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  • Relationships Are Performed From Both Sides. Vibha Was Trying The Same But Maybe Not Anil…!

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कहानी ‘परफेक्ट मैरिज’:रिश्ते दोनों ओर से निभाए जाते हैं, विभा भी यही कोशिश कर रही थी लेकिन शायद अनिल नहीं...!

दीप्ति मित्तल3 महीने पहले
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  • दफ़्तर में अपने सहकर्मियों के रिश्तों को मंझधार से निकाल लाने में माहिर इंसान के तौर पर मशहूर अनिल अपने आपको एक परफेक्ट जीवनसाथी मानता था।
  • क्या आज विभा ने उसे उसी के व्याकरण में ‘परफेक्ट’ बना दिया?

‘बहुत थक गया हूं यार...फ्रायडे तक आते-आते हालत पतली हो जाती है’, अनिल चपाती का बड़ा-सा कौर मुंह में ठूंसते हुए बोला। ‘अरे...अरे, ज़रा आराम से...’, विभा ने टोका तो अनिल पानी के घूंट से गले में अटका कौर गटक गया। ‘आज भी लेट... फिर से कुछ जरूरी काम आ गया था क्या?’

‘हां, बहुत ज़रूरी..., आज मैंने थोड़ी सोशल सर्विस की, एक शादी टूटने से बचा ली।’ बताते हुए अनिल का चेहरा गर्व से अकड़ गया। विभा उसे प्रश्नवाचक नज़रों से देख रही थी। ‘आचिंक्य है ना..., मेरा जूनियर, उसी के साथ एक-डेढ़ घंटे बैठा था। सालभर हुआ नहीं शादी को और डायवोर्स की नौबत आ गई।’

‘अच्छा?’ ‘आजकल की जेनरेशन ना, रिश्ते निभाना जानती ही नहीं...।’ ‘कुछ प्रॉब्लम?’

‘प्रॉब्लम क्या, बस वही कम्यूनिकेशन प्रॉब्लम... जब दोनों साथ समय नहीं बिताएंगे तो दूरियां आ ही जाएंगी। उसको आज बैठाकर वही समझाया, बीवी को टाइम दो, उससे बातचीत करो, उसकी भी सुनो, खाली अपनी मत थोपो..दोनों कहीं साथ घूमने निकल पड़ो, छुट्टी का मैं देख लूंगा...। यू नो विभा, आजकल ये मोबाइल, सोशल मीडिया के चक्कर में मियां-बीवी में कम्यूनिकेशन बहुत कम हो रहा है इसीलिए शादियां बिखर रही हैं। हेल्दी कम्यूनिकेशन रखना, एक दूसरे को स्पेस देना, एक-दूसरे से पूछकर निर्णय लेना... यही तो कामयाब शादी के मंत्र हैं...।’ अनिल तेज़ी से खाए जा रहा था और बोलता जा रहा था।

‘हम्म...’

‘पता है विभा, ऑफिस में सब हमारी शादी को परफेक्ट मानते हैं। मैं तो ऑफिस का रिलेशनशिप एक्सपर्ट कहलाने लगा हूं, किसी को कुछ भी प्रॉब्लम हो, मुझ से सलाह मांगने लगता है। गीता कह रही थी, सर आपको तो कॉउंसलिंग फीस लेनी शुरू कर देनी चाहिए, मालामाल हो जाएंगे। ऑफिस में कितने लोगों के रिश्ते बिखरने से बचा रहे हैं आप...’ अनिल हंसते हुए बोला तो थोड़ी खांसी उठी, फिर से पानी पीकर खाना गटका।

‘सुनो जरा आराम से खाया करो, बातें बाद में कर लेना...’ ‘ये लो, सबकी बीवियां इसलिए परेशान हैं कि उनका पति उनसे बात नहीं करता और मैं कर रहा हूं तो तुम टोक रही हो।’ ‘मैं कह रही थी...’

‘अच्छा सुनो, संडे को बॉस लंच पर आ रहे हैं... प्रमोशन का टाइम चल रहा है, थोड़ा मक्खन तो लगाना पड़ेगा... उनकी अच्छे से दावत करना...’, अनिल विभा की बात बीच में ही काटकर बोला। ‘संडे...? संडे तो मुझे मम्मी के यहां जाना था... बताया तो था। दीदी भी आ रही हैं, कितने दिन हो गए उन्हें देखे हुए...’

‘ओह, मैं भूल गया... मगर बॉस के पास वही टाइम स्लॉट फ्री था...आजकल सबने लाइन जो लगा रखी है, मस्कागिरी करने के लिए... तुम कभी और चली जाना...’ इधर बेपरवाह स्वर था और उधर हताशा उभरी। ‘हम्म... तो कल कहीं चलें, बहुत दिन हो गए कहीं साथ नहीं गए...’

‘नॉट पॉसिबल यार, बहुत से पेंडिंग वर्क निपटाने हैं, मैं नहीं जा पाऊंगा... हां, तुम्हारा किसी फ्रेंड के साथ प्रोग्राम बनता है तो जा सकती हो।’ ‘हूं.;.’ विभा का चेहरा बुझ गया।

‘मैंने आचिंक्य को यही समझाया बीवी को स्पेस भी दो, वह तुम्हारी जायदाद नहीं है कि कहीं अकेले आ-जा ना सके। अपने फ्रेंड सर्किल में इंजॉय न कर सके... मगर वह ठहरा रूढ़िवादी किस्म का आदमी...’ अनिल किसी मशीन की तरह खाता जा रहा था और बोलता जा रहा था। शायद उसने नोटिस भी नहीं किया कि विभा ने आज दाल साउथ इंडियन स्टाइल में बनाई है, चावल भी नारियल और राई का तड़का लगाकर फ्राइ किए हैं...।

‘बाकी क्या?’ ऑचिंक्य प्रकरण से झल्लाई विभा ने बात की दिशा बदली। ‘आज प्रेज़ेंटेशन बहुत अच्छा गया, क्लाइंट खुश हो गया।’ ‘हूं’

‘प्रशांत यूएसए से वापस आ गया। उसने वहां से लाईं चॉकलेट्स बांटी थीं। मैं थोड़ी घर ले आया हूं। कल बच्चों को दे देना।’ ‘हूं’

‘सुनो, थोड़ी देर में मेरा यूएस कस्टमर के साथ कॉल है, तुम सो जाना और सोने से पहले मुझे एक कप कॉफी दे देना...’ डिनर ख़त्म कर अनिल फटाफट उठा। ‘सुनो तो...’

‘बाद में सुनूंगा, अभी बहुत बातें हो गई...’ कहकर अनिल लैपटॉप उठाकर स्टडी रूम में चला गया और विभा हमेशा की तरह छूटे खाने और अधूरी बातों के साथ वहीं बैठी रह गई...।

थोड़ी देर बाद उसने कुछ सोचकर फोन उठाया और पति को मैसेज कर दिया, ‘तुम्हारे पास मेरी बातें सुनने का समय नहीं है, इसलिए मैसेज कर रही हूं। अपनी सुविधानुसार पढ़ लेना। मैं कल ही दो दिन के लिए मम्मी के यहां जा रही हूं..अकेली..। दो दिन बच्चे तुम्हें ही संभालने हैं। बॉस को कोई बहाना बना देना...कहना कुछ पर्सनल पेंडिग वर्क निपटाने हैं...। और हां, बहुत लेट हो गया है, मैं सोने जा रही हूं, कॉफी ख़ुद ही बना लेना...। एंजाय यॉर कॉल, गुडनाइट..।’

अनिल ने तुरंत मैसेज पढ़ लिया। वह बदहवास-सा कमरे से भागकर आया, ‘सुनो तो...’, मगर तब तक विभा सोने जा चुकी थी।

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