बेंगलुरू एयरपोर्ट हमें कुदरत के पास ले जाता है:एयरपोर्ट की डिजाइन हवाई यात्रा के तनाव और बेचैनी को कम करने में प्रकृति की ताकत बताती है

14 दिन पहले
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केम्पेगोडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेंगलुरू। - Dainik Bhaskar
केम्पेगोडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेंगलुरू।
  • कई डिजाइन धरोहर बचाने के प्रयासों को सामने रखते हैं

कोविड-19 महामारी, यूक्रेन पर रूसी हमले और खराब मौसम से आई आपदाओं के कारण कई प्रोजेक्ट पिछले कुछ समय से लटके पड़े हैं। फिर भी, सर्वश्रेष्ठ वास्तुशिल्प हमारे काम करने, सोचने के तरीके और स्थानीय समाज से हमारे रिश्तों को बदल सकता है।

यहां जिन डिजाइनों का जिक्र है, उनमें से कुछ तो संकट के पलों को भुलाने में मदद करते हैं। यूक्रेन की महान आर्किटेक्चरल धरोहर को बचाने के प्रयास और पुरानी कलाकृतियों को सहेजने वाला मिस्र का म्यूजियम राष्ट्रीय पहचान को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों के खिलाफ निश्चय को बताता है। कुछ डिजाइन प्रकृति को सुरक्षित रखने की भूख का अहसास कराते हैं। भारत में बेंगलुरू का एयरपोर्ट और मैनहट्टन, न्यूयॉर्क में आसमान छूती इमारत के पीछे सार्वजनिक गार्डन हमें उस जगह कुदरत के पास ले जाता है, जहां हमने उसकी बहुत कम उम्मीद की होगी। ह्यूस्टन में उत्तर अमेरिका के घास के मैदान का दृश्य नष्ट हो चुके परिवेश की याद दिलाता है। मेजाटलान, मेक्सिको में एक एक्वेरियम और अमेरिकन नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम दर्शकों को प्राकृतिक दुनिया के संबंध में अलग तरह से सोचने का रास्ता दिखाता है। केम्पेगोडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेंगलुरू के टर्मिनल 2 पर एक छोटा तालाब शहर की झीलों की तस्वीर पेश करता है। आर्किटेक्चर कंपनी एसओएम ने इसे गार्डन में टर्मिनल नाम दिया है। तालाब के चारों ओर यात्रियों को लाने-ले जाने वाले रैम्प हैं। 27 लाख वर्ग फुट में फैले एयरपोर्ट में हर साल ढाई करोड़ यात्रियों की क्षमता का विस्तार किया जा रहा है। चेक इन काउंटर के आसपास लटकी बास्केटों में अंगूर की बेलें लटकती हैं।

ग्लास की दीवारों से घिरे टर्मिनल को तीन मंजिला ऊंचा जंगल कह सकते हैं। यहां बड़ी संख्या में पेड़ लगे हैं। अक्टूबर में डिजाइन सार्वजनिक किया जाएगा। यह हवाई यात्रा के तनाव और बेचैनी को कम करने में प्रकृति की ताकत बताता है। डबलिन की फर्म हेनेगन पेंग ने मिस्र का विशाल ग्रेंड इजिप्शियन म्यूजियम डिजाइन किया है। इसका निर्माण कई दशकों से चल रहा है। इसके साल के अंत तक पूरा होने की खबर है। यह दस लाख वर्गफुट में फैला है। यहां नील नदी के पास मिस्र के विराट पिरामिड खड़े हैं। लंबे गार्डन और बड़े बाजार लोगों को रेगिस्तान की तरफ ले जाते हैं।

प्रवेश द्वार के पास सम्राट रेमसेस द्वितीय की 40 फुट ऊंची प्रतिमा लगी है। तूतनखामेन की कब्र से निकली 5300 वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी। युद्धग्रस्त यूक्रेन की विरासत को बचाने के लिए वर्ल्ड मॉन्यूमेंट्स फंड ने एक फंड स्थापित किया है। हेलेन फ्रेंकेनथेलर फाउंडेशन ने फंड में पांच लाख डॉलर दिए हैं। प्रोजेक्ट के तहत देश के लकड़ी से बने 2500 ऐतिहासिक चर्चों को नया रूप दिया जाएगा।

जेम्स रसेल
© The New York Times

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