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सुलझन:ज़्यादा ग़ुस्सा अच्छा नहीं होता...

संचिता चौहानएक महीने पहले
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  • गु़स्सा या नाराज़ होना इंसानी फितरत है। अधिकांश लोग यह भी जानते हैं कि अधिक ग़ुस्सा भी नुुकसानदायक होता है।
  • इसे कम कैसे किया जाए या इससे छुटकारा कैसे पाया जाए, इसकी तरक़ीबें नहीं जानते। तो आज जान लीजिए।

थोड़ा समय लें
अक्सर हम ग़ुस्से में ऐसे शब्दों का प्रयोग कर जाते हैं, जो नहीं करने चाहिए। जब भी बहस हो रही हो या बात बिगड़ती दिख रही हो तो स्थिति समझिए और फौरन थोड़ी देर को शांत हो जाएं। जो बोलना चाहते हैं, उसे बोलने से पहले मन में दोहराएं। समझ पाएंगे कि वो कहने योग्य है या नहीं।

व्यस्त हो जाएं
लगता है कि ग़ुस्सा बढ़ रहा है तो ख़ुद को काम में व्यस्त करने की कोशिश करें। बालकनी से कपड़े उठा लाएं, फ्रिज में बॉटल भरकर रख दें, कमरा समेट दें या कोई और काम करने लगें। कुछ देर में ग़ुस्सा ख़ुद-ब-ख़ुद छूमंतर हो जाएगा।

साझा करें
किसी दोस्त, रिश्तेदार के साथ गु़स्से की वजह साझा करें और हल सुझाने के लिए कहें। जब अपने ग़ुस्से की वजह साझा करेंगे तो ख़ुद में सकारात्मकता पाएंगे।

कुछ मीठा खा लें
जहां ग़ुस्सा आए, उस जगह से चलें जाएं। बालकनी में बैठें, बाग़ीचे या फिर छत पर जाएं। किसी मीठी याद के बारे में सोचते हुए कुछ मीठा खाएं।

चिड़चिड़ाहट? बाय!!
कमरा अस्त-व्यस्त हो या बच्चों के खिलौने बिखरे दिखंे तो मन ही मन कुपित होने के बजाय बच्चों से ही सफाई के लिए कहें।

संगीत का सहारा
ग़ुस्सा आए या उदासी हो, तो संगीत सुनें। यदि नृत्य पसंद हो तो पसंदीदा गाना लगाएं और थिरकें। गुनगुनाने की कोशिश भी करें।

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