इंस्पायरिंग:जब अपने दायरे से बाहर निकलेंगे तब समझ पाएंगे यह दुनिया कितनी बड़ी है - एंजेलिना जोली

एक महीने पहले
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  • एंजेलिना जोली अपनी लिखी किताब ‘नो यॉर राइट्स’ के लिए चर्चा में हैं। वो उन लोगों में से हैं जो दूसरों के लिए सोचते हैं, उनका दर्द महसूस करते हैं। एंजेलिना ने अपनी मां से यह कला सीखी। यह बात उन्होंने 2013 के अपने एक भाषण में इस तरह बताई थी...

‘मेरी मां कला प्रेमी थीं। उन्हें फिल्में भी बेहद पसंद थीं। मैंने जो भी किया, उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया। किसी भी फिल्म पर बात करने पर वो अक्सर कहा करती थीं, ‘इसी के लिए ही तो हैं फिल्में’। बतौर कलाकार उनका करियर कभी नहीं रहा। उन्हें कभी भी अपनी थिएटर क्लास के परे खुद को व्यक्त करने का मौका नहीं मिला। लेकिन वह चाहती थीं कि मैं और मेरा भाई जैमी यह जानें कि कलाकारों के रूप में जीवन कैसा होता है। उन्होंने हमें वह मौका भी दिया।

मुझे हर ऑडिशन के लिए वो ही लेकर जाती थीं और मेरे इंतजार में घंटों कार में बैठी रहती थीं। जब मुझे काम नहीं मिलता तो निराशा दूर करने के लिए मुझे अच्छा महसूस करवाने की कोशिश करतीं। जब मुझे काम मिल जाता था तो हम खूब उछलते-कूदते और छोटी बच्चियों की तरह चीखते-चिल्लाते थे। देखा जाए तो वह अच्छी आलोचक नहीं थीं, क्योंकि उनके पास बुरा कहने के लिए कुछ था ही नहीं। उन्होंने मुझे हमेशा प्यार दिया और खुद पर भरोसा करना सिखाया।

एक बात वो जरूर जानती थीं कि ऐसे जीवन का कोई मतलब नहीं है जो दूसरों के लिए किसी मायने का ना हो। यब बात मुझे लंबे समय तक समझ नहीं आई। मैं कम उम्र में ही इस बिजनेस में आ गई थी और खुद के अनुभवों और अपने ही दर्द के बारे में चिंतित रहा करती थी। लेकिन जब मैं खूब सफर करने लगी, घर के बाहर रहने लगी और दुनिया को नजदीक से देखने लगी, तब मैंने दूसरों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझी। मुझे मां की बात का मतलब समझ आने लगा।

मैं जब युद्ध और अकाल झेल चुके लोगों से मिली, तब मुझे अहसास हुआ कि इस दुनिया के अधिकांश लोगों के लिए जीवन कैसा है। मैं वाकई कितनी भाग्यशाली थी कि मेरे पास खाने के लिए खाना रहा, मेरे सिर पर छत रही, रहने के लिए एक सुरक्षित देश रहा, परिवार के सुरक्षित और स्वस्थ रहने की खुशी रही। हम सभी जो यहां बैठे हैं... इस लिहाज से सभी भाग्यशाली हैं।

मुझे कभी समझ में नहीं आया कि क्यों मेरी तरह कुछ लोग भाग्यशाली होते हैं जो अवसरों के साथ पैदा होते हैं और जिनके पास जीवन जीने की एक राह होती है...और क्यों दुनियाभर में मेरे जैसी कोई महिला, जिसमें समान क्षमताएं और समान इच्छाएं हैं, मेरी तरह वर्क एथिक्स और अपने परिवार के लिए प्यार है, वह ज्यादा बेहतर फिल्में बना सकती है, बेहतर भाषण दे सकती है... लेकिन वह केवल एक शरणार्थी शिविर में सिर छुपा रही है। उसकी कोई आवाज ही नहीं है। उसे तो बस इस बात की चिंता रहती है कि उसके बच्चे आज क्या खाएंगे, कैसे सुरक्षित रहेंगे और क्या वो कभी अपने घर लौट पाएगी।

मैं नहीं जानती कि उसके और मेरे जीवन में ये फर्क क्यों है। मुझे यह समझ नहीं आता है, लेकिन मैं अपनी मां की बात मानूंगी। उनके लिए मेरा यह जीवन उपयोगी हो इसके लिए मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगी। आज यहां ये अवॉर्ड लेने का मतलब है कि मैंने वो किया है, जो मेरी मां कहा करती थी। अगर वह जीवित होतीं, तो उन्हें बहुत गर्व होता, इसलिए मैं उनका शुक्रिया अदा करती हूं।’

(2013 के पांचवें एन्यूअल गवर्नर्स अवॉर्ड्स में हॉलीवुड एक्ट्रेस एंजेलिना)

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