डेमोक्रेट्स ने विरोध में वोट देकर प्रस्ताव रोका:अमेरिका में दवाइयों के मूल्य अन्य देशों से 250% ज्यादा, फिर भी उन्हें कम करने का विरोध

2 महीने पहले
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अमेरिका में हेल्थ इंडस्ट्री बहुत विराट और ताकतवर है। इसलिए दवाइयों सहित बेहद महंगी स्वास्थ्य सुविधाओं को सस्ता करने के सरकारी प्रयास विफल हो जाते हैं। ताजा मामला संसद की एक महत्वपूर्ण कमेटी द्वारा दवाइयों के मूल्य कम करने से संबंधित है। राष्ट्रपति बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन सांसदों ने विरोध में वोट देकर प्रस्ताव फिलहाल रोक दिया है।

वैसे, सदन के नेता निर्णायक विधेयक में इन उपायों को शामिल कर सकते हैं। लेकिन, सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत इतना कम है कि यदि तीनों सांसदों ने विरोध जारी रखा तो प्रस्ताव पास नहीं हो पाएगा। यह स्थिति उस समय है जब अमेरिका में दवाइयों के मूल्य अधिकतर अमीर देशों के मुकाबले 250% अधिक है। अमेरिकी कांग्रेस के डेमोक्रेट सांसद सामाजिक सेवाओं पर भारी खर्च के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अलग प्रावधान करना चाहते हैं। इसके तहत गरीबों के लिए अलग बीमा और बुजुर्गों के लिए मेडिकेयर में अतिरिक्त सुविधाएं दी जाएंगी।

सरकार को स्वास्थ्य बीमा-मेडिकेयर में दवाइयों की ऊंची कीमत चुकानी पड़ती है। दवाइयों की कीमतें घटाकर इन सेवाओं के लिए पैसा जुटाने की योजना है। संसद की कमेटी का सुझाव है कि मूल्यों में कमी से सरकार को दस साल में 36 लाख करोड़ रुपए बचेंगे। यह पैसा फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री की जेब से जाएगा। दवाओं के दाम घटने से अस्पतालों, डॉक्टरों और इंश्योरेंस कंपनियों की आमदनी भी कम हो जाएगी। लिहाजा, हेल्थ इंडस्ट्री एेसी किसी पहल को रोकने के लिए पूरी ताकत लगाती है। विरोध करने वाले सांसदों का कहना है कि फार्मा इंडस्ट्री में निवेश कम हो जाएगा। नई दवाओं की रिसर्च प्रभावित होगी। बेरोजगारी बढ़ेगी। इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

बाइडेन सरकार की योजना है कि दवाइयों के दाम घटने से होने वाली बचत के पैसे का उपयोग 257 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का खर्च निकालने के लिए किया जाए। राष्ट्रपति की योजना अमीरों और बड़ी कंपनियों पर टैक्स बढ़ाने की है। रैंड कारपोरेशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में दवाइयों के मूल्य अमीर देशों के संगठन ओइसीडी के सदस्य देशों की तुलना में 250 प्रतिशत अधिक हैं। इन ऊंची कीमतों का प्रभाव सरकार के बजट और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

इंश्योरेंस की प्रीमियम बढ़ता है। जीवन बचाने वाली औषधियां बहुत मरीजों की पहुंच से बाहर रहती हैं। दवा कंपनियों और निवेशकों के कारोबारी अनुमान अमेरिकी बाजार के भारी मुनाफे पर आधारित हैं। फार्मा इंडस्ट्री वर्षों से भारी पैसा खर्च कर रही है मूल्यों में भारी कटौती के प्रस्ताव से फार्मा इंडस्ट्री खुश नहीं है। इंडस्ट्री के संगठन पीएचआरएमए के सीईओ स्टीव यूबील का कहना है, यह अनुचित है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का बोझ अकेले दवा कंपनियों को उठाने के लिए कहा जाए।

दवा इंडस्ट्री वर्षों से राजनीतिक दलों के प्रचार अभियानों, सांसदों को प्रभावित करने और व्यापारिक समुदाय में सहयोगी तैयार करने पर भारी पैसा खर्च कर रही है। इस बीच फार्मा कंपनियों के संगठन ने मूल्य वृद्धि के खिलाफ टेलीविजन और अखबारों में जबर्दस्त विज्ञापन अभियान छेड़ दिया है। इस अभियान पर करोड़ों रुपए खर्च करने की तैयारी है।

मार्गोट सांगेर-केट्ज

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