काम पर फोकस करें। परफेक्शन के पीछे भागेंगे तो हो सकता है अपने उद्देश्य से ही भटक जाएं। इससे बचने के लिए खुद से ऐसे सवाल करें कि वह कौन-से निर्णय हैं जिनका आपकी प्राथमिकताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा? आपके पास जो भी जानकारी मौजूद है उसके आधार पर आपका अगला कदम क्या होना चाहिए?

समस्या को जरूरत से ज्यादा बड़ा ना बना दें

इससे पहले कि आप कोई निर्णय लें यह जानने की कोशिश करें कि इस निर्णय से आपके कौन-से लक्ष्य प्रभावित होंगे और किन लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। इस तरह आप यह तय कर पाएंगे कि क्या सार्थक है क्या नहीं। इस दौरान यदि आप असफलता के डर की वजह से ठहर जाते हैं तो विचार करें कि आज से दस दिन, दस महीने या दस साल बाद आप इस निर्णय के बारे में क्या सोचेंगे?

अपने इंट्यूशन को समझकर उसका लाभ लें

ऐसा माना जाता है कि सहज-बोध या इंट्यूशन के आधार पर दिमाग किसी भी स्थिति को पहले समझता है, फिर तुरंत ही आपके सभी तजुर्बों का अध्ययन कर उसी आधार पर सर्वश्रेष्ठ निर्णय लेता है। शोध भी बताते हैं कि यदि सहज-बोध और विश्लेषणात्मक सोच मिल जाए तो ये आपको बेहतर और स्मार्ट निर्णय लेने में मदद करते हैं और कोई भी चुनाव करने से पहले आपका आत्मविश्वास बढ़ा देते हैं।

प्रतिबंध लगाएं, खुद को एक डेडलाइन दें

सोच पर नियंत्रित होना बहुत जरूरी है। आप जितना ज्यादा सोच-विचार करेंगे उतना ही ज्यादा इसके अंदर धंसते चले जाएंगे। जिस बात पर आपको केवल आधा घंटा देना चाहिए यदि उसे आप हफ्ता देते हैं तो इस तरह आप अपने 7 दिन बर्बाद करते हैं। किसी भी काम को आगे बढ़ाना है तो समय सीमा तय करें। सोच-विचार करने का समय भी निर्धारित करें। खुद को एक डेडलाइन दें और उसी के अंतर्गत अंतिम निर्णय लें।

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