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संविधान का निर्माण:इन महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

एक महीने पहले
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  • भारतीय संविधान को मूल रुप देने वाली समिति में 15 महिलाएं भी शामिल थीं।
  • इन्होंने संविधान के साथ भारतीय समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हमारा संविधान किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लम्बा लिखित संविधान है। इस संविधान को मूल रुप देने वाली समिति में 15 महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने संविधान के साथ-साथ भारतीय समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसी ही कुछ महिलाओं का ज़िक्र हम यहां कर रहे हैं।

दक्षिणानी वेलायुधन

32 वर्षीय दक्षिणानी संविधान सभा की सबसे युवा सदस्य थीं। वे संविधान सभा की एकमात्र दलित महिला भी थीं। संविधान सभा की पहली बैठक में उन्होंने कहा था, 'संविधान का कार्य इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग भविष्य में किस तरह का जीवन जिएंगे। मैं आशा करती हूं कि समय के साथ ऐसा कोई समुदाय इस देश में न बचे जिसे अछूत कहकर पुकारा जाए।'

अम्मू स्वामीनाथन​​​​​​​​​​​​​​

13 वर्ष की उम्र में जब अम्मू से कहा गया कि उन्हें अब शादी करनी ही पड़ेगी, तो उन्होंने यह शर्त रखी कि वे शादी तभी करेंगी जब उन्हें मद्रास जाकर शिक्षा लेने की अनुमति दी जाएगी। 24 नवम्बर, 1949 को संविधान के प्रारुप को पारित करने डॉ. आम्बेडकर द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपने भाषण में अम्मू के ये शब्द थे-'बाहर लोग यह कह रहे हैं कि भारत ने महिलाओं को समान अधिकार नहीं दिए हैं। लेकिन अब हम कह सकते हैं कि हम भारतीयों ने जब अपने संविधान का निर्माण किया तब हर नागरिक के साथ महिलाओं को भी समान अधिकार दिए हैं।'

हंसा जीवराज मेहता

संयुक्त राष्ट्र के 'मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा' में कथन था- 'सभी पुरुष स्वतंत्र और समान पैदा होते हैं।' इसे संशोधित करके लिखा गया- 'सभी मनुष्य स्वतंत्र और समान पैदा होते हैं।' और इस संशोधन का श्रेय जाता है हंसा जीवराज मेहता को। हंसा महिला अधिकारों की प्रबल पक्षधर थीं। 15 अगस्त, 1947 को हंसा ने महिलाओं की ओर से स्वतंत्र भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज प्रस्तुत किया था।

लीला रॉय​​​​​​​​​​​​​​

1946 में लीला संविधान सभा में शामिल हुईं और बहस में सक्रिय रुप से भाग लिया। उन्होंने हिंदू कोड बिल के तहत महिलाओं को सम्पत्ति का अधिकार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, हिंदुस्तानी को राष्ट्रीय भाषा घोषित करने जैसे मामलों की ज़बरदस्त पैरवी की थी।

सुचेता कृपलानी​​​​​​​​​​​​​​

​​​​​​​भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अग्रिम पंक्ति के नेताओं में सुचेता भी शामिल थीं। पंडित जवाहरलाल नेहरु के प्रसिद्ध भाषण 'नियति से साक्षात्कार' के पूर्व वंदे मातरम्, सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा और जन गण मन गाने के लिए सुचेता कृपलानी को आमंत्रित किया गया था।

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